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सावधान: रक्त के थक्के बनना हार्ट अटैक-स्ट्रोक का बढ़ा देता है खतरा, ऐसे शुरुआती लक्षण दिखते ही हो जाएं अलर्ट

Sun, 11 Dec 2022 04:00 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हार्ट अटैक के जोखिम कारकों के बारे में जानिए - फोटो : istock
चोट या कटने की स्थिति में रक्तस्राव के जोखिम से बचाने में ब्लड क्लॉटिंग की विशेष भूमिका होती है। समय पर रक्त के थक्के बनकर शरीर से अधिक रक्त निकलने से रोकने में मदद करते हैं। पर अगर यही थक्के धमनियों में बनने लग जाएं तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकती है। धमनियों में रक्त का थक्का बनने के कारण हृदय रोग (हार्ट अटैक) और स्ट्रोक का खतरा हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कुछ प्रकार की बीमारियों, आहार-लाइफस्टाइल में गड़बड़ी की स्थिति धमनियों में रक्त के थक्के बनने का कारण बन सकती है। सभी लोगों को इसके जोखिम कारकों के बारे में जरूर जानना चाहिए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कुछ स्थितियां रक्त को तरल से जेल की संरचना में बदलने लग जाती हैं जो धमनियों में इकट्ठा होकर हृदय में रक्त के संचार को कम कर देती है, इस तरह की स्थिति हार्ट अटैक का कारण बन सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, रक्त के थक्के बनने के अगर शुरुआती लक्षणों पर समय रहते ध्यान दे दिया जाए तो गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को कम किया जा सकता है। आइए इसके कुछ लक्षणों के बारे में जानते हैं जिनपर सभी को ध्यान देते रहना जरूरी है।
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रक्त का थक्का बनने की स्थिति - फोटो : Pixabay
रक्त का थक्का बनने की समस्या

डॉक्टर कहते हैं, रक्त का थक्का बनना शरीर में होने वाली स्वाभाविक प्रक्रिया है, रक्त का थक्का न बनना अधिक गंभीर माना जाता है, ऐसे में अधिक रक्तस्राव का खतरा हो सकता है। हालांकि अगर यह रक्त में पहुंचकर धमनियों में जमा होने लगे तो स्थिति जरूर गंभीर हो सकती है। यदि कोई थक्का आपकी नसों के माध्यम से हृदय या फेफड़ों में पहुंच जाए तो इससे रक्त प्रवाह बाधित हो सकती है, जिससे हार्ट अटैक-स्ट्रोक या अन्य गंभीर समस्या का जोखिम होता है। आइए जानते हैं कि किन लक्षणों के आधार पर इस तरह की समस्याओं की शुरुआत के बारे में जाना जा सकता है।
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पैरों में ब्लड क्लॉटिंग की समस्या - फोटो : iStock
पैरों-हाथों में दिखते हैं ऐसे लक्षण

मेडिकल रिपोर्ट्स बताते हैं, रक्त के थक्के बनने की स्थिति में हर बार लक्षणों को नजर आना जरूरी नहीं है। जिन धमनियों में थक्के बनते हैं, उससे संबंधित कुछ परेशानियां जरूर हो सकती है। इसमें डॉक्टरी मदद और जांच की आवश्यकता हो सकती है। कुछ लोगों में थक्के बनने की स्थिति में त्वचा पर इसके संकेत नजर आ सकते हैं, जिनपर गंभीरता से ध्यान देकर स्थिति की पहचान की जा सकती है।

हाथों-पैरों में इसके लक्षण अधिक दिखाई देते हैं। हाथों-पैरों में बनने वाले थक्के की स्थिति में त्वचा के रंग में बदलाव, अंगों में सूजन और दर्द के साथ झनझनाहट हो सकती है। 

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हृदय की गंभीर समस्याओं के बारे में जानिए - फोटो : Pixabay
ऐसे संकेत हो सकते हैं गंभीर

हृदय की धमनियों में रक्त के थक्के बनने की स्थिति को गंभीर माना जाता है, इसे कोरोनरी आर्टरी थ्रंबोसिस के नाम से जाना जाता है। इस स्थिति में हृदय में रक्त का प्रवाह बाधित हो जाता है जिसके कारण दिल का दौरा पड़ सकता है। हृदय में रक्त का थक्का बनने की स्थिति में सीने में तेज दर्द, चक्कर आने, सांस फूलने, पीठ-गर्दन और जबड़े में दर्द, बहुत ज़्यादा पसीना आने और हृदय गति बढ़ने की समस्या हो सकती है। 
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ब्लड क्लॉटिंग से बचाव के तरीके - फोटो : Pixabay
रक्त के थक्के बनने को कैसे रोकें?

डॉक्टर्स बताते हैं, कुछ बातों को ध्यान में रखकर ब्लड क्लॉटिंग को रोका जा सकता है। अध्ययनों में पाया गया है कि वजन बढ़ने, अधिक धूम्रपान के कारण रक्त के थक्के बनने की समस्या हो सकती है। अगर आप लंबी यात्रा कर रहे हैं तो हर दो से तीन घंटे में खड़े होकर थोड़ी दूर टहलें और अपने पैरों को स्ट्रेच करें।

कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कंट्रोल करके और स्वस्थ आहार का सेवन करना रक्त के थक्के बनने की समस्या को रोकने में सहायक है। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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