महिलाओं के जीवन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है-पीरियड्स। एक ऐसी प्रक्रिया जिसके बारे में जानते हुए भी इसे छुपाया जाता है, इसके बारे में बात करने से हिचकिचाया जाता है। जबकि पीरियड्स के बारे में खुलकर बात करने की जरूरत है, खासकर तब जब किशोरियों में इस प्रक्रिया की शुरुआत हो। पहली बार पीरियड्स के होने पर बच्चियों के मन में घबराहट, असमंजस, डर और चिंता भी उपजती है। इस समय होने वाला असंतुलन उन्हें और भी डरा देता है क्योंकि वे इसके बारे में कम जानती हैं। ऐसे में उन्हें सही और उचित जानकारी देना न केवल इस प्राकृतिक प्रक्रिया को लेकर उनके मन से असमंजस को हटा देता है, बल्कि उसे पीरियड्स के दौरान सामान्य जीवन जीने में भी मदद करता है।
ऐसी कई स्थितियां हैं जो पहली बार पीरियड्स शुरू होने के बाद बनती हैं और जिनके बारे में सही जानकारी किशोरियों तक पहुंचानी आवश्यक हैं। यह जानकारी उन्हें उनकी माँ, टीचर, बड़ी बहन या घर की कोई भी महिला दे सकती है।