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अलर्ट: सांस फूलना शरीर का साइलेंट अलार्म तो नहीं? इसे बस कमजोरी समझना पड़ सकता है भारी

Sun, 04 Oct 2026 05:06 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Breathlessness Problem: बार-बार या बिना ज्यादा मेहनत के सांस फूलना सिर्फ कमजोरी नहीं है। अस्थमा, सीओपीडी, निमोनिया, फेफड़ों की फाइब्रोसिस जैसी समस्याओं में ये लक्षण दिख सकते हैं। अचानक या लगातार सांस फूलने को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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सांस फूलने की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
क्या थोड़ी देर मेहनत के बाद आपकी भी सांस फूलने लग जाती है? ऐसा लगता है जैसा कि सांस लेना भी कठिन हो रहा है?

आमतौर पर सीढ़ियां चढ़ने, तेज चलने या थोड़ी मेहनत करने पर सांस फूलना सामान्य है। कभी-कभार ऐसा होना चिंता की बात नहीं होती, लेकिन अगर सांस फूलने की समस्या बार-बार हो रही है और पहले की तुलना में कम मेहनत में ही सांस चढ़ने लगे तो हर बार इसे कमजोरी मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए।

बार-बार सांस फूलना सिर्फ थकान का संकेत नहीं होता, कई बार गंभीर बीमारियों के कारण भी आपको इस तरह की दिक्कतें हो सकती हैं जिसे शुरुआत में लोग इग्नोर कर देते हैं। फेफड़ों में होने वाली कई बीमारियां धीरे-धीरे सांस लेने की क्षमता को प्रभावित करती हैं। अस्थमा, सीओपीडी, निमोनिया और फेफड़ों की फाइब्रोसिस जैसी समस्याओं में सांस फूलना प्रमुख लक्षण माना जाता है।

फेफड़ों के अलावा शरीर के कई दूसरे हिस्सों में भी होने वाली समस्याओं के कारण भी आपको ये दिक्कत हो सकती है। आइए इस बारे में जान लेते हैं।
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अस्थमा की दिक्कत - फोटो : Adobe Stock
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, धूम्रपान, प्रदूषण, संक्रमण और लंबे समय तक धूल-धुएं के संपर्क में रहने से फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है। समय के साथ ये गंभीर बीमारियों का जोखिम भी बढ़ा देती हैं जिससे आपको सांस की दिक्कत होने लगती है।

अस्थमा की समस्या

अस्थमा में सांस की नलियों में सूजन और संकुचन हो जाता है, जिससे हवा का अंदर-बाहर जाना मुश्किल हो सकता है। इसके कारण सांस फूलने के साथ, सीने में जकड़न, खांसी और सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आने की समस्या हो सकती है।
 
  • आमतौर पर धूल-धुआं, परागकण, ठंडी हवा या एलर्जी के कारण ये दिक्कतें ट्रिगर हो सकती है। अगर सांस फूलने के साथ बार-बार खांसी या घरघराहट होती है, तो इसकी समय रहते जांच जरूर करा लें।
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सीओपीडी और सांस की दिक्कत - फोटो : Amarujala.com/AI
फेफड़ों की क्षमता कम कर देती है सीओपीडी 

सीओपीडी यानी क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज फेफड़ों की ऐसी बीमारी है जिसके कारण सांस की नलियों में रुकावट की समस्या बनी रह सकती है। धूम्रपान की आदत को इसका सबसे बड़ा जोखिम माना जाता है। लंबे समय तक धूल, धुआं और वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने से भी खतरा बढ़ सकता है।
 
  • सीओपीडी के कारण लगातार सांस फूलने के साथ बलगम वाली खांसी और जल्दी थक जाने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। बीमारी बढ़ने पर सामान्य काम करते समय भी सांस लेने में परेशानी हो सकती है।

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निमोनिया की समस्या का खतरा - फोटो : Adobe Stock
निमोनिया में होने वाली दिक्कतें

निमोनिया फेफड़ों में होने वाला संक्रमण है। इसमें फेफड़ों की छोटी-छोटी वायु थैलियों में सूजन और तरल जमा हो जाता है, जिससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलने में परेशानी हो सकती है। इसके कारण सांस फूलने, खांसी-बुखार के साथ सीने में दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं। 
 
  • बच्चों-बुजुर्गों और पहले से फेफड़ों की बीमारी वाले लोगों में निमोनिया ज्यादा गंभीर हो सकता है। इसलिए अचानक सांस फूलने के साथ तेज बुखार या सीने में दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।
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सांस की समस्या - फोटो : Freepik.com
फेफड़ों के अलावा इन समस्याओं के कारण भी सांस में होती है दिक्कत
 
  • हार्ट कमजोर होने या हार्ट फेलियर में शरीर तक पर्याप्त रक्त पहुंचाने में दिक्कत होती है, जिससे थोड़ी मेहनत में सांस फूल सकती है।
  • हीमोग्लोबिन कम होने पर शरीर के अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंचती, जिससे कमजोरी और सांस फूलने की समस्या हो सकती है।
  • थायरॉइड हार्मोन बढ़ने पर धड़कन तेज होने, बेचैनी और सांस फूलने की दिक्कत महसूस हो सकती है।
  • शरीर का वजन ज्यादा होने पर रोजमर्रा के काम में शरीर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे जल्दी सांस चढ़ सकती है।
  • तनाव और घबराहट के दौरान तेज सांस चलने, सीने में जकड़न जैसा महसूस हो सकता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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