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प्रोजेरिया सिंड्रोम: बच्चों को जल्दी ही बूढ़ा बना देती है यह जानलेवा बीमारी, जानिए इसके कारण और लक्षण

Sun, 08 Aug 2021 01:09 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik

डॉ. परवेश मलिक 
फिजिशियन, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एमडी (जनरल मेडिसिन)  


अभी के समय में तो कोरोना महामारी ने ऐसा कहर बरपाया है कि अन्य बीमारियां इसके सामने छोटी लगने लगी हैं। इस बीमारी में सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि लोग ठीक हो जा रहे हैं, लेकिन उसके बावजूद शरीर कई अन्य समस्याओं से घिर जाता है। इस वजह से लोग कोरोना के अलावा कुछ और सोच भी नहीं पा रहे हैं। हालांकि दुनिया में इसके अलावा भी ऐसी कई भयानक बीमारियां हैं, जिनके बारे में बहुत कम ही लोग जानते हैं। अमिताभ बच्चन की फिल्म 'पा' तो आपने देखी ही होगी। इस फिल्म में वह एक ऐसे छोटे से बच्चे का किरदार निभा रहे हैं, जो दिखने में बूढ़ा लगता है। दरअसल, इसके पीछे का कारण ये है कि उस बच्चे को प्रोजेरिया सिंड्रोम नाम की एक बीमारी है। दरअसल, इस बीमारी से पीड़ित 10-12 साल के बच्चे एक उम्रदराज बुजुर्ग की तरह नजर आने लगते हैं। आइए विशेषज्ञ से जानते हैं इस बीमारी के बारे में सबकुछ... 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
प्रोजेरिया सिंड्रोम एक दुर्लभ और जानलेवा बीमारी है। इसे बेंजामिन बटन के नाम से भी जाना जाता है। अमेरिकी की मशहूर क्लीवलैंड क्लीनिक का कहना है कि यह बीमारी इतनी दुर्लभ है कि दुनियाभर में दो करोड़ लोगों में से लगभग एक को ही प्रभावित करती है। प्रोजेरिया रिसर्च फाउंडेशन के मुताबिक, पूरी दुनिया में इस समय लगभग 350 से 400 बच्चे प्रोजेरिया से पीड़ित हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
क्यों होती है यह बीमारी? 
  • विशेषज्ञ कहते हैं कि बच्चों में यह बीमारी लैमिन-ए-जीन में गड़बड़ी होने के कारण होती है। इस बीमारी के संकेत पहले से नहीं मिलते, यह अचानक ही हो जाती है, लेकिन दो साल तक की उम्र में बच्चों में इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
क्या हैं इस बीमारी के लक्षण? 
  • बच्चों की लंबाई और वजन का कम होना 
  • शरीर का कमजोर होना
  • सिर के बाल झड़ जाना 
  • सिर का आकार बढ़ जाना 
  • किसी बुजुर्ग व्यक्ति की तरह त्वचा का ढीला होना 
  • होंठ पतले होना 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कितनी खतरनाक है यह बीमारी? 
  • बच्चों की उम्र लगभग दो साल होने तक इस बीमारी का पता तो चल जाता है, लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि बहुत जल्द ही यह बीमारी बच्चों को मौत की ओर ले जाती है। इस बीमारी से पीड़ित बच्चों की लगभग 20 या 21 साल की उम्र में मौत हो जाती है। वैज्ञानिक इस बीमारी के इलाज की खोज में जुटे हुए हैं, लेकिन अभी तक इसका इलाज नहीं मिल पाया है। 
नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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