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अध्ययन: कोलोरेक्टल कैंसर जैसे गंभीर रोग को कम कर सकती है हल्दी, जानिए कैसे प्राप्त करें अधिकतम लाभ

Mon, 28 Jun 2021 05:53 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हल्दी का सेवन कई मायनों में फायदेमंद - फोटो : Social media
भारत के हर घर में मसालों में हल्दी का उपयोग किया जाता है। भोजन का स्वाद बढ़ाने के साथ आयुर्वेद में कई सारी समस्याओं के इलाज में भी हल्दी के उपयोग का जिक्र मिलता है। हल्दी के फायदों के बारे में कई किताबों में भी जिक्र मिलता है। ह्यूस्टन में टेक्सास मेडिकल स्कूल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ अमिताव दासगुप्ता की किताब  "एंटीऑक्सिडेंट इन फूड, विटामिन एंड सप्लीमेंट्स: प्रिवेंशन एंड ट्रीटमेंट ऑफ डिजीज" में हल्दी के सक्रिय घटक करक्यूमिन के फायदों के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसके अलवा कई वैज्ञानिक शोध से भी पता चला है कि हल्दी में एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल, एंटिफंगल, एंटीऑक्सिडेंट और कैंसर विरोधी गुण मौजूद होते हैं। ऐसे में यह औषधि विभिन्न घातक बीमारियों जैसे कैंसर, गठिया, अल्जाइमर रोग और रुमेटीइड आर्थराइटिस के उपचार में भी बेहद कारगर हो सकती है।
आइए इस लेख में हल्दी के अध्ययन आधारित फायदों के बारे में जानते हैं, साथ ही यह भी जानते हैं कि किस प्रकार से इस औषधि का उपयोग करके अधिक से अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है?
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कई प्रकार के कैंसर को कम करने में हल्दी है लाभकारी - फोटो : iStock
कोलोरेक्टल कैंसर में हल्दी के लाभ
पश्चिमी देशों में कोलोरेक्टल कैंसर (सीआरसी) मौतों का दूसरा प्रमुख कारण है। वेन स्टेट यूनिवर्सिटी (डेट्रॉइट, मिशिगन) यूएसए में डॉक्टरों द्वारा किए गए शोध से बताया गया है कि एशियाई देशों में इस घातक रोग के मामले काफी कम हैं, जिसका मुख्य कारण खाने में दैनिक रूप से हल्दी का सेवन करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में सीआरसी का केमोथेरेपी के अलावा कोई दूसरी प्रभावी उपचार है नहीं। 
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हल्दी है जादुई औषधि (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
पेप्टिक अल्सर में हल्दी के लाभ
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि हल्दी एक ऐसी जड़ी-बूटी है जिसे जादुई कहना गलत नहीं होगा। साइंस डायरेक्ट डॉट काम ने एक क्लिनिकल परीक्षण का हवाला देते हुए डॉ जोसेफ आइचेंसर द्वारा किए गए एक अध्ययन का जिक्र किया। इस अध्ययन में पेप्टिक अल्सर की बीमारी (पीयूडी) वाले रोगियों को प्रतिदिन पांच बार 600 मिलीग्राम की मात्रा में हल्दी की जड़ का सेवन करने को दिया गया। अध्ययन के अंत में विशेषज्ञों ने पाया कि रोगियों में 12 सप्ताह के भीतर अल्सर की समस्या में 76 फीसदी तक की कमी आ गई। इसी अध्ययन से यह भी पता चला है कि 1 से 2 सप्ताह में हल्दी का सेवन अपच के लक्षणों में भी काफी हद तक सुधार कर सकता है।

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करक्यूमिन बनाती है हल्दी को कई मायनों में खास - फोटो : pixabay
कैसे प्राप्त करें अधिकतम लाभ
हल्दी में औषधीय गुणों के साथ बायोएक्टिव यौगिकों की भी मौजूदगी होते हैं, करक्यूमिन उन्हीं में से एक है। हालांकि हल्दी में वजन के हिसाब से केवल 2 से 8 प्रतिशत करक्यूमिन होता है, ऐसे में रोजाना थोड़े से मसाले से यह प्राप्त नहीं किया जा सकता। इसलिए इसका सेवन काली मिर्च के साथ करना चाहिए, जिसमें पिपेरिन होता है, जो करक्यूमिन के अवशोषण को 2,000 गुना तक बढ़ाता है। इससे हल्दी का प्रभाविकता काफी बढ़ जाती है।
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रोजाना करें हल्दी का सेवन (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
कितनी मात्रा में करें इस औषधि का सेवन
कई अध्ययनों में बताया गया है कि हल्दी की चाय के भी काफी लाभ हैं। हल्दी की चाय, कद्दूकस की हुई हल्दी की जड़ या शुद्ध पाउडर का उपयोग करके बनाई जाती है। अध्ययनों के मुताबिक वयस्कों को रोजाना 1 से 3 ग्राम की मात्रा में हल्दी का सेवन जरूर करना चाहिए। शुद्ध उत्पाद सुनिश्चित करने के लिए हल्दी को स्वयं पीसकर इस्तेमान में लाना अच्छा तरीका माना जाता है। नींबू और अदरक के साथ शहद और हल्दी का सेवन  एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-माइक्रोबियल गुणों में काफा मददगार हो सकता है।

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स्रोत और संदर्भ: 
Colorectal Cancer: Chemopreventive Role of Curcumin and Resveratrol

अस्वीकरण नोट: यह लेख वेन स्टेट यूनिवर्सिटी (डेट्रॉइट, मिशिगन) यूएसए में किए गए अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। हल्दी के अन्य फायदों के बारे में विस्तार से जानने के लिए किसी डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।
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