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अलर्ट: 18 साल बाद सामने आया दुर्लभ 'मंकीपॉक्स संक्रमण' का मामला, जानिए इसके लक्षण और कारण विस्तार से

Sat, 17 Jul 2021 02:08 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मंकीपॉक्स संक्रमण के मामले - फोटो : WHO
दुनियाभर के तमाम देशों में कोरोना संक्रमण के दोबारा से बढ़ते मामलों के बीच तीसरी लहर का आशंका तेज हो गई है। पूरा विश्व अभी इस भयंकर महामारी से परेशान ही था कि इन सबके बीच रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। सीडीसी के मुताबिक अमेरिका का टेक्सास शहर में 'मंकीपॉक्स वायरस संक्रमण' का एक दुर्लभ मामला सामने आया है। इससे पहले साल 2003 में अमेरिका के कुछ शहरों में मंकीपॉक्स का प्रकोप देखने को मिला था। सीडीसी द्वारा साझा की गई जानकारियों के मुताबिक जिस व्यक्ति में मंकीपॉक्स की पुष्टि हुई है, उसने हाल ही में नाइजीरिया से अमेरिका की यात्रा की थी। अधिकारियों के मुताबिक संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए कई अन्य लोगों में भी संक्रमण का खतरा हो सकता है, इसकी जांच की जा रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक दुर्लभ मंकीपॉक्स वायरस, चिकनपॉक्स वायरस फैमिली से संबंधित है। इसका संक्रमण काफी गंभीर भी हो सकता है। संक्रमित व्यक्ति के शरीर पर बड़े-बड़े दानों के आधार पर इस संक्रमण की पहचान की जा सकती है।
आइए आगे की स्लाइडों में इस गंभीर और दुर्लभ संक्रमण के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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मंकीपॉक्स के मामले सामने आए - फोटो : Social media
क्या है मंकीपॉक्स संक्रमण?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक साल 1970 में पहली बार इंसानों में मंकीपॉक्स संक्रमण के मामले सामने आए थे। तब से अब तक 11 अफ्रीकी देशों में इस संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। अफ्रीकी देशों से बाहर साल 2003 में अमेरिका में मंकीपॉक्स संक्रमण के मामलों की पुष्टि की गई थी, इसके 18 साल बाद 2021 में यह पहला मामला है। रिपोर्टस के मुताबिक साल 2003 में घाना से आयात किए गए पालतू कुत्तों के संपर्क में आने के कारण अमेरिका में संक्रमण फैला था। भारत सहित एशियाई देशों में इस तरह के मामलों की पुष्टि नहीं है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि मंकीपॉक्स संक्रमण, संक्रमित जानवरों के रक्त, शारीरिक तरल पदार्थ या त्वचा के घाव के संपर्क में आने के कारण इंसानों में फैलता है। यह संक्रमण मूलरूप से किस जानवर से संबंधित है, इस बारे में वैज्ञानिकों को स्पष्ट जानकारी नहीं है।

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शरीर पर दाने निकलने से की जाती है संक्रमण की पहचान (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : pixabay
मंकीपॉक्स संक्रमण के क्या लक्षण हो सकते हैं?
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक मंकीपॉक्स संक्रमण का इनक्यूबेशन पीरियड (संक्रमण होने से लक्षणों की शुरुआत तक) आमतौर पर 6 से 13 दिनों का होता है, हालांकि कुछ लोगों में यह 5 से 21 दिनों तक भी हो सकता है। संक्रमित व्यक्ति को बुखार, तेज सिरदर्द, लिम्फैडेनोपैथी (लिम्फ नोड्स की सूजन), पीठ और मांसपेशियों में दर्द के साथ गंभीर कमजोरी का अनुभव हो सकता है। लिम्फ नोड्स की सूजन की समस्या को सबसे आम लक्षण माना जाता है। इसके अलावा रोगी के चेहरे और हाथ-पांव पर बड़े आकार के दाने हो सकते हैं। कुछ गंभीर संक्रमितों में यह दाने आंखों के कॉर्निया को भी प्रभावित कर सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मंकीपॉक्स से मौत के मामले 11 फीसदी तक हो सकते हैं। संक्रमण के छोटे बच्चों में मौत का खतरा अधिक रहता है।  

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मंकीपॉक्स वायरस के कारण हो सकते हैं संक्रमण - फोटो : Pixels
मंकीपॉक्स संक्रमण के क्या कारण हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मंकीपॉक्स नामक वायरस के कारण यह संक्रमण होता है। यह वायरस ऑर्थोपॉक्सवायरस समूह से संबंधित है। इस समूह के अन्य सदस्य मनुष्यों में चेचक और काउपॉक्स जैसे संक्रमण का कारण बनते हैं। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक मंकीपॉक्स के एक से दूसरे व्यक्ति में संक्रमण के मामले बहुत ही कम हैं। संक्रमित व्यक्ति के छींकने-खांसने से निकलने वाली ड्रॉपलेट्स, संक्रमित व्यक्ति की त्वचा के घावों या संक्रमित के निकट संपर्क में आने के कारण दूसरे लोगों में भी संक्रमण होने की आशंका रहती है।
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वैक्सीनिया वैक्सीन है मंकीपॉक्स को रोकने में कारगर - फोटो : iStock
मंकीपॉक्स संक्रमण का इलाज कैसे किया जाता है?
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक वर्तमान में मंकीपॉक्स का कोई इलाज उपलब्ध नहीं है। चेचक को खत्म करने के लिए दी जाने वाली वैक्सीनिया, टीकों को मंकीपॉक्स के खिलाफ सुरक्षात्मक माना जाता है। हालिया वर्षों में चेचक और मंकीपॉक्स की रोकथाम के लिए वैक्सीनिया वैक्सीन के थर्ड जनरेशन को मंजूरी दी गई है। कई अध्ययनों में चेचक के लिए दी जाने वाली वैक्सीन को मंकीपॉक्स संक्रमण रोकने में 85 फीसदी तक कारगर पाया गया है।
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मंकीपॉक्स से बचने के लिए सुरक्षात्मक उपायों को प्रयोग में लाएं - फोटो : Pixabay
मंकीपॉक्स संक्रमण से कैसे बचा जा सकता है?
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक मंकीपॉक्स संक्रमण के जोखिम कारकों के बारे में जागरूकता बढ़ाकर दुनियाभर में संक्रमण को रोकने में कामयाबी मिल सकती है। मंकीपॉक्स की रोकथाम और नियंत्रण के लिए वैक्सीनिया टीकों के उपयोग को लेकर कई अध्ययन किए गए हैं, जिसमें इसे लाभकारी पाया गया है। जो लोग हाल के दिनों में विदेशी जानवरों के निकट संपर्क में आए हैं और उनमें मंकीपॉक्स के लक्षण नजर आ रहे हैं, उन्हें इस बारे में डॉक्टर से संपर्क जरूर करना चाहिए।

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स्रोत और संदर्भ: 
Monkeypox is a viral zoonotic disease

अस्वीकरण नोट: यह लेख विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की वेबसाइट से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। संबंधित विषय के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए अपने चिकित्सक से सलाह लें। 
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