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साइलेंट स्ट्रोक के लक्षण होते हैं बहुत ही मामूली, डॉक्टर ही कर पाते हैं पहचान

Tue, 10 Sep 2019 08:15 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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- फोटो : pixa
ह्रदय में आघात के लक्षण तो पता चल जाते हैं लेकिन दिमाग में आने वाले पक्षाघात का पता बहुत देर से होता है। जिसकी वजह से मरीज को इलाज देर से मिल पाता है। कभी-कभी तो डॉक्टर भी इसके लक्षण पहचानने में देर कर देते हैं और दिमाग की नसों से बहुत ज्यादा खून बह जाता है जो मरीज के लिए जानलेवा भी हो सकता है। आइए जाने इससे होने वाले खतरे और लक्षण।

 
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- फोटो : pixa
खतरा
साइलेंट स्ट्रोक का असर दिमाग के छोटे हिस्से पर पड़ता है। जिसकी वजह से वहां की कोशिकाएं काम करना बंद कर देती हैं। प्रभावित हिस्से की जगह भले ही छोटी होती है लेकिन इसका दिमाग पर गहरा असर होता है। साइलेंट स्ट्रोक के कारण चलने फिरने में दिक्कत, पाचन की क्रिया पर असर और दिमाग ठीक से काम करना बंद करने लगता है।

 
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- फोटो : social media
साइलेंट स्ट्रोक के कारण
दिमाग की नसों में जब खून का थक्का जमने लगता है या फिर उच्च रक्तचाप की समस्या होती है जिससे ह्रदय की वाहिनियां सिकुड़ने लगती है तो स्ट्रोक का खतरा सबसे ज्यादा होता है। कभी-कभी सिर में गहरी चोट या डायबिटीज के कारण भी पक्षाघात हो जाता है।

 
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- फोटो : pixa
स्ट्रोक के लक्षण
स्ट्रोक के बाद दिमाग का एमआरआई और सीटी स्कैन करने पर उस हिस्से पर सफेद धब्बा सा नजर आता है जो निष्क्रिय हुए हिस्से को दिखाता है। लेकिन इसके अलावा भी कुछ बाहरी लक्षण होते हैं जो मरीज को पहले ही नजर आ जाते हैं लेकिन व्यक्ति समझ नहीं पाता है। जैसे संतुलन बनाने में दिक्कत, पेशाब पर नियंत्रण न होना, मूड में परिवर्तन, आंखों से धुंधला दिखने लगना, सोचने की क्षमता पर असर पड़ने लगता है।
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