फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लंग्स कैंसर: शर्मिला टैगोर को 'स्टेज-जीरो' में चल गया था बीमारी का पता, कौन से लक्षण दिखें तो हो जाएं अलर्ट?

Sun, 11 Oct 2026 03:16 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Lungs Cancer Risk: फेफड़ों का कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जिसके शुरुआती चरण में कई बार लक्षण दिखाई नहीं देते। धूम्रपान, वायु प्रदूषण और हानिकारक धुएं के संपर्क से इसका जोखिम बढ़ सकता है। महिलाओं और बिना धूम्रपान करने वालों में भी कैंसर का खतरा हो सकता है।
विज्ञापन
1 of 5
लंग्स कैंसर का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
क्या आपको पता है कि मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री शर्मिला टैगोर कैंसर का शिकार रह चुकी हैं? साल 2023 में उन्हें लंग्स कैंसर का शिकार पाया गया था। 

हाल ही में उनकी बेटी सोहा अली खान ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि उनकी मां में कैंसर का पता शुरुआती स्टेज यानी स्टेज जीरो में ही चल गया था। इसके बाद सर्जरी करके कैंसर को निकाल दिया गया। सर्जरी से पहले की गई जांच में यह स्पष्ट नहीं था कि कैंसर घातक (मैलिग्नेंट) है। सर्जरी के दौरान ही डॉक्टरों को पता चला कि कैंसर घातक है।

सोहा ने बताया, फेफड़ों के कैंसर का शुरुआती चरण में पता लगाना आमतौर पर बहुत मुश्किल होता है। मां के मामले में यह स्टेज जीरो में था। कई लोगों को लगा कि सर्जरी की जरूरत नहीं है फिर भी मां ने सर्जरी कराने पर जोर दिया। डॉक्टरों ने कैंसर को पूरी तरह से निकाल दिया। फेफड़ों के कैंसर से जूझ रहे किसी व्यक्ति के लिए यह सबसे अच्छी स्थितियों में से एक थी।

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कैंसर का पता जितनी जल्दी चल जाए, उसके इलाज और ठीक होने की संभावना उतनी ज्यादा बढ़ जाती है। अब सवाल ये है कि स्टेज जीरो जैसे स्थिति में लंग्स कैंसर का पता कैसे लगाया जा सकता है?
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 5
फेफड़े में कैंसर की समस्याएं - फोटो : Adobe Stock
पहले फेफड़ों में कैंसर की समस्या को जान लीजिए

फेफड़ों का कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जिसमें फेफड़ों की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और धीरे-धीरे ट्यूमर का रूप ले सकती हैं। समय पर पहचान और इलाज न होने पर यह शरीर के दूसरे अंगों तक भी फैल सकता है। 
 
  • धूम्रपान की आदत को इस बीमारी का सबसे प्रमुख जोखिम कारक माना जाता है, लेकिन जो लोग कभी धूम्रपान नहीं करते उन्हें भी फेफड़ों का कैंसर हो सकता है। 
  • तंबाकू के धुएं के संपर्क में रहना, वायु प्रदूषण, रेडॉन गैस और एस्बेस्टस जैसे हानिकारक पदार्थों के संपर्क में आना भी जोखिम बढ़ा सकता है।

फेफड़ों के कैंसर के कई प्रकार होते हैं, जिनमें नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर और स्मॉल सेल लंग कैंसर प्रमुख हैं। नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर फेफड़ों के कैंसर का सबसे आम प्रकार है, जो कुल मामलों का लगभग 80% से 85% हिस्सा होता है।
विज्ञापन

3 of 5
फेफड़ों में कैंसर की समस्या - फोटो : Adobe Stock
शुरुआत में लक्षण नहीं दिखते, फिर कैसे करें पहचान?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि आमतौर पर फेफड़ों के कैंसर की शुरुआती स्टेज में कई लोगों को कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते। यही वजह है कि कई बार बीमारी का पता तब चलता है, जब यह काफी बढ़ चुकी होती है। 
 
  • कुछ लोगों में इसके कारण लगातार खांसी, खांसी के साथ खून आने, सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी और आवाज में भारीपन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। हालांकि ज्यादातर लोग इसे सामान्य समस्या मानकर टालते रहते हैं।  
  • बार-बार फेफड़ों में संक्रमण होना और लगातार थकान महसूस करना ऐसे लक्षण हैं जिनपर सभी लोगों को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। 

शर्मिला टैगोर  की तरह अगर कैंसर का पता जीरो स्टेज में चल जाए तो वहां से कैंसर के फैलने का खतरा कम हो जाता है। शुरुआती पहचान से इसका इलाज और जान बचने की संभावना भी बढ़ जाती है।

4 of 5
लंग्स कैंसर की समस्या - फोटो : Freepik.com
महिलाओं में फेफड़ों के कैंसर के क्या कारण हैं?

शर्मिला टैगोर में कैंसर की खबर सामने आने के बाद से लोगों में सवाल है कि आखिर वो कौन सी स्थितियां हैं जिसके कारण महिलाओं में कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, महिलाओं में फेफड़ों के कैंसर का सबसे प्रमुख कारण तंबाकू का सेवन और धूम्रपान है। हालांकि जो महिलाएं कभी सिगरेट नहीं पीतीं, उनमें भी यह बीमारी हो सकती है। घर में किसी दूसरे व्यक्ति के धूम्रपान करने से निकलने वाले धुएं के संपर्क में रहना भी जोखिम बढ़ाता है। 
 
  • रसोई में लकड़ी, कोयला और उपले जलाने से होने वाला धुआं, वायु प्रदूषण और कार्यस्थल पर एस्बेस्टस जैसे हानिकारक पदार्थों के संपर्क में आना भी खतरा बढ़ाने वाला हो सकता है।
  • उम्र बढ़ने के साथ या परिवार में पहले से किसी को फेफड़ों का कैंसर रहा है तो भी आपमें जोखिम बढ़ जाता है।
  • स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, महिला हो या पुरुष सभी को लगातार खांसी, सांस फूलने या बिना वजह वजन घटने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
धूम्रपान से कैसे बचाव करें? - फोटो : Adobe Stock
फेफड़ों के कैंसर से बचाव के लिए क्या करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं,  फेफड़ों के कैंसर से बचाव के लिए धूम्रपान से दूरी बनाए रखना बहुत जरूरी है। अगर आप सिगरेट या किसी अन्य तंबाकू उत्पाद का सेवन करते हैं, तो इसे तुरंत छोड़ दें।
 
  • सेकेंड हैंड स्मोकिंग से भी बचाव करना जरूरी है, इससे भी कैंसर का खतरा हो सकता है।
  • वायु प्रदूषण अधिक होने पर बाहर की गतिविधियों को कम करें।
  • कार्यस्थल पर हानिकारक रसायनों से बचाव के लिए सुरक्षा नियमों का पालन भी जरूरी है।
  • इसके अलावा, अगर परिवार में पहले किसी को लंग्स कैंसर रहा हो तो पहले से अलर्ट हो जाएं। ऐसे लोगों को समय-समय पर जांच कराते रहना चाहिए। 



--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें