आहार, दिनचर्या में गड़बड़ी और स्क्रीन टाइम-रसायनों का बढ़ता संपर्क इंसानी सेहत के लिए दिक्कतें बढ़ाता जा रहा है। आलम ये है कि कई प्रकार की क्रॉनिक बीमारियां जो पहले सिर्फ बुजु्र्गों में देखी जाती थीं, वह 30 से कम उम्र के लोगों को भी परेशान कर रही हैं। ज्यादा चीनी और फैटी डाइट, नींद की कमी और तनाव ने क्रॉनिक बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा दिया है।
भारत में स्थिति और भी गंभीर है, यहां हर दूसरा शहरी व्यक्ति किसी न किसी लाइफस्टाइल संबंधी समस्या का शिकार है। इन बीमारियों का शुरुआती लक्षणों को अनदेखा करना भारी पड़ सकता है।
हमारा शरीर स्वयं संकेत देता है कि अंदर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। यही कारण है कि आंखों, त्वचा में दिखने वाले असामान्य लक्षणों को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। शरीर के भीतर छिपी कई समस्याओं का संकेत सबसे पहले त्वचा पर दिख सकता है। त्वचा के रंग, बनावट और दाग-धब्बों से पता चल सकता है कि कहीं कोई बीमारी तो नहीं पनप रही है?
क्या आपकी त्वचा पर भी नीले या बैंगनी निशान दिख रहे हैं। अगर हां तो तुरंत सावधान हो जाइए।