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वैज्ञानिकों की चेतावनी: छींक से निकली छोटी सी बूंद भी बन सकती है संक्रमण का कारण, जानिए कब पीक पर होता है वायरल लोड?

Thu, 03 Feb 2022 05:58 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना संक्रमण कैसे फैलता है? - फोटो : iStock
दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में इस समय कोरोना का प्रकोप जारी है। भारत के संदर्भ में बात करें तो यहां आई अब तक कोरोना की तीन लहरों ने बुनियादी स्वास्थ्य ढांचे के लिए बड़ी चुनौतियां पेश की हैं। कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के कारण देश संक्रमण की तीसरी लहर झेल रहा है। संक्रमण की शुरुआत से ही बताया जा रहा है कि संक्रमित व्यक्ति के छीकने-खांसने से निकलने की बूंदों के संपर्क में आने से दूसरे लोगों को संक्रमण हो सकता है। पर क्या आप जानते हैं कि ड्रॉपलेट की एक छोटी से बूंद भी संक्रमण फैलाने के लिए काफी है?

यूके में किए गए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि संक्रमित व्यक्ति की छींक से निकलने वाली छोटी से भी ड्रॉपलेट संक्रमण का कारण बन सकती है। यह दुनिया का पहला ऐसा अध्ययन है जिसमें पहली बार संक्रमण की चपेट में आने से लेकर शरीर से वायरस के पूरी तरह से खत्म हो जाने तक की गतिविधियों पर नजर रखी गई है। इस तरह के खतरे को देखते हुए अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिकों ने सभी लोगों को बचाव के लगातार उपाय करते रहने की सलाह दी है। आइए इस अध्ययन के बारे में आगे विस्तार से जानते हैं। 
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छीकने-खांसने से निकलने वाली ड्रॉपलेट - फोटो : Pixabay
छोटी सी ड्रॉपलेट भी संक्रमण के लिए काफी
कोरोना की संक्रामकता जानने के लिए वैज्ञानिकों ने उन लोगों पर अध्ययन किया जिन्हें जान-बूझकर वैक्सीन की केवल एक ही डोज दी गई थी। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि वैक्सीनेशन के बाद भी अगर आप संक्रमित हो जाते हैं, तो छींकने-खांसने से निकलने वाली छोटी सी भी ड्रॉपलेट, आसपास के लोगों में संक्रमण का कारण बन सकती है। वैज्ञानिकों ने पाया कि संक्रमण की शुरुआत सबसे पहले गले से होती है। संक्रमण में लगभग पांचवें दिन तक वायरस नाक में काफी अधिक मात्रा में बढ़ जाता है, ऐसे में पांचवें दिन तक संक्रमित से अन्य लोगों में संक्रमण का खतरा काफी अधिक हो जाता है।
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कोरोना संक्रमितों पर किया गया अध्ययन - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?
यह अध्ययन लंदन के रॉयल फ्री हॉस्पिटल में किया गया, जिसका निष्कर्ष नेचर प्री-प्रिंट सर्वर पर प्रकाशित किया गया है। अध्ययन की समीक्षा की जानी बाकी है। इंपीरियल कॉलेज लंदन के प्रोफेसर और परीक्षण के प्रमुख जांचकर्ता क्रिस्टोफर चिउ कहते हैं, अध्ययन के लिए वालेंटियर्स को वैक्सीन की केवल एक ही डोज की गई थी। 36 में से 16 लोगों को हल्के से मध्यम स्तर के लक्षणों जैसे बहती नाक, छींक आने और गले में खराश की शिकायत थी। कुछ ने सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान और बुखार का अनुभव किया। किसी में भी गंभीर लक्षण नहीं थे।

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संक्रमण का वायरल लोड जानने के लिए अध्ययन - फोटो : iStock
संक्रमण के पांचवे-छठे दिन पीक पर होता है वायरल लोड
प्रोफेसर  क्रिस्टोफर चिउ बताते हैं, संक्रमण के पांचवे-छठे दिन लिए गए स्वैब सैंपल में वायरल लोड पहले दिन की तुलना में अधिक पाई गई। कुछ लोगों में नौ से 12वें दिन भी वायरल लोड काफी अधिक था। इस अवधि में  गले की तुलना में नाक में वायरस की उपस्थिति अधिक पाई गई। इस आधार पर जांच में पता चलता है कि शरीर में वायरल लोड पीक पर पहुंचने पर ड्रॉपलेट की एक बूंद भी अन्य लोगों में संक्रमण के जोखिम को बढ़ा देती है।
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खांसते-छींकते समय बरतें सावधानी - फोटो : Istock
क्या है अध्ययन का निष्कर्ष?
अध्ययन के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों ने बताया कि कोरोना से बचाव के लिए सभी लोगों के हमेशा अलर्ट रहने की आवश्यकता है। जिन लोगों को संक्रमण हो गया है उन्हें होम आइसोलेशन के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए, क्योंकि इस दौर घर-परिवार के लोगों में आपके कारण संक्रमण का जोखिc सबसे अधिक होता है। हमेशा खांसते-छींकते समय नाक और मुंह को कवर करके रखें और तुरंत हाथों को अच्छी तरह से साबुन से साफ करें।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। अमर उजाला इस दावे की पुष्टि नहीं करता है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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