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Heart Attack: शरीर में इस विटामिन की अधिकता हृदय के लिए हानिकारक, धमनियां हो जाती हैं सख्त-हार्ट अटैक का खतरा

Sat, 16 Mar 2024 05:53 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हार्ट अटैक का खतरा - फोटो : iStock
हृदय रोग, दुनियाभर में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक रहे हैं। ब्रिटिश हेल्थ फाउंडेशन की रिपोर्ट के मुताबिक हर 1.5 सेकेंड में एक व्यक्ति की मौत हार्ट अटैक के कारण हो जाती है। वैश्विक स्तर पर, हृदय और संचार रोगों के कारण साल 2019 में अनुमानित 9.8 मिलियन पुरुषों और 9.2 मिलियन महिलाओं की मौत हुई। कोरोना महामारी के बाद हार्ट अटैक और इसके कारण होने वाली मौतों का आंकड़ा और भी बढ़ गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को हृदय को स्वस्थ रखने वाले उपाय करते रहने की सलाह देते हैं।

ज्यादातर अध्ययनों से पता चलता है कि लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण हृदय रोग और हार्ट अटैक के मामले सबसे अधिक देखे जाते रहे हैं। इसी तरह के एक अन्य अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि शरीर में कुछ विटामिन्स की अधिकता के कारण भी हृदय रोग और हार्ट अटैक की दिक्कत हो सकती है।

नियासिन (विटामिन बी-3) उनमें से एक है, जिसकी अधिकता को हृदय स्वास्थ्य के लिए खतरनाक पाया गया है। अध्ययनकर्ताओं ने बताया, जो लोग नियासिन युक्त विटामिन-बी सप्लीमेंट का अधिक सेवन करते हैं ऐसे लोगों को हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है।
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vitamin b3 - फोटो : istock
नियासिन की अधिकता से हृदय रोगों का खतरा

वैसे तो नियासिन भी हमारी सेहत के लिए अन्य पोषक तत्वों की तरह ही आवश्यक है। ये रक्त परिसंचरण में सुधार करने में मददगार मानी जाती है। सभी प्रकार के विटामिन-बी पानी में घुलनशील होते हैं, जिसका अर्थ है कि शरीर उन्हें एकत्रित नहीं करता है। आप आहार के माध्यम से अपने शरीर की बी3 की सभी जरूरतों को पूरा कर सकते हैं।

हालांकि क्लीवलैंड क्लिनिक के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि जिन लोगों के आहार में नियासिन की अधिकता होती है, उनमें हृदय रोग और इसके कारण होने वाले जोखिम अधिक हो सकते हैं। एक अनुमान के अनुसार दुनियाभर में हर चार में से एक व्यक्ति में नियासिन का स्तर अनुशंसित मात्रा से अधिक हो सकता है। 
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धमनियों में ब्लॉकेज की स्थिति - फोटो : istock
नियासिन की अधिकता धमनियों को पहुंचा सकती है नुकसान

यहां जानना जरूरी है कि नियासिन को विटामिन बी3 या निकोटिनिक एसिड भी कहा जाता है। नेचर मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि जब हमारा शरीर नियासिन का ब्रेक डाउन करता है, तो यह 4PY नामक एक बायोप्रोडेक्ट बनाता है, जिससे शरीर की संचार प्रणाली में सूजन होने का खतरा हो सकता है। ये सूजन, रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती है जिसके कारण समय के साथ एथेरोस्क्लेरोसिस बिल्डअप का खतरा रहता है। 

एथेरोस्क्लेरोसिस धमनी की आंतरिक परत में प्लाक के निर्माण की समस्या को कहा जाता है, जिससे धमनियां मोटी और सख्त हो जाती हैं। इस स्थिति में स्ट्रोक, दिल का दौरा और हृदय की अन्य समस्याओं का खतरा काफी बढ़ जाता है।

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हृदय रोगों का बढ़ता खतरा और बचाव - फोटो : istock
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?

अध्ययनकर्ता कहते हैं, हम सभी को बिना किसी डॉक्टरी सलाह के किसी भी प्रकार के विटामिन सप्लीमेंट्स के सेवन से बचना चाहिए। आहार के माध्यम से शरीर लिए आसानी से विटामिन-बी3 प्राप्त की जा सकती है।

क्लीवलैंड क्लिनिक के लर्नर रिसर्च इंस्टीट्यूट में शोधकर्ता और अध्ययन के प्रमुख लेखक स्टेनली हेजेन कहते हैं, हमने ये अध्ययन इसलिए किया क्योंकि हमें संदेह था कि हृदय रोग के कई अज्ञात खतरे मौजूद हो सकते हैं। आहार में गड़बड़ी इसे किस प्रकार से प्रभावित करती है, इस शोध में हमें स्पष्ट तौर पर पता चलता है।
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सप्लीमेंट्स हो सकते हैं हानिकारक - फोटो : Istock
क्या है अध्ययन का निष्कर्ष?

अध्ययन के निष्कर्ष में शोधकर्ता प्रो. हेजेन कहते हैं, नियासिन का प्रभाव हमेशा कुछ हद तक विरोधाभासी रहा है। हमारे निष्कर्ष इस विरोधाभास को समझाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि हमें नियासिन का पूरी तरह से सेवन बंद कर देना चाहिए, पर इसके सप्लीमेंट्स के सेवन से बचा जाना चाहिए। खुद से ही किसी विटामिन सप्लीमेंट लेने से जोखिम रहता है कि जाने-अनजाने शरीर में इसकी अधिकता हो सकती है।

शरीर स्वस्थ रहे और ठीक तरीके से काम करता रहे इसके लिए जरूरी है कि सभी विटामिन्स का संतुलित मात्रा में ही सेवन किया जाए।



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स्रोत और संदर्भ
A terminal metabolite of niacin promotes vascular inflammation and contributes to cardiovascular disease risk

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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