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Singer KK Death: क्या अधिक पसीना-गर्मी के कारण हुआ कार्डियक अरेस्ट, मौत के कारण पर क्या कहते हैं हृदय रोग विशेषज्ञ?

Wed, 01 Jun 2022 01:10 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सिंगर केके की मौत - फोटो : Amarujala
मशहूर पार्श्व गायक कृष्णकुमार कुन्नाथ (केके) की मंगलवार शाम, कोलकाता में लाइव शो के कुछ ही घंटों बाद मौत हो गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक शो के बाद केके को अचानक कार्डियक अरेस्ट हुआ था, जिसके बाद उन्हें कलकत्ता मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीएमआरआई) ले जाया गया, जहां डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। केके 53 साल के थे, उनकी मृत्यु ने पूरे देश को गमगीन कर दिया है।

हाल के वर्षों में कम उम्र में हार्ट अटैक के कारण होने वाली मौतों की श्रृंखला में यह एक और मामला है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शो का आयोजन बंद स्थान पर था। इसको लेकर उन्होंने आयोजकों से शिकायत भी की थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक शो के दौरान भी वह अच्छा महसूस नहीं कर रहे थे, उन्हें बेचैनी और अत्यधिक पसीना आने की दिक्कत महसूस हो रही थी, जिसके कारण संभवत: उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ। इस घटना के बाद सवाल उठने शुरू हो गए हैं कि क्या आयोजन खुले में न होने और अधिक भीड़ के कारण यह समस्या हुई? 40-50 आयुवर्ग वाले लोगों में हृदय की समस्याओं से मौत के मामले आखिर क्यों बढ़ते जा रहे हैं? आइए इस बारे में जानते हैं।
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केके की मौत कैसे हुई - फोटो : Twitter
प्रत्यक्षदर्शियों ने क्या बताया?

कार्यक्रम में शामिल कुछ दर्शकों ने मीडिया से बातचीत में बताया कि नज़रूल मंच सभागार, जहां यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था, वह इनडोर था और भीड़ बहुत अधिक हो गई थी। एयर-कंडीशनिंग भी ठीक से काम नहीं कर रहा था। दर्शकों के साथ-साथ केके भी काफी गर्मी महसूस कर रहे थे, एक बार उन्होंने आयोजकों से उन पर रोशनी कम करने के लिए भी कहा था, जिससे गर्मी कम किया जा सके। तो क्या बहुत अधिक गर्मी के कारण केके को कार्डियक अरेस्ट हुआ? 
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ज्यादा पसीना आने के संकेत - फोटो : istock
क्या गर्मी और सफोकेशन ने ले ली जान? 

इस सवाल का उत्तर जानने के लिए हमने लखनऊ में वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ विनीता अग्रवाल से बात की। डॉ विनीता कहती हैं, केके की मौत का वास्तविक कारण क्या है, यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। हालांकि जिस तरह से रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि कॉन्सर्ट इनडोर था और वहां भीड़ भी अधिक हो गई थी, ऐसे में पहले से ही हृदय रोगों के शिकार लोगों के लिए यह स्थिति समस्याओं को ट्रिगर करने वाली जरूर हो सकती है।

हालांकि सीधे तौर पर सफोकेशन को हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट का कारण नहीं माना जाता पर यह अप्रत्यक्ष तौर पर समस्याओं को जरूर बढ़ा सकती है।

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कार्डियक अरेस्ट की समस्या - फोटो : istock
गर्मी के कारण ट्रिगर हो सकती है हृदय रोगों की समस्या?

डॉ विनीता कहती हैं, गर्मी के दौरान अधिक भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाते हैं और अगर वहां अच्छे वेंटिलेशन की व्यवस्था नहीं है तो घुटन महसूस हो सकती है। इसमें दिल तेजी से धड़कने लगता है और  शरीर को ठंडा करने के लिए हृदय को रक्त पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। ऐसे में जिन लोगों को पहले से ही हृदय रोग की समस्या है उनके लिए यह स्थिति गंभीर हो सकती है। 
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हृदय रोगों को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : Pixabay
अत्यधिक पसीना आना गंभीर हृदय समस्याओं की तरफ संकेत

हृदय रोग विशेषज्ञ बताते हैं, ज्यादा पसीना आना अधिक गर्मी के प्रति शरीर की स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है। जिन लोगों को अचानक बैचनी या अधिक पसीना आने की समस्या होने लगती है, उन्हें समस्या को ट्रिगर करने वाली स्थितियों से बचाव करते रहना चाहिए, यह हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है।

हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में अत्यधिक गर्मी या पसीने के साथ छाती या बाहों में दर्द और दबाव का भी अनुभव हो सकता है। ऐसी स्थितियों में तुरंत सावधान हो जाने की आवश्यकता है। 
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हृदय रोगों के जोखिम को समझिए - फोटो : Pixabay
आपातकालीन स्थितियों में क्या करें?

हृदय रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि आपको अचानक से अत्याधिक पसीना आने, बहुत अधिक गर्मी या बेचैनी की दिक्कत महसूस हो रही है तो इसे आपाकालीन स्थिति मानते हुए तुरंत किसी विशेषज्ञ के पास जाएं। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है। तुरंत इलाज मिलने से हार्ट अटैक की आशंका को कम करते हुए जान बचाने की संभावना बढ़ जाती है। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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