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World Liver Day 2021: जानिए लीवर में फैट जमा होने के लक्षण एवं इससे छुटकारा पाने के लिए डाइट संबंधी बदलाव     

Tue, 20 Apr 2021 04:44 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फैटी लीवर तब कहा जाता है कि इसमें 5 प्रतिशत से ज्यादा फैट हो जाता है - फोटो : Social Media

Medically Reviewed by Dr. Praveen Jha 

डॉ प्रवीण झा, गैस्ट्रोएन्टेरोलॉजी कन्सलटेन्ट,

रीजेंसी सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ 

डिग्री- एमडी, डीएम 

अनुभव- 12 वर्ष

शरीर में बहुत ज्यादा फैट का जमा हो जाना शरीर के लिए अच्छा नहीं होता है और यह आपके लीवर के लिए भी अच्छा नही होता है क्योंकि जब बहुत ज्यादा फैट आपके लीवर पर बनने लगता है तो आपको अक्सर फैटी लीवर की समस्याएं होती है। लीवर को फैटी लीवर तब कहा जाता है कि इसमें 5 प्रतिशत से ज्यादा फैट हो जाता है। बहुत ज्यादा शराब पीने से लीवर में फैट की मात्रा बढ़ती है। अभी भी ऐसे कई फैटी लीवर बीमारी के केसेस है जिसमे शराब का सेवन इस बीमारी के होने का कारण नहीं है। फैटी लीवर की कई कंडीशन नॉन-अल्कोहल लीवर बीमारी (एनएएफएलडी) की व्यापक श्रेणी में आती है, यह भारत में वयस्कों और बच्चों में लीवर की सबसे ज्यादा होने वाली बीमारियों में से एक है। अगली स्लाइड्स से जानिए किन तरीकों से इस समस्या से पाया जा सकता है छुटकारा। 

 

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खुजली, हल्की चोट और थकावट आदि शामिल होती हैं - फोटो : Social media

नॉन अल्कोहोलिक फैटी लीवर डिजीज
एनएएफएलडी होने से इसका पता नहीं चल पाता है क्योंकि इसके लक्षण थकान, मूर्छा और कमजोरी आने की तरह होते हैं। आम तौर पर जब हम अक्सर इस लक्षण का अनुभव करते हैं, तो हमें लगता है कि यह एनएएफएलडी नहीं हो सकता हैं, हम इस बात पर जोर नहीं देते है। शराब से होने वाले फैटी लीवर का आम लक्षण मतली होता है। अगर बीमारी ने कोई एडवांस कॉम्प्लिकेशन पैदा कर दी है, तो आपको सिरोसिस के सभी संकेत और लक्षण दिख सकते हैं । इन लक्षणों में भूख में कमी, त्वचा का पीला पड़ना, खुजली, हल्की चोट और थकावट आदि शामिल होती हैं। समय बीतने के साथ एनएएफएलडी का इलाज़ न करने से हार्ट की बीमारी, डायबिटीज और किडनी की बीमारी सहित अन्य एनसीडी के अलावा नॉन-अल्कोहल स्टीटोहेपेटाइटिस (एनएएसएच) के रूप में गंभीर लीवर की परेशानी हो सकती है। 

 

 

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लीवर में फैट का जमाव 27 प्रतिशत बढ़ जाएगा - फोटो : social media

फैटी लीवर से छुटकारा पाने के लिए डाइट संबंधी बदलाव
कार्ब्स का सेवन कम करें
कई रिसर्च के अनुसार केवल 16 प्रतिशत लीवर फैट आपके डाइट से मिलता है और इसका ज्यादातर हिस्सा ब्लड में फैटी एसिड से आता है। इसलिए यह जरूरी है कि हम अपने डाइट में बदलाव करें क्योंकि हमारे शरीर में अतिरिक्त कार्बोहाइड्रेट अक्सर फैट में परिवर्तित हो जाते हैं। फ्रुक्टोज युक्त खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों के सेवन से लीवर में फैट जमने लगता है। इसलिए अगर आप फलों वाली डाइट खा रहे हैं, तो संभावना है कि आपके शरीर का वजन 2 प्रतिशत बढ़ जाएगा, लेकिन आपके लीवर में फैट का जमाव 27 प्रतिशत बढ़ जाएगा। 

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एवोकाडो से भरपूर डाइट का सेवन करें - फोटो : Pixabay

इन खाद्य पदार्थों को डाइट में करें शामिल
फैटी लीवर को कम करने के लिए जैतून का तेल, नट्स और एवोकाडो से भरपूर डाइट का सेवन करें। आप प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों को भी शामिल कर सकते हैं क्योंकि यह पाया गया है कि प्रोटीन लीवर के फैट को 20 प्रतिशत कम करता है। यहां तक कि ग्रीन टी में मौजूद कैटेचिन भी एनएएफएलडी से पीड़ित लोगों में लीवर के फैट और सूजन को कम करता है। 
 

 
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फलों के जूस पीने की सलाह नहीं दी जाती है - फोटो : Pixabay

फलों के रस का न करें सेवन 
गर्मियों में पानी की तुलना में फलों के जूस पीने का मन करता है लेकिन जब आप फैटी लीवर वाले मरीज होते हैं तो फलों के जूस पीने की सलाह नहीं दी जाती है। फलों का रस शरीर में फैट के जमाव को बढ़ा सकता है। पानी पिएं क्योंकि यह लीवर को अपने सेल्युलर सिस्टम के माध्यम से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है और उन्हें आपके शरीर से बाहर जाने के रास्ते पर गति प्रदान करता है। 

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शारीरिक मेहनत से शरीर और लीवर दोनों में फैट कम होता है - फोटो : pixa

एक्सरसाइज से नियंत्रित करें लीवर फैट 
आमतौर पर 30 से ज्यादा बीएमआई वाले व्यक्ति को इस फैटी लीवर की बीमारी होने का खतरा होता है। शारीरिक मेहनत से शरीर और लीवर दोनों में फैट कम होता है। लीवर के फैट को कम करने के लिए हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग को भी लाभकारी माना गया है। यहां तक कि कम इंटेंसिटी वाली कसरत भी इस बीमारी में फायदेमंद होती है। लेकिन इसे नियमित रूप से करने की जरूरत होती है।

नोट- यह लेख रीजेंसी सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएन्टेरोलॉजी कन्सलटेंट डॉ प्रवीण झा से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉक्टर प्रवीण झा को 12 सालों का अनुभव है। उन्होंने अपनी डिग्रियां आईजीआईएमएस,पटना, केजीएमयू, लखनऊ और जीआरएमसी, ग्वालियर से ली है। 
अस्वीकरण- अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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