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World Breastfeeding Week: स्तनपान से जुड़े इन मिथ्स पर कहीं आप भी तो नहीं करते हैं यकीन? जान लीजिए क्या है सच

Mon, 07 Aug 2023 08:00 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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स्तनपान बच्चे के लिए बहुत जरूरी - फोटो : Istock
मां के पहले गाढ़े पीले दूध को बच्चे के लिए अमृत के समान माना जाता है। इसमें नवजात के शरीर के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए आवश्यक हैं। हालांकि दुर्भाग्यवश अब भी दुनियाभर में लाखों बच्चों को मां का दूध नहीं मिल पा रहा है। इसी बारे में लोगों को जागरूक करने और स्तनपान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हर साल एक से सात अगस्त को विश्व स्तनपान सप्ताह के रूप में मनाया जाता है। इस विश्व स्तनपान सप्ताह की थीम है "आइए काम के दौरान भी शिशु को स्तनपान कराएं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अब भी ज्यादातर महिलाएं स्तनपान के प्रति जागरूक नहीं है, लिहाजा शिशुओं को आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिल पाता है। वहीं अध्ययन से पता चलता है कि नवजात के मानसिक विकास के लिए यह बहुत आवश्यक है।

जागरूकता में कमी के लिए समाज में फैले मिथ्स भी एक बड़ा कारण हो सकते हैं। आइए स्तनपान को लेकर ऐसे ही कुछ मिथ्स और फैक्ट्स के बारे में जानते हैं।
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विश्व स्तनपान सप्ताह 2023 - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
मिथ: यदि आप बीमार हैं तो आपको स्तनपान नहीं कराना चाहिए।

स्तनपान ही आपके बच्चे के लिए आहार का एकमात्र स्रोत है, इसलिए रोजाना उसे स्तनपान जरूर कराएं। यदि आप बीमार हैं तो भी स्तनपान जारी रख सकती हैं। आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आपको सही उपचार मिले और आराम करें, अच्छा भोजन करें। बुखार है या संक्रमण की स्थिति है तो भी स्तनपान कराती रहें, इस बात के सबूत नहीं हैं कि मां के बीमार होने पर स्तनपान कराने से बच्चे की सेहत पर कोई असर होता है। 
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स्तनपान से जुड़े मिथ्स - फोटो : Pixabay
मिथ: आपको स्तनपान कराने से पहले अपने निपल्स को धोना चाहिए।

स्तनपान से पहले अपने निपल्स को धोना आवश्यक नहीं है। जब बच्चे पैदा होते हैं, तो वे पहले से ही अपनी मां की गंध और आवाज़ से परिचित होते हैं। निपल्स एक ऐसा पदार्थ उत्पन्न करते हैं जिसे बच्चा सूंघता है और इसमें 'गुड बैक्टीरिया' भी होते हैं जो बच्चे में स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली बनाने में मदद करते हैं। स्तनपान बच्चे के लिए पोषण का एकमात्र स्रोत है इसलिए जन्म के छह माह बाद तक नियमित रूप से बच्चे को मां का दूध पिलाया जाना चाहिए।

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ब्रेस्टफीडिंग - फोटो : getty images
मिथ: स्तनपान के दौरान मां को केवल सादा भोजन ही खाना चाहिए।

हर किसी की तरह, स्तनपान कराने वाली माताओं को भी संतुलित आहार खाने की जरूरत होती है। हालांकि स्तनपान कराने के दौरान खान-पान की आदतों में बदलाव की कोई जरूरत नहीं है। शिशु जब गर्भ में होता है तभी से उसे अपनी मां के भोजन से ही पोषण मिलता है। हां, स्तनपान करा रही हैं या गर्भवती हैं तो आप खुद के पोषण का जरूर ध्यान रखें। ये बच्चे की सेहत के लिए भी बहुत आवश्यक है।
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मांए बच्चों को अपना दूध जरूर पिलाएं - फोटो : iStock
मिथ: व्यायाम आपके दूध के स्वाद को प्रभावित कर देता है।

व्यायाम स्वास्थ्यवर्धक है, स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए भी यह बहुत जरूरी है। इसका कोई प्रमाण नहीं है कि यह आपके दूध के स्वाद को प्रभावित करता है। बल्कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को नियमित रूप से कम से कम 30 मिनट या सप्ताह में 150 मिनट के व्यायाम की आदत जरूर बनानी चाहिए। ये संपूर्ण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने में आपके लिए सबसे आवश्यक है।


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स्रोत और संदर्भ
myths about breastfeeding

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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