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World Mental Health Day: स्ट्रेस, एंग्जाइटी और डिप्रेशन एक ही समस्या नहीं, जानिए क्या है इनमें अंतर

Tue, 10 Oct 2023 12:22 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मानसिक स्वास्थ्य की समस्या - फोटो : Pixabay
मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं मौजूदा समय में तेजी से बढ़ती गंभीर स्थितियां हैं, लगभग सभी उम्र के लोगों में इसका दुष्प्रभाव देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मानसिक स्वास्थ्य विकारों को लेकर बड़ी चिंता ये है कि सामाजिक टैबू के कारण बड़ी संख्या में रोगियों को इलाज उपलब्ध नहीं हो पाता है। ये विकार कई प्रकार के हो सकते हैं जैसे स्ट्रेस, एंग्जाइटी और डिप्रेशन आदि। अगर इनका समय पर उपचार न किया जाए तो इसके कारण कई तरह की गंभीर शारीरिक स्वास्थ्य समस्याओं का भी जोखिम हो सकता है।

वैश्विक स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य विकारों को लेकर लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 10 अक्तूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। 

मानसिक स्वास्थ्य विकारों में स्ट्रेस, एंग्जाइटी और डिप्रेशन की समस्याओं को सबसे कॉमन माना जाता है, पर ये तीनों एक दूसरे से भिन्न स्थितियां हैं। कहीं आप भी तो इन्हें एक ही समस्या नहीं समझते आ रहे हैं। आइए जानते हैं कि इनमें क्या अंतर है? सभी लोगों के लिए ये जानना जरूरी है। 
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मानसिक तनाव की स्थिति - फोटो : Pixabay
पहले स्ट्रेस के बारे में जानिए

स्ट्रेस या तनाव होना सामान्य स्थिति है, यह परिस्थिजन्य हो सकता है। तनाव, भावनात्मक या शारीरिक समस्याओं के कारण हो सकती है। किसी घटना या विचार के कारण भी आपको तनाव हो सकता है, ज्यादातर स्थितियों में ये अपने आप ही ठीक हो जाता है। हालांकि अगर आपको लंबे समय तक स्ट्रेस की दिक्कत बनी रहती है और सामान्य उपायों से इसमें लाभ नहीं मिलता है तो इस बारे में किसी चिकित्सक से सलाह जरूर ले लेनी चाहिए। 

सरल शब्दों में समझें तो जब हम दबाव या खतरा महसूस करते हैं तो इसकी प्रतिक्रिया में तनाव होता है। यह आमतौर पर तब होता है जब हम ऐसी स्थिति में होते हैं कि हमें नहीं लगता कि स्थिति का प्रबंधन या नियंत्रण कठिन हो रहा है।
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एंग्जाइटी और घबराहट की दिक्कत - फोटो : Pixabay
एंग्जाइटी की समस्या

एंग्जाइटी को चिंता विकार के तौर पर भी जाना जाता है। ये समस्या, डर, भय और बेचैनी की भावना को व्यक्त करती है। इसमें आपको पसीना आ सकता है, बेचैनी और घबराहट महसूस हो सकती है और दिल की धड़कन तेज हो सकती है। एंग्जाइटी की समस्या क्षणिक होती है हालांकि कुछ स्थितियों में इसके दीर्घकालिक दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। 

अगर आपकी एंग्जाइटी की दिक्कत ठीक नहीं हो रही है और समय के साथ ये बदतर होती जाती है तो इसे एंग्जाइटी डिसऑर्डर कहा जाता है। ये समस्या आपके दैनिक गतिविधियों को भी प्रभावित करने वाली हो सकती है, लंबे समय तक बने रहने वाली ये दिक्कत डिप्रेशन के जोखिमों को भी बढ़ाने वाली हो सकती है।

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डिप्रेशन का जोखिम - फोटो : istock
क्या है डिप्रेशन?

अवसाद (अवसादग्रस्तता विकार) को मानसिक स्वास्थ्य की गंभीर समस्या के तौर पर जाना जाता है, ये गंभीर चिकित्सीय बीमारी है जो आपके स्थितियों को महसूस करने के तरीके, सोचने और आपके कार्य करने के तरीके को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। अवसाद में उदासी की भावना बढ़ जाती है और आप उन गतिविधियों में रुचि खो सकते हैं जिनका आप पहले आनंद लेते थे।

डिप्रेशन की समस्या का बढ़ना आत्महत्या के विचारों को भी बढ़ाने वाली हो सकती है, ये स्थिति गंभीर समस्याकारक है जिसमें तुरंत किसी मनोचिकित्सक के सलाह की आवश्यकता होती है।



 
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मानसिक स्वास्थ्य विकारों के बारे में जानिए - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, एंग्जाइटी और डिप्रेशन की स्थिति में मुख्य अंतर इसके लक्षणों का होता है। अवसाद एक निरंतर उदासी की भावना है, जबकि स्ट्रेस और एंग्जाइटी क्षणिक हो सकती है, कुछ स्थितियों में इसके दीर्घकालिक दुष्प्रभावों का भी खतरा हो सकता है। इन विकारों के कई कारण हो सकते हैं, जिसको दूर करने के उपायों को लेकर गंभीरता से ध्यान दिए जाते रहने की आवश्यकता होती है। सभी उम्र के लोगों को अपने मन को स्वस्थ रखने के उपाय करते रहने चाहिए।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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