फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Circadian Rhythm: शरीर की आंतरिक घड़ी में न होने पाए कोई गड़बड़ी, कहीं आपमें ये समस्याएं तो नहीं?

Mon, 10 Jul 2023 07:34 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
सर्कैडियन रिदम के बारे में जानिए - फोटो : iStock
क्या आपने कभी सोचा कि सभी लोग क्यों रात में सोते हैं और दिन में जागते हैं? हमें नींद रात में ही क्यों अधिक आती है? असल में ये हमारे सोने-जागने के चक्र सर्कैडियन रिदम, जिसे शरीर की आंतरिक घड़ी भी कहा जाता है, उससे निर्धारित होता है। जिस तरह से घड़ी में कोई दिक्कत आने से हम समय का अंदाजा नहीं लगा पाते हैं और पूरी गतिविधि बाधित होने लगती है बिल्कुल उसी तरह से सर्कैडियन रिदम में होने वाली समस्याओ के कारण भी शरीर की गतिविधि बाधित हो सकती है।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि सर्कैडियन रिदम सिर्फ नींद के समय को कंट्रोल करने के लिए ही नहीं, बल्कि शरीर के अन्य कार्यों जैसे हार्मोन्स-मेटाबॉलिज्म से लेकर स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए भी आवश्यक होती है। अध्ययनों में पाया गया है कि सर्कैडियन रिदम की समस्याओं के कारण आपको मूड और मस्तिष्क से संबंधित विकारों का खतरा हो सकता है।
विज्ञापन

2 of 5
सर्कैडियन रिदम का पूरे शरीर पर असर - फोटो : Pixabay
सर्कैडियन रिदम के बारे में जानिए

हमारी सर्कैडियन रिदम कई जीनों द्वारा नियंत्रित होती है। ये जागने के समय, शरीर के तापमान, मेटाबॉलिज्म, पाचन और भूख को नियंत्रित करने के लिए भी आवश्यक है। सर्कैडियन रिदम हमारे मस्तिष्क में 24 घंटे की आंतरिक घड़ी है जो हमारे वातावरण में परिवर्तनों पर प्रतिक्रिया करके सतर्कता और नींद के चक्र को नियंत्रित करती है।

जब तक बाहर धूप होती है हम सक्रिय अवस्था में रहते हैं पर रात होते ही यह मस्तिष्क को  मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन का संकेत भेजती है, जिससे हमे अच्छी नींद लेने में मदद मिलती है। अगर इनमें किसी प्रकार की समस्या आ जाए तो इसका पूरे शरीर पर दुष्प्रभाव हो सकता है।
विज्ञापन

3 of 5
सही रखें सोने-जागने का चक्र - फोटो : istock
अनियमित सर्कैडियन रिदम की समस्या

अनियमित सर्कैडियन रिदम, किसी व्यक्ति के सोने और ठीक से काम करने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। इसके परिणामस्वरूप कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें अवसाद-चिंता, बाइपोलर डिसऑर्डर और कई प्रकार के भावात्मक और मूड विकार शामिल हैं।

अध्ययन से पता चला है कि नाइट पर्सन यानी रात के समय अधिक सक्रिय रहने वाले लोगों में मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य समस्याओं की आशंका अधिक हो सकती है। यह आपमें अवसाद या स्ट्रेस डिसऑर्डर से संबंधित जोखिमों को बढ़ाने वाली स्थिति भी है।

4 of 5
मेटाबॉलिज्म से संबंधित समस्याएं - फोटो : istock
शारीरिक स्वास्थ्य पर भी होता है इसका असर

हमारा ब्लड प्रेशर भी सर्कैडियन रिदम का पालन करता है, यही कारण है कि सुबह उठने पर यह बढ़ता है और रात को सोते समय कम हो जाता है। अध्ययनकर्ताओं की टीम ने पाया कि सर्कैडियन रिदम के कारण आपके मेटाबॉलिज्म पर भी असर हो सकता है, जिसके कारण वजन बढ़ने, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा भी अधिक रहता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
सर्कैडियन रिदम में करें सुधार - फोटो : iStock
सर्कैडियन रिदम को कैसे ठीक रखें?

आपकी सर्कैडियन रिदम में सुधार के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। इसे ठीक रखने के लिए सोने का सही शेड्यूल बनाएं, हर रात एक ही समय पर सोने की आदत डालें। जब आप सोने के लिए जाएं तो सुनिश्चित करें कि आपका कमरा अंधेरा और शांत हो। व्यायाम करें और कैफीन-शराब के अधिक सेवन से बचें।

इन उपायों का पालन करना सर्कैडियन रिदम को ठीक रखने में आपके लिए विशेष लाभकारी हो सकता है। 


----------------
स्रोत और संदर्भ
sleep and wake cycles affect your mood


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें