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अध्ययन: गंभीर सिरदर्द और माइग्रेन का कारण बन सकते हैं ऐसे आहार, कम कर दीजिए इन चीजों का सेवन

Tue, 06 Jul 2021 11:32 AM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गंभीर सिरदर्द की समस्या को कैसे ठीक करें - फोटो : Social media
सिरदर्द की समस्या को भले ही हम सामान्य मानते हों लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यह इतना भी सामान्य नहीं है। यदि आपको अक्सर गंभीर सिरदर्द की समस्या रहती है तो इसे शरीर में मौजूद गंभीर बीमारियों का संकेत माना जा सकता है। इसे से संबंधित हाल ही में हुए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया है कि फैटी एसिड के कुछ वर्गों के आधार पर आहार में बदलाव करके सिरदर्द की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना (यूएनसी) हेल्थ केयर के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में बताया गया है कि आहार में कुछ तरीके के बदलाव करके माइग्रेन या गंभीर प्रकार के सिर में दर्द की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस अध्ययन को बड़ी कामयाबी के तौर पर देख रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कुछ लोगों में माइग्रेन और सिर में दर्द की समस्या इतनी गंभीर होती है, जिसमें उन्हें काफी हैवी डोज की दवाइयां देनी पड़ती हैं। इस अध्ययन में बताए गए उपायों के प्रयोग में लाकर लोग इस गंभीर समस्या से आसानी से छुटकारा पा सकते हैं। आइए आगे की स्लाइडों में अध्ययन के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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आहार और सिरदर्द का संबंध - फोटो : iStock
भोजन और सिरदर्द का संबंध
यूएनसी स्कूल ऑफ मेडिसिन में मनोरोग की सहायक प्रोफेसर डेज़ी ज़मोरा कहती हैं, हमारे पूर्वजों को भोजन, आज के समय के भोजन से बिल्कुल अलग हुआ करता था। वह खाने में स्वस्थ वसा को ज्यादा प्रयोग में लाते थे, यही कारण था कि वह कई तरह की गंभीर बीमारियों से भी बचे रहते थे। हमारा खान-पान उनसे बिल्कुल अलग है, यही कारण है कि कम उम्र में ही आजकल लोग कई सारी गंभीर बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। हमारा खान-पान हमारी सेहत को निर्धारित करते हैं। इस अध्ययन का निष्कर्ष बीएमजे मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
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फैटी एसिड बन सकते हैं सिरदर्द के कारण - फोटो : social media
पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड का असंतुलन
प्रोफेसर डेज़ी कहती है कि कई तरह के तैलीय और पैक्ड भोजन के कारण हमारे शरीर में पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड की मात्रा काफी बढ़ गई है। हमने इस अध्ययन में ओमेगा-6 (एन -6) और ओमेगा-3 (एन-3) जैसे  पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड के प्रकारों का अध्ययन किया। वैसे तो यह दोनों शरीर के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं लेकिन इनका संतुलन में रहना भी उतना ही जरूरी है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि एन-3 फैटी एसिड सूजन को कम करने जबकि एन-6 दर्द को बढ़ावा दे सकते हैं। चूंकि इन दिनों हम प्रोसेस्ड फूड का सेवन ज्यादा कर रहे हैं जिससे शरीर में एन-3 की मात्रा कम जबकि एन-6 की मात्रा बढ़ गई है। 

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भोजन में बदलाव करके पाएं सिरदर्द की समस्या से निजात - फोटो : Pixabay
आहार में बदलाव करके किया गया अध्ययन
हमारा आहार किस तरह से सिरदर्द का कारण बन सकता है, इसी को जानने के लिए अध्ययन में 182 रोगियों पर परीक्षण किया गया। इन रोगियों को 16 हफ्तों तक ऐसा भोजन दिया गया जोकि एन-3 और एन-6 दोनों प्रकार के फैटी एसिड की मात्रा को नियंत्रित कर सकें। इसके अलावा कुछ लोगों के भोजन में ऐसी चीजों को भी शामिल किया गया जो एन-3 को बढ़ाने के साथ एन-6 का मात्रा को कम करते हों। इस अध्ययन के निष्कर्ष में विशेषज्ञों को काफी बेहतर परिणाम देखने को मिले।
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सिरदर्द के लिए हर बार दवाइयों की जरूरत नहीं (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
अध्ययन का निष्कर्ष क्या रहा?
अध्ययन के निष्कर्ष में वैज्ञानिक बताते हैं, जिन रोगियों ने ऐसे आहार का सेवन किया जो एन-3 की मात्रा को बढ़ाने के साथ एन-6 की मात्रा को नियंत्रित करने में सहायक हो सकते हैं, उन रोगियों ने सिरदर्द की समस्या में काफी सुधार का अनुभव किया। प्रोफेसर ज़मोरा कहती हैं, आहार में यह संशोधन प्रभावशाली हो सकता है। आहार में परिवर्तन कर हमने रोगियों के सिरदर्द को कम करने में जो प्रभाव देखा, वह बिल्कुल ऐसा था जो सिरदर्द की दवाओं के सेवन के बाद देखा जाता है। अध्ययन के लेखकों का कहना है कि परीक्षण के दौरान विशेष रूप से मछली से एन-3 फैटी एसिड प्राप्त किया गया, इसमें हमने दवाइयों या सप्लीमेंट का प्रयोग नहीं किया था। इस तरह से कुछ प्रकार की मछलियों का सेवन करना काफी फायदेमंद हो सकता है। 

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स्रोत और संदर्भ: 
Dietary alteration of n-3 and n-6 fatty acids for headache reduction in adults with migraine: randomized controlled trial

अस्वीकरण नोट: यह लेख  यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना (यूएनसी) हेल्थ केयर के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए अध्ययन के  निष्कर्ष के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं।
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