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Study: ज्यादा बैठना सिर्फ मोटापा-हृदय रोग ही नहीं बढ़ाता, कम उम्र में डिमेंशिया रोगी जैसा हो सकता है मस्तिक

Thu, 28 Sep 2023 01:32 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ज्यादा देर तक बैठे रहना हो सकता है हानिकारक - फोटो : istock
लॉन्ग सिटिंग या सेंडेंटरी लाइफस्टाइल को स्वास्थ्य विशेषज्ञ कई प्रकार से सेहत के लिए गंभीर दुष्प्रभावों वाला मानते रहे हैं। अध्ययनकर्ता बताते हैं, जिन लोगों के दिन का अधिकतर समय बैठे-बैठे बीतता है या शारीरिक तौर पर कम सक्रिय रहते हैं, उनके अन्य लोगों की तुलना में मोटापा का शिकार होने का जोखिम अधिक हो सकता है, और मोटापा को हृदय रोग-डायबिटीज जैसी क्रोनिक बीमारियों का प्रमुख कारण माना जाता रहा है। पर इसके जोखिम यहीं तक सीमित नहीं हैं, सेंडेंटरी लाइफस्टाइल आपके मस्तिष्क की सेहत के लिए भी ठीक नहीं है।

हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया, ज्यादा बैठने की आदत हमारे मस्तिष्क की कार्यक्षमता को प्रभावित करने वाली हो सकती है, इतना ही नहीं ऐसे प्रतिभागियों पर किए गए अध्ययन में पाया गया है कि जीवनशैली की इस गड़बड़ आदत के कारण आपका मस्तिष्क उसी तरह का हो सकता है जैसा डिमेंशिया के शिकार लोगों का होता है।

आइए जानते हैं कि ज्यादा बैठना ब्रेन के लिए किस तरह से हानिकारक है?
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मोटापे का बढ़ता जोखिम - फोटो : iStock
ज्यादा देर तक बैठने के नुकसान

ज्यादा देर तक बैठे रहने की आदत किस प्रकार से शरीर के लिए हानिकारक दुष्प्रभावों वाली हो सकती है, इस बारे में समझने के लिए वैज्ञानिकों ने दो समान समूहों की तुलना की गई थी। इसमें ट्रांजिट ड्राइवर, जो दिन के अधिकांश समय बैठ रहते हैं और कंडक्टर या गार्ड जिनका काम ज्यादातर खड़े रहने वाला होता है, इनपर अध्ययन किया गया। इन लोगों के स्वास्थ्य पर किए गए आकलन में पाया गया कि  ड्राइवर्स में हृदय रोग और अन्य क्रोनिक बीमारियां होने आशंका लगभग दोगुनी थी। ब्रेन हेल्थ पर भी इसके दुष्प्रभाव देखे गए हैं।
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मस्तिष्क पर असर - फोटो : Pixabay
मस्तिष्क हो सकता है समय से पहले बूढ़ा

मस्तिष्क के लिए ज्यादा देर बैठना कितना घातक है, इस बारे में किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया ऐसे लोगों के मस्तिष्क की इमेजिंग बिल्कुल डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति जैसी देखी गई। ज्यादा देर तक बैठने से हृदय रोग, मधुमेह, स्ट्रोक, उच्च रक्तचाप और उच्च कोलेस्ट्रॉल का खतरा भी बढ़ जाता है, ये सभी स्थितियां भी डिमेंशिया के खतरे को बढ़ाने वाली मानी जाती रही हैं। वहीं जो लोग शारीरिक तौर पर अधिक सक्रिय थे उनमें इस तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा कम पाया गया, ऐसे लोगों का मस्तिष्क भी स्वस्थ था।

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सेंडेंटरी लाइफस्टाइल के नुकसान - फोटो : istock
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?

सेंडेंटरी लाइफस्टाइल के कारण होने वाले जोखिमों को कैसे कम किया जा सकता है, इस बारे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नियमित व्यायाम की आदत आपके लिए काफी लाभकारी है। ज्यादातर अध्ययन दिन  में कम से कम 30-45 मिनट के व्यायाम की सलाह देते हैं, पर अगर हफ्ते में सिर्फ 4-5 घंटे भी व्यायाम कर लेते हैं तो ये ब्रेन को स्वस्थ रखने के साथ इसके कारण होने वाली अन्य जटिलताओं से बचाने में भी आपके लिए मददगार हो सकती है।
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नियमित व्यायाम सभी के लिए जरूरी - फोटो : Pixabay
शारीरिक सक्रियता बढ़ाना सभी के लिए जरूरी

अगर आप शारीरिक रूप से सक्रिय रहते हैं तो ये शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के फिटनेस को ठीक रखने और समय के साथ बढ़ती क्रोनिक बीमारियों के जोखिमों से सुरक्षा देने में भी लाभकारी है। मोटापे को स्वास्थ्य विशेषज्ञ सेहत के लिए गंभीर समस्याकारक स्थिति के तौर पर देखते हैं, शारीरिक निष्क्रियता इस जोखिम को और बढ़ा देती है। मसलन, अगर सिर्फ इसी एक आदत में सुधार कर लिया जाए तो कई प्रकार की जानलेवा बीमारियों के खतरे को कम करने में इससे मदद मिल सकती है।



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स्रोत और संदर्भ
Possible link between sitting for long periods and reduced thickness of a brain region

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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