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World Organ Donation Day: भारत में अंगदान को लेकर कई सारी चुनौतियां, जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

Tue, 13 Aug 2024 12:48 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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विश्व अंगदान दिवस - फोटो : freepik.com
अंगदान को महादान कहा जाता है, जिसकी मदद से दुनियाभर में हर साल लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है। हालांकि भारत में दुर्भाग्यवश अंगों की जरूरत और अंगदान के बीच बड़ी खाई बनी हुई है। विशेषज्ञ कहते हैं, लोगों में अंगदान को लेकर जागरूकता की कमी और इससे जुड़ी मिथकों के कारण चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।

अंगदान के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इससे जुड़ी मिथकों को दूर करने के लिए हर साल 13 अगस्त को विश्व अंगदान दिवस मनाया जाता है।

रिपोर्ट्स से पता चलता है, भारत में अंगदान की दर काफी कम है। यहां पर शव से अंगदान का आंकड़ा प्रति दस लाख लोगों में एक से भी कम है। इसके विपरीत, पश्चिमी देशों में 70-80 प्रतिशत अंगदान मृतकों के शरीर से प्राप्त हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है अंगदान की कमी के साथ-साथ देश में अंगों की बर्बादी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है जो निश्चित ही चिंता बढ़ाने वाली समस्या है।
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ऑर्गन डोनेशन - फोटो : freepik.com
अंगदान को लेकर चुनौतियां

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मिथकों और लोगों में सही जानकारी की कमी के कारण हर साल लगभग बड़ी संख्या में किडनी और अन्य महत्वपूर्ण अंग नष्ट हो जाते हैं। अस्पतालों में ब्रेन डेड लोगों की समय पर पहचान नहीं हो पाती है, जिसकी वजह से संभावित दाताओं की उपलब्धता के बावजूद देश में अंग दान की दर में उल्लेखनीय कमी देखी जा रही है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, भारत जैसे घनी आबादी वाले देश में ये बड़ी विडंबना है कि हर साल हजारों जीवन रक्षक अंग या तो बर्बाद हो जाते हैं या फिर समय रहते उन्हें प्राप्त नहीं किया जाता है।
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रक्तदान दिवस - फोटो : freepik.com
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

अमर उजाला से बातचीत में पुणे स्थित एक अस्पताल में हेमेटोलॉजिस्ट और सर्जन डॉ एन. आर पाठक बताते हैं, देश में उपलब्ध अंगों और जरूरतमंद मरीजों की संख्या के बीच का अंतर बहुत बड़ा है। लॉजिस्टिक और सिस्टमिक चुनौतियों के कारण अंगों की बर्बादी भी एक गंभीर मुद्दा है, जिसमें सुधार की आवश्यकता है।

जिन राज्यों में इस दिशा में काम किया गया है वहां के परिणाम काफी अच्छे रहे हैं। गुजरात में अंगदान के आंकड़े काफी बेहतर रहे हैं जिससे दूसरे राज्यों को भी सीख लेने की जरूरत है। अंगदान को लेकर दाताओं को प्रोत्साहित करना इस दिशा में काफी मददगार साबित हो सकता है।

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रक्तदान के आंकड़े - फोटो : freepik.com
गुजरात में बढ़ा अंगदान का आंकड़ा

स्टेट ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन गुजरात के आंकड़ों के अनुसार कोविड-पूर्व समय की तुलना में 2023 में राज्य में अंगदान में 275% की प्रभावशाली वृद्धि हुई है। इसके अलावा, चालू वर्ष (2024) में अंगदान पछले वर्ष के कुल अंगदान का लगभग 50% तक पहुंच चुका है। डेटा से पता चलता है कि 2019 में 170 अंगदान हुए थे, जो 2023 में बढ़कर 469 हो गए। इसके अलावा, 2024 में अब तक 231 अंगदान हो चुके हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अन्य राज्यों को भी इन आंकड़ों से प्रेरणा लेकर अंगदान को बढ़ावा देने के तरीकों के बारे में विचार करना चाहिए।
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क्या कहते हैं डॉक्टर - फोटो : एएनआई
स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी की एसओपी

अंगदान को बढ़ावा देने और अंगों के बेहतर रखरखाव को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में यात्रा के विभिन्न साधनों के माध्यम से मानव अंगों के परिवहन के लिए पहली एसओपी जारी की है। इसके तहत अंगों को ले जाने वाली एयरलाइनों को प्राथमिकता के आधार पर उड़ान भरने और उतरने के लिए की व्यवस्था करने की अनुमति होगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव अपूर्व चंद्रा ने कहा, अंगों के परिवहन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करके, हम बहुमूल्य अंगों के उपयोग को बढ़ाने और इसके खराब होने की दिशा में बेहतर सुधार कर सकते हैं। 



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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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