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सावधान: ये हैं दुनिया के चार सबसे संक्रामक कोरोना वैरिएंट्स, इनमें से तीन भारत में सक्रिय

Fri, 16 Jul 2021 06:04 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क,अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना का नए वैरिएंट (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : iStock
दुनियाभर में दिसंबर 2019 से शुरू हए कोरोना वायरस संक्रमण को डेढ़ साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। इतने समय में वायरस के मूल रूप में कई बार म्यूटेशन के मामले सामने आ चुके हैं। कोरोना वायरस के कुछ म्यूटेटेड वैरिएंट्स को काफी संक्रामक और घातक माना जा रहा है। कोरोना का डेल्टा वैरिएंट इसी का उदाहरण है, जिसे भारत में दूसरी लहर का मुख्य कारण भी माना जा रहा है। डेल्टा वैरिएंट फिलहाल दुनियाभर के कई देशों में कहर बरपा रहा है। ब्रिटेन और अफ्रीका के कुछ देशों में हालात एक बार फिर से खराब होते जा रहे हैं। हाल ही में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट एक और म्यूटेशन के साथ डेल्टा प्लस में बदल गया है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 'वैरिएंट ऑफ कंसर्न' के रूप में वर्गीकृत किया है।
कोरोना के डेल्टा और  डेल्टा प्लस वैरिएंट्स के अलावा, दुनिया के कुछ हिस्सों में लैम्ब्डा और कप्पा जैसे अन्य गंभीर वैरिएंट्स के बढ़ने की खबरें भी सामने आ रही हैं। कुछ अध्ययनों में लैम्बडा वैरिएंट को डेल्टा से भी खतरनाक बताया जा रहा है। आइए इस लेख में कोरोना के सबसे संक्रामक चार वैरिएंट्स के बारे में जानते हैं। साथ ही जानने की कोशिश करते हैं कि यह वैरिएंट्स एक दूसरे से कैसे अलग हैं?
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कोरोनावायरस डेल्टा वैरिएंट (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : PIB
कोरोना का डेल्टा वैरिएंट
कोरोना का डेल्टा वैरिएंट (बी.1.617.2) मूल वैरिएंट का म्यूटेटेड स्वरूप है। भारत में इस साल की शुरुआत में इस वैरिएंट के मामले सबसे पहले सामने आए। कई अध्ययनों से पता चलता है कि यह म्यूटेटेड वायरस काफी संक्रामक हो सकता है। भारत में दूसरी लहर में दिखी तबाही के लिए इसी वैरिएंट को प्रमुख कारण के रूप में देखा जा रहा है। इसकी संक्रामकता को देखते हुए  विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे वैरिएंट ऑफ कंसर्न के रूप में वर्गीकृत किया है। कुछ रिपोर्टस में दावा किया जा रहा है कि दुनियाभर में दी जा रही वैक्सीन कोरोना के इस वैरिएंट के खिलाफ आठ गुना तक कम प्रभावी हो सकती हैं। हाल के दिनों में यूके और इज़राइल में डेल्टा वैरिएंट के कारण ही कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

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डेल्टा प्लस वैरिएंट (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
डेल्टा प्लस वैरिएंट
डेल्टा प्लस वैरिएंट्स को, कोरोना के डेल्टा का म्यूटेटेड रूप माना जाता है। हालिया महीनों में महाराष्ट्र में सबसे पहले इस वैरिएंट की पुष्टि की गई है। कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना का डेल्टा प्लस वैरिएंट, मूल डेल्टा वैरिएंट से काफी अधिक संक्रामक हो सकता है, यही कारण है कि इसे देश में संभावित तीसरी लहर के कारण के रूप में भी देखा जा रहा है। 
डेल्टा प्लस वैरिएंट भारत के अलावा दुनिय के नौ अन्य देशों में पाया गया है। यूके, पुर्तगाल, स्विटजरलैंड, पोलैंड, जापान, नेपाल, चीन, भारत और रूस में डेल्टा प्लस वैरिएंट के मामले सामने आ चुके हैं।

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कोरोना का लैम्बडा वैरिएंट (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : social media
लैम्बडा वैरिएंट
दुनिया के कई देशों में लैम्बडा वैरिएंट के कारण संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी की खबर है। हालिया रिपोर्ट में यह भी बताया जा रहा है कि इस वैरिएंट में एक-दो नहीं, सात म्यूटेशन देखे गए हैं। सबसे पहले पेरू में मिला कोरोना का यह घातक वैरिएंट अब अमेरिका और ब्रिटेन सहित दुनियाभर के कई देशों में फैल चुका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे दुनियाभर में चिंता का कारण बने कोरोना के डेल्टा वैरिएंट से भी खतरनाक मान रहे हैं। अब तक यह 31 से ज्यादा देशों में फैल चुका है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना के इस वेरिएंट के स्पाइक प्रोटीन में कई सारे म्यूटेशन देखे गए हैं, जो इसकी ट्रांसमिसिबिलिटी यानी संक्रमकता की दर काफी अधिक बढ़ा देती है। कुछ रिपोर्टस में इसे कोरोना का सबसे संक्रामक स्वरूप भी बताया जा रहा है। फिलहाल इस वैरिएंट के मामले भारत में सामने नहीं आए हैं।
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कोरोना वायरस में हो रहे हैं म्यूटेशन - फोटो : Social media
कप्पा वैरिएंट
कोरोना का कप्पा वैरिएंट (बी.1.167.1) पहली बार अक्टूबर 2020 में भारत में पाया गया था। यह कोरोनावायरस का एक डबल म्यूटेंट स्ट्रेन है। ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में कप्पा वैरिएंट के मामले तेजी से बढ़ने की खबर है। इसकी जटिल प्रकृति को देखते हुए डब्ल्यूएचओ ने इसे "वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट" के रूप में वर्गीकृत किया है। शोध बताते हैं कि कप्पा वैरिएंट में  प्राकृतिक संक्रमण और वैक्सीन, दोनों से बनी प्रतिरक्षा को मात देने की क्षमता है। यही कारण है इस वैरिएंट को विशेषज्ञ बेहद संक्रामक और खतरनाक मान रहे हैं।

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नोट: यह लेख तमाम मीडिया रिपोर्टस के विश्लेषण के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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