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Summer Health Care: गर्मियों में क्यों बढ़ने लगता है ब्लड शुगर लेवल? जानिए कैसे रखें इसे कंट्रोल

Tue, 15 Apr 2025 10:21 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बढ़ती गर्मी के साथ डायबिटीज के मरीजों की दिक्कतें भी बढ़ने लगती हैं, आपको बार-बार हाई शुगर की समस्या हो सकती है इसलिए इस मौसम में सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह दी जाती है।
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डायबिटीज की समस्या - फोटो : Freepik.com
देशभर में गर्मी की शुरुआत हो चुकी है। अप्रैल के दूसरे हफ्ते में ही पूर्वी भारत के अधिकतर राज्यों में पारा 40 के पार होने लगा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस तरह से गर्मी बढ़ती जा रही है और मौसम वैज्ञानिकों का जो पूर्वानुमान है, उसे ध्यान में रखते हुए सभी लोगों को अभी से अलर्ट हो जाने की जरूरत है।

40 से ऊपर जाता तापमान हमारे शरीर को कई प्रकार से प्रभावित करने वाला हो सकता है। बढ़ती गर्मी के साथ शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) और इसके कारण होने वाली समस्याएं तो बढ़ ही जाती है, साथ ही इस तरह का मौसम पहले से ही ब्लड प्रेशर-शुगर के मरीजों के लिए और भी दिक्कतें बढ़ाने वाला हो सकता है।

डॉक्टर्स कहते हैं, बढ़ती गर्मी के साथ डायबिटीज के मरीजों की दिक्कतें भी बढ़ने लगती हैं, आपको बार-बार हाई शुगर की समस्या हो सकती है इसलिए इस मौसम में सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। 

अब सवाल ये है कि गर्मियों में ब्लड शुगर क्यों बढ़ने लगता है और इसे कंट्रोल में रखने के लिए क्या उपाय करने जरूरी हैं?
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डिहाइड्रेशन का खतरा - फोटो : Freepik.com
डिहाइड्रेशन और हाई शुगर का खतरा 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बढ़ती गर्मी का हमारी सेहत पर कई प्रकार से नकारात्मक असर होता है, यही वजह है कि पहले से ही क्रॉनिक बीमारियों जैसे डायबिटीज-ब्लड प्रेशर के शिकार लोगों को इस मौसम में अलर्ट रहना चाहिए।

गर्मी के कारण निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) का जोखिम बढ़ जाता है जो ब्लड शुगर के स्तर में उतार-चढ़ाव का कारण बन सकती है। बढ़ता तापमान इंसुलिन के अवशोषण और इसकी क्रियाशीलता को भी प्रभावित कर देती है। 

डॉक्टर बताते हैं कि उच्च रक्त शर्करा के कारण बार-बार पेशाब आता है जिससे निर्जलीकरण होने का जोखिम अधिक हो सकता है। गर्मी के दिनों में शुगर के मरीजों की समस्या बढ़ने के लिए इसे प्रमुख कारण माना जाता है।
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डायबिटीज की जांच करते रहना जरूरी - फोटो : Freepik.com
डायबिटीज की बढ़ जाती है दिक्कतें

अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन (एडीए) की रिपोर्ट के मुताबिक ब्लड शुगर लो या हाई होना दोनों ही स्थितियों में आपको पसीना अधिक आता है। जिन लोगों का ब्लड शुगर लगातार उच्च बना रहता है, उनके लिए पसीना अधिक आना तंत्रिका क्षति से संबंधित समस्याओं को भी बढ़ाने वाला हो सकता है।

मधुमेह से पीड़ित लगभग आधे लोगों को किसी न किसी रूप में तंत्रिका क्षति का अनुभव होता है। ये आंखों, हृदय से लेकर डायबिटिक फुट जैसी समस्याओं को भी बढ़ाने वाली स्थिति हो सकती है। यही कारण है कि डायबिटीज वाले सभी रोगियों को गर्मी के दिनों में सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

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स्ट्रेस के कारण भी बढ़ता है शुगर लेवल - फोटो : Freepik.com
गर्मियों में शुगर बढ़ने के ये भी हो सकते हैं कारण
  • गर्मियों में लोग अक्सर बाहर कम निकलते हैं, जिससे व्यायाम या फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है। शारीरिक गतिविधि में कमी  ब्लड शुगर कंट्रोल में अहम भूमिका निभाती है।
  • गर्मी के कारण तनाव का स्तर बढ़ जाता है, जो शरीर में कोर्टिसोल को बढ़ाने लगती है। हाई कोर्टिसोल के कारण भी ब्लड शुगर बढ़ने का जोखिम रहता है।
  • गर्मियों में लोग अक्सर शुगर वाले कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस और आइसक्रीम का सेवन ज्यादा करते हैं जो ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकते हैं।
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डिहाइड्रेशन से बचे रहने का करें उपाय - फोटो : Freepik.com
गर्मियों में ब्लड शुगर कंट्रोल रखने के उपाय

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गर्मियों में शुगर को कंट्रोल रखने के लिए कुछ उपाय मददगार हो सकते हैं।
  • रोजाना कम से कम 2-3 लीटर पानी पिएं ताकि डिहाइड्रेशन से बचा जा सके।
  • सुबह या शाम को जब तापमान कम हो, उस समय वॉक या योग करें।
  • नींबू पानी (बिना चीनी), नारियल पानी, छाछ आदि का सेवन करें। मीठे ड्रिंक्स से बचें।
  • गर्मियों में ब्लड शुगर को हफ्ते में कम से कम 3-4 बार मॉनिटर करें, खासकर अगर आप इंसुलिन या दवाइयों पर हैं।
  • नियमित रूप से डॉक्टर के संपर्क में रहें। अगर शुगर बढ़ा हुआ रहता है तो तुरंत डॉक्टर की सलाह जरूर लें। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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