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Study: कोविड का शिकार रहे भारतीयों में फेफड़ों की क्षति के मामले काफी ज्यादा, 50% लोगों में सांस की दिक्कत

Tue, 27 Feb 2024 01:24 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोविड-19 और फेफड़ों की समस्या - फोटो : iStock
कोरोना संक्रमण पिछले चार साल से अधिक समय से वैश्विक स्वास्थ्य जोखिम बना हुआ है। महामारी की शुरुआत से अब तक 70.36 करोड़ से अधिक लोग इस संक्रामक रोग की चपेट में आ चुके हैं, इसमें से 69.86 लाख लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना सिर्फ संक्रमण की स्थिति में ही नहीं, संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों के लिए भी गंभीर समस्याओं का कारण मानी जा रही है, पोस्ट कोविड (लॉन्ग कोविड) के कारण लोगों में कई प्रकार स्वास्थ्य समस्याएं देखी जा रही हैं।

कोरोना संक्रमण का शिकार रहे लोगों को ठीक होने के साल भर से अधिक समय बाद तक भी हृदय, मेटाबॉलिज्म और मस्तिष्क से संबंधित दिक्कतों का अनुभव हो रहा है।

कोविड-19 के दुष्प्रभावों को लेकर हाल ही में किए गए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने फेफड़ों की समस्याओं को लेकर अलर्ट किया है। अध्ययन से पता चलता है कि अक्यूट कोविड के बाद भारतीय लोगों में लंग्स डैमेज के मामलों की दर काफी अधिक देखी जा रही है। कोविड-19 ने फेफड़ों की कार्यक्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिसके गंभीर और जानलेवा दुष्प्रभावों का भी खतरा हो सकता है।


ये भी पढ़िए- कोविड-19 के कारण पाचन विकारों की समस्या
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संक्रमितों में सांस की समस्या - फोटो : istock
कोरोनावायरस का फेफड़ों पर असर

अध्ययन के अनुसार कोविड के गंभीर मामलों के बाद ज्यादातर भारतीयों में फेफड़ों की कार्यक्षमता में काफी गिरावट दर्ज की जा रही है। आधे से अधिक लोगों ने सांस लेने में तकलीफ की शिकायत की है। ये निष्कर्ष चिंताजनक हैं, जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की सलाह दी गई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है अगर आप कोविड के शिकार रहे हैं तो डॉक्टर से मिलकर एहतियातन अपने फेफड़ों और हृदय की जांच जरूर करा लें। कोरोनावायरस ने इन दोनों अंगों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में फेफड़ों की दिक्कत भविष्य के लिए अलार्मिंग मानी जा रही है। 
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कोविड का फेफड़ों पर असर - फोटो : iStock
फेफड़ों की कार्यप्रणाली हुई प्रभावित

कोविड-19 के कारण होने वाली समस्याओं के बारे में जानने के लिए क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर के शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया। ये फेफड़ों की कार्यप्रणाली पर कोविड-19 के दुष्प्रभावों की जांच करने वाला भारत का सबसे बड़ा अध्ययन है।

शोध के दौरान 207 प्रतिभागियों की जांच में उनमें होने वाली समस्याओं को समझने की कोशिश की गई। अध्ययन से पता चला कि गंभीर बीमारी से ठीक होने के औसतन दो महीने से अधिक समय के बाद भी बड़ी संख्या में भारतीयों ने फेफड़ों से संबंधित दिक्कतों की शिकायत की। इसमें 49.3 प्रतिशत में सांस की तकलीफ और 27.1 प्रतिशत में खांसी की शिकायत रिपोर्ट की गई।

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कोरोना के कारण लंग्स की समस्या - फोटो : iStock
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

मेडिकल कॉलेज में पल्मोनरी मेडिसिन के प्रोफेसर और अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता डी जे क्रिस्टोफर ने कहते हैं, कई शोध इस तरफ संकेत करते हैं कि बीमारी की गंभीरता की  श्रेणी में अन्य देशों के आंकड़ों की तुलना में भारतीय आबादी में फेफड़ों की दिक्कत अधिक देखी जा रही है। हालांकि फेफड़ों में क्षति का सटीक कारण स्पष्ट तौर पर नहीं समझा जा सका है क्योंकि भारतीय आबादी में अन्य देशों की तुलना में कोमोरबिडिटी की दिक्कत भी अधिक रही है। 
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फेफड़ों की बढ़ती बीमारियां - फोटो : Pixabay
वैश्विक स्तर पर भी रिपोर्ट की गई फेफड़ों की समस्या 

इसी तरह इटली में किए गए एक अन्य अध्ययन में 43 प्रतिशत लोगों में डिस्पेनिया या सांस की तकलीफ और 20 प्रतिशत से कम लोगों में खांसी की दिक्कत देखी गई। ये आंकड़े भारतीय अध्ययन में सामने आए आंकड़ों से कम थे। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, फेफड़ों में होने वाली क्षति गंभीर समस्याकारक होती है। अगर समय पर इसका उपचार न किया जाए तो इससे मौत का खतरा भी हो सकता है। 

इससे पहले के अध्ययनों में कोरोनावायरस के हृदय रोग और संक्रमण के बाद बड़ी संख्या में लोगों में गंभीर पाचन की दिक्कतें बढ़ने को लेकर सावधान किया गया था। कोरोना ने गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल डिसफंक्शन और गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (जीईआरडी) की दिक्कतों को काफी बढ़ा दिया है।


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स्रोत और संदर्भ
Impact of post-COVID-19 lung damage on pulmonary function, exercise tolerance and quality of life in Indian

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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