फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

AI & Health: ब्रेन ट्यूमर के निदान-इलाज में मदद करेगी एआई, वैज्ञानिक बोले- ये मेडिकल क्षेत्र के लिए उपहार जैसा

Mon, 10 Jul 2023 05:12 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
तकनीकी की मदद से ब्रेन ट्यूमर का हो सकेगा इलाज - फोटो : istock
तकनीकी विकास, विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से स्वास्थ्य क्षेत्र में भी क्रांति आने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कई दुर्लभ और जटिल बीमारियों का उपचार बेहतर तरीके से करने में मदद मिल सकेगी। इसी से संबंधित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि एक नए एआई टूल की मदद से ब्रेन ट्यूमर के मामलों का इलाज जल्दी और अधिक प्रभाविकता के साथ किया जा सकेगा।

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल द्वारा इसी सप्ताह प्रस्तुत अध्ययन के अनुसार, शोधकर्ताओं ने एक नया एआई टूल विकसित किया है जो न्यूरोसर्जनों को ब्रेन ट्यूमर का इलाज करने में मदद कर सकती है। ये हर साल दुनियाभर में ब्रेन ट्यूमर के कारण होने वाली मौतों के कम करने और रोगियों की क्वालिटी ऑफ लाइफ में सुधार करने की दिशा में भी क्रांति ला सकती है।

विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस एआई टूल की मदद से ब्रेन ट्यूमर कैंसर के प्रमुख कारकों का भी उपचार पहले की तुलना में अधिक आसानी से करने में मदद मिल सकेगी।
विज्ञापन

2 of 5
ब्रेन ट्यूमर के उपचार में मिलेगी मदद - फोटो : istock
एआई की मदद से ब्रेन ट्यूमर का उपचार

दुनियाभर में न्यूरोसाइंस के तमाम शोधकर्ता दशकों से कैंसर रोगियों में सबसे आम ब्रेन ट्यूमर-  ग्लियोमास को समझने के लिए प्रयास कर रहे थे। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर कुन-ह्सिंग यू और उनकी टीम ने शोध के दौरान पाया कि मशीन लर्निंग (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से ग्लियोमा की समस्या का समय पर निदान और बेहतर उपचार करने में मदद मिल सकती है।

प्रोफेसर यू कहते हैं, विभिन्न प्रकार के ग्लियोमा के लिए अलग-अलग प्रकार की सर्जरी की आवश्यकता होती है। एआई की मदद से यह काफी आसान हो सकता है। 
विज्ञापन

3 of 5
ट्यूमर को हो सकेगा बेहतर इलाज - फोटो : Istock
जल्द और प्रभावी उपचार में मिलेगी मदद

न्यूरोसर्जन विभाग के शोधकर्ता कहते हैं, आसपास के मस्तिष्क के ऊतकों को नुकसान पहुंचाए बिना ग्लियोमा को सुरक्षित रूप से हटाने के लिए हमें कई प्रकार की रियल टाइम जानकारियों की जरूरत होती है। और ये तब तक सही तरीके से नहीं किया जा सकता जब तक कि मरीज ऑपरेटिंग टेबल पर न हो।

यू ने कहा कि अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की मदद से आमतौर पर ब्रेन टिशू सैंपल का विश्लेषण 10 से 15 मिनट के भीतर पूरा किया जा सकता है। यह सर्जरी के साथ-साथ भी हो सकता है। इसकी मदद से न सिर्फ सर्जरी की प्रक्रिया आसान होगी साथ ही हम अधिक प्रभाविकता के साथ इसे सफतापूर्वक कर सकेंगे।

4 of 5
मस्तिष्क में ट्यूमर की स्थिति समझने में मिलेगी मदद - फोटो : istock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जन डॉ डैन काहिल कहते हैं, नए मशीन लर्निंग टूल की सटीकता ग्लियोमा की संरचना का विश्लेषण करने की पारंपरिक तकनीकों की तुलना में अधिक प्रभावशाली मानी जा रही है जो निश्चित रूप से काफी बेहतर है। हर रोगी के लिए सर्जरी अलग तरह की होती है। मशीन लर्निंग यह भी बता सकती है कि ब्रेन कैंसर के इलाज में किसी रोगी के लिए क्या अलग आवश्यकताएं हैं। 

यू और अध्ययन के सह-लेखकों का मानना है कि यह तकनीकी ऑपरेटिंग रूम में यह समझने में भी मदद करेगी कि ट्यूमर कितना खतरनाक है, जिसकी मदद से हम साथ ही साथ अन्य कोशिकाओं को सुरक्षित करने के भी उपाय कर सकेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
ब्रेन ट्यूमर के इलाज की दिशा में हो सकता है बड़ा कदम - फोटो : Pixabay
तकनीकी और मेडिकल क्षेत्र

प्रोफेसर यू का कहना है कि इस तकनीकी के इस्तेमाल में अभी समय है। इसे कई स्तरों पर मान्यता भी प्राप्त करना है। लेकिन यह भविष्य में मेडिकल की दुनिया के लिए बड़ा उपहार जरूर हो सकती है। तकनीकी और मेडिकल क्षेत्र का एक साथ विकास कई गंभीर रोगों के इलाज के लिए बहुत जरूरी है। 

गौरतलब है कि इसी साल की शुरुआत में, लंदन में चिकित्सा शोधकर्ताओं की एक टीम ने एक एआई उपकरण विकसित किया था जो यह पहचान सकता है कि सीटी स्कैन में दिखी कोई असामान्य वृद्धि कैंसर कारक है या नहीं। जबकि इसके लिए अब तक अलग से लंबे परीक्षण की आवश्यकता होती रही है।



----------------
स्रोत और संदर्भ
 Artificial Intelligence Expedites Brain Tumor Diagnosis during Surgery

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें