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Spinal Awareness: अपनी रीढ़ की हड्डी के बारे में कितना जानते हैं आप, कैसे रखें इनका ख्याल, चार विशेषज्ञों से जानें 

Sun, 18 Oct 2020 12:41 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रीढ़ की हड्डी का ख्याल कैसे रखा जाए (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
मानव शरीर के हर अंग की अपनी भूमिका और विशेषता होती है। कोई भी एक अंग खराब हो, या फिर उसमें किसी तरह की समस्या हो तो पूरे शरीर पर इसका असर पड़ता है। कुछ अंग तो ऐसे हैं, जिनमें समस्या होने पर हमारा उठना-बैठना और यहां तक कि हिल पाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसा ही एक खास अंग है, हमारा मेरुदंड यानी हमारी रीढ़ की हड्डी। मानव शरीर की संरचना में इसकी अहम भूमिका रहती है। मेरुदंड (spine or backbone) हमारे मस्तिष्क के पिछले भाग से नीचे गुदा के पास तक जाती है। इसमें 33 खंड होते हैं। मेरुदंड के भीतर मेरुनाल(spinal canal) में ही मेरुरज्जु(spinal cord) सुरक्षित रहता है। मेरुदंड की हड्डियां अच्छी हालत में हो यानी कि उनकी सेहत अच्छी हो तो यह रीढ़ के लिए बहुत अच्छा होता है। आइए विशेषज्ञों से जानते हैं कि रीढ़ की हड्डी का ख्याल कैसे रखा जाए: 
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SPINE - फोटो : Pixabay
स्पाइन एंड न्यूरो सर्जरी, पारस अस्पताल, गुरुग्राम के निदेशक डॉ. सुमित सिन्हा का कहना है कि कोरोना काल में वर्क फ्रॉम होम की आदत ने हमारी रीढ़ की हड्डी की समस्या को बढ़ा दिया है। पिछले कुछ महीनों में रीढ़ की हड्डी की समस्या बढ़ी है। पहले जहां बुजुर्गों को और दुर्घटनाग्रस्त लोगों तक यह समस्या सीमित रहती थी, अब आम हो गई है। कोरोनो काल में पता चला है कि इससे अब बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं। रीढ़ से संबंधित समस्या को दूर रखने के लिए हमें सामान्य व्यायाम और पेट-पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करने वाली फिजिकल एक्टिविटी यानी शारीरिक गतिविधि करने की जरूरत है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल, गाजियाबाद के आर्थोपेडिक-कंसल्टेंट डॉ. राजेश कुमार वर्मा ने कहा, "सुनिश्चित करें कि आपके बच्चे में 'पीक बोन मास' यानी हड्डी का सबसे ज्यादा द्रव्यमान हो। जब हड्डियां अपनी अधिकतम ताकत और घनत्व तक पहुंच जाती है, तो यह उनके लिए ग्रोथ माइलस्टोन साबित होता है। हमें बच्चों की हड्डियों को स्वस्थ रूप से विकसित करना सुनिश्चित करना चाहिए। जिस बच्चे की हड्डी का बोन मॉस अच्छा होता है, लेकिन बोन मिनरल डेंसिटी कम होती है, उनमें ऑस्टियोपीनिया या ऑस्टियोपोरोसिस का विकास अपेक्षाकृत जल्दी होता है। इससे रीढ़ की सेहत भी प्रभावित हो सकती है। 

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spine pain - फोटो : Pixabay
डॉ. वर्मा बताते हैं कि 18 साल की उम्र में लड़कियों में पीक बोन मॉस हो जाता है और लड़कों में 20 साल की उम्र में पीक बोन मॉस होता है। लाइफस्टाइल से एडल्ट में पीक बोन मास 40 फीसदी तक प्रभावित होता है। बच्चों को एक्टिविटी कराना बहुत जरूरी होता है भले ही आप घर के अंदर हो, बच्चे को कुछ न कुछ फिजकल एक्टिविटी कराते रहें। इसके साथ ही उन्हें प्रोटीन से भरपूर खाना भी खिलाएं यह स्पोंजी हड्डियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विटामिन डी की कमी को पूरा करने के करने के लिए बच्चों को हल्की धूप में खेलने के लिए भी प्रोत्साहित करना चाहिए।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay
जिंदल नेचरक्योर इंस्टीट्यूट के मुख्य योग पदाधिकारी डॉ. राजीव राजेश कहते हैं कि योग करने से आप अपनी रीढ़ को स्वस्थ बना सकते हैं। इससे एक उम्र के बाद होने वाले दर्द और ऐंठन को दूर भी कर सकते हैं। मानव की रीढ़ की बनावट बहुत जटिल होती है। इसमें हड्डियां, मांस, टेंडनन्स (कंडरा), लिगामेंट (स्नायुबंधन) और नसें एक साथ बंधी होती हैं। रीढ़ ही हमें सीधे खड़े होने की ताकत देता है। उम्र के ढलान के साथ ही रीढ़ की समस्या शुरू हो जाती है। अक्सर लोग इसे तब तक महसूस नहीं करते जब तक यह दर्द नहीं देने लगती है। इससे बचने के लिए दिनचर्या में योग को शामिल करना जरूरी है। 
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SPINE - फोटो : Pixabay
कोरोना काल में वर्क फ्रॉम होम के दौरान लोग स्क्रीन टाइम का बहुत ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं और कई डिसऑर्डर से पीड़ित हो रहे हैं। उजाला सिग्नस अस्पताल ग्रुप के फाउंडर डायरेक्टर डॉ. शुचिन बजाज का कहना है कि हमारी रीढ़ की हड्डी  हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होती है और यह पूरे शरीर के वजन को सहन करती है। एक स्वस्थ रीढ़ हमारे समग्र स्वास्थ्य (ओवरऑल हेल्थ) के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है। रीढ़ की हड्डी अगर खराब हो जाती है, तो शरीर के कई हिस्सों में हल्के दर्द से लेकर लकवा तक जैसे कई डिसऑर्डर पैदा हो सकते हैं। डॉ. बजाज कहते हैं कि खासतौर से दर्द और ऐंठन के कारण स्पोंडिलोसिस और स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या हो सकती है। इसलिए हमें अपनी रीढ़ की देखभाल के लिए योग और आसन को दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। रोजाना व्यायाम करना चाहिए। मोबाइल फोन, स्क्रीन टाइम और लंबे समय तक बैठे रहने की आदत को कम करना चाहिए। 
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