पिछले दो साल से अधिक समय से कोरोना का संक्रमण दुनियाभर के लिए गंभीर समस्याओं का कारण बना हुआ है। इस पर कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट ने वैज्ञानिकों की चिंता और भी बढ़ा दी है। ओमिक्रॉन वैरिएंट की संक्रामकता काफी अधिक है, जिसके कारण इसका खतरा सभी लोगों में लगातार बना हुआ है। कोरोना संक्रमण के साथ-साथ लॉन्ग कोविड के मामले भी वैज्ञानिकों के लिए मुसीबतों का कारण बने हुए हैं। संक्रमण से ठीक हो जाने के बाद भी कुछ लोगों में कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं लगातार बनी रहती हैं। अध्ययनों में पाया गया है कि कुछ लोगों में तो लक्षण एक साल से भी अधिक समय तक रह सकते हैं।
डेल्टा संक्रमण के दौरान किए गए अध्ययनों में वैज्ञानिकों ने बताया था कि जिन लोगों में संक्रमण के लक्षण गंभीर होते हैं, उनमें लॉन्ग कोविड का खतरा अधिक होता है, हालांकि बाद में कई ऐसे लोगों में भी लॉन्ग कोविड के मामले देखे गए जिनके लक्षण एसिम्टोमैटिक या फिर हल्के स्तर के थे। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर लॉन्ग कोविड का खतरा किन लोगों में अधिक होता है? इसी को लेकर हाल ही में हुए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने उन कारकों के बारे में पता लगाया है जो लॉन्ग कोविड के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं।