अंगदान को महादान कहा जाता है, जिसकी मदद से दुनियाभर में हर साल लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है। हालांकि भारत में दुर्भाग्यवश अंगों की जरूरत और अंगदान के बीच बड़ी खाई बनी हुई है। विशेषज्ञ कहते हैं, लोगों में अंगदान को लेकर जागरूकता की कमी और इससे जुड़ी मिथकों के कारण चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।
अंगदान के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इससे जुड़ी मिथकों को दूर करने के लिए हर साल 13 अगस्त को विश्व अंगदान दिवस मनाया जाता है।
रिपोर्ट्स से पता चलता है, भारत में अंगदान की दर काफी कम है। यहां पर शव से अंगदान का आंकड़ा प्रति दस लाख लोगों में एक से भी कम है। इसके विपरीत, पश्चिमी देशों में 70-80 प्रतिशत अंगदान मृतकों के शरीर से प्राप्त हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है अंगदान की कमी के साथ-साथ देश में अंगों की बर्बादी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है जो निश्चित ही चिंता बढ़ाने वाली समस्या है।