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इस बीमारी के इलाज में अगर जरा सी भी हो गई देरी तो जा सकती है जान

Fri, 10 May 2019 03:37 PM IST
प्रशांत राय लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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दिमागी बुखार एक संक्रामक रोग है, जिसके चपेट में अधिकांश तौर पर छोटे बच्चे आते हैं। दिमागी बुखार वायरस, बैक्टीरिया और फंगी के जरिए फैलता है। अगर इसके उपचार में जरा सी भी देर हो जाए तो मरीज की मौत भी हो सकती है। वैसे तो यह बीमारी ठीक हो जाती है लेकिन इसका असर पूरे उम्र दिखता है। इसलिए आइए जानते हैं दिमागी बुखार के क्या लक्षण हैं और कैसे इससे बचा जा सकता है। 
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दिमागी बुखार के लक्षण
सिर दर्द होना, मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होना, गर्दन, पीठ व कंधों में अकड़न होना यह सब दिमागी बुखार के लक्षण हैं। इसके अलावा शरीर के सभी बाहरी हिस्सों में कमजोरी महसूस होना भी इस बीमारी के लक्षण हैं। 
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इसके अलावा दिमागी बुखार की पहचान ब्लड टेस्ट, एक्स-रे और सीटी स्कैन के माध्यम से भी की जा सकती है। 

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तेज बुखार आना, शिशु का लगातार रोना, शिशु को बहुत अधिक नींद आना या चिड़चिड़ापन लगना, सुस्ती और थकान खाना-पीना छोड़ देना या दूध न पीना, बच्चे के सिर के हिस्से में उभार आना, शिशु के शरीर और गर्दन का अकड़ जाना ये सब छोटे बच्चों में दिमागी बुखार के लक्षण  हैं।
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दिमागी बुखार से बचने के लिए भीड़-भाड़ वाली जगहों पर कम जाएं। इसके अलावा यह एक संक्रामक रोग है इसलिए जिस व्यक्ति को पहले से बुखार है तो उसके संपर्क में आने से बचें।  अपने आस-पास सफाई रखें। दिमागी बुखार से पीड़ित व्यक्ति को खाना देने बाद अच्छी तरह से हाथ धोएं। प्रतिदिन व्यायाम करें।
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