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Health Alert: कहीं आपकी त्वचा पर भी तो नहीं दिख रहे हैं नीले रंग के दाग? तुरंत लें डॉक्टर की सलाह

Sun, 05 Oct 2025 07:44 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • त्वचा के रंग में बदलाव जैसे इसके नीला या बैंगनी दिखने को आमतौर पर लोग मामूली चोट मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन शोध बताते हैं कि बार-बार या बिना वजह ऐसे निशान आना, किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।
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त्वचा में होने वाले बदलावों को पहचानिए - फोटो : adobe stock images
आहार, दिनचर्या में गड़बड़ी और स्क्रीन टाइम-रसायनों का बढ़ता संपर्क इंसानी सेहत के लिए दिक्कतें बढ़ाता जा रहा है। आलम ये है कि कई प्रकार की क्रॉनिक बीमारियां जो पहले सिर्फ बुजु्र्गों में देखी जाती थीं, वह 30 से कम उम्र के लोगों को भी परेशान कर रही हैं। ज्यादा चीनी और फैटी डाइट, नींद की कमी और तनाव ने क्रॉनिक बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा दिया है। 

भारत में स्थिति और भी गंभीर है, यहां हर दूसरा शहरी व्यक्ति किसी न किसी लाइफस्टाइल संबंधी समस्या का शिकार है। इन बीमारियों का शुरुआती लक्षणों को अनदेखा करना भारी पड़ सकता है।

हमारा शरीर स्वयं संकेत देता है कि अंदर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। यही कारण है कि आंखों, त्वचा में दिखने वाले असामान्य लक्षणों को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। शरीर के भीतर छिपी कई समस्याओं का संकेत सबसे पहले त्वचा पर दिख सकता है। त्वचा के रंग, बनावट और दाग-धब्बों से पता चल सकता है कि कहीं कोई बीमारी तो नहीं पनप रही है?

क्या आपकी त्वचा पर भी नीले या बैंगनी निशान दिख रहे हैं। अगर हां तो तुरंत सावधान हो जाइए।
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त्वचा पर नीले रंग के निशान - फोटो : adobe stock images
त्वचा के रंग में बदलाव का कारण

त्वचा के रंग में बदलाव जैसे इसके नीला या बैंगनी दिखने को आमतौर पर लोग मामूली चोट मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन शोध बताते हैं कि बार-बार या बिना वजह ऐसे निशान आना, किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।

नीले या बैंगनी निशान को मेडिकल भाषा में ब्रूज कहा जाता है। ये तब बनते हैं जब त्वचा के नीचे की छोटी रक्त वाहिकाएं फट जाती हैं और खून बाहर आकर जमा हो जाता है। सामान्य तौर पर ये चोट लगने के कारण होते हैं, लेकिन अगर बिना चोट के ऐसे निशान बनने लगें तो यह खतरे का संकेत है।
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ब्लड टेस्ट और पोषक तत्वों की कमी - फोटो : Adobe Stock Images
पोषक तत्वों की कमी का लक्षण

शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने से भी त्वचा पर नीले या बैंगनी रंग के छोटे-छोटे निशान नजर आ सकते हैं। 

शरीर में बिना किसी वजह नीले निशान पड़ना विटामिन-सी की कमी का कारण हो सकता है। विटामिन-सी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और घाव भरने में भी मदद करता है। ऐसे में अगर इसकी कमी हो जाए तो त्वचा पर नीले निशान पड़ जाते हैं। 

इसी तरह शरीर की रक्त कोशिकाओं को स्वस्थ रखने के लिए आयरन की जरूरत होती है। अगर रक्त कोशिकाएं स्वस्थ नहीं हैं तो शरीर को जरूरी ऑक्सीजन नहीं मिल पाएगी। इससे भी त्वचा पर नीले निशान पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। 

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डाइट को रखें ठीक - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रदीप कुमार शैल कहते हैं, त्वचा पर अगर बिना चोट के किसी तरह का परिवर्तन, जैसे नीले निशान दिख रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। ये अगर आयरन की कमी के कारण है तो आयरन की पूर्ति के लिए पालक दाछोले, राजमा, खजूर किशमिश तिल और टोका सेवन करें। केला, ब्रोकली कवी पनीर सोयाबीन भी लाभ पहुंचाते हैं। 

कुछ गंभीर स्थितियों में भी त्वचा में परिवर्तन दिखने लगते हैं, जिसका समय पर सही इलाज कराना जरूरी है।
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समस्याओं का समय पर निदान जरूरी - फोटो : Adobe stock
गंभीर समस्याओं का संकेत हो सकते हैं नीले निशान

त्वचा में दिखने वाले इस तरह के परिवर्तन कई बार लिवर की समस्याओं का संकेत हो सकते हैं, जिसमें खून जमाने वाले प्रोटीन अधिक बनने लगता है। जब लिवर ठीक से काम नहीं करता तो हल्की चोट पर भी आसानी से नीले निशान बन जाते हैं। हीमोफीलिया या प्लेटलेट्स की कमी (थ्रॉम्बोसाइटोपीनिया) जैसी समस्याओं में खून जम नहीं पाता और शरीर पर बार-बार नीले निशान दिखने लगते हैं।

कुछ लोग जो खून पतला करने वाली दवाएं या स्टेरॉयड्स लेते हैं उनमें भी त्वचा पर नीले रंग के दाग नजर आ सकते हैं। नीले निशान अगर बार-बार बन रहे हों या लंबे समय तक ठीक न हों तो इन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए। सही जांच और विशेषज्ञ की सलाह आपको गंभीर खतरे से बचा सकती है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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