डॉ विकासेंदु अग्रवाल
स्टेट सर्विलांस ऑफिसर, उत्तर प्रदेश
कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों ने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर काफी दबाव डाल दिया है। कहीं अस्पताल में बेड नहीं हैं तो कहीं ऑक्सीजन की भारी किल्लत है। ऐसी बदहाली को देखते हुए कोरोना के हल्के लक्षण वाले रोगियों को डॉक्टर घर पर ही आइसोलेशन में रहने की सलाह दे रहे हैं। डॉक्टर कहते हैं कि जो रोगी आइसोलेशन में रह रहें हैं उनके लिए अलग कमरा और अलग शौचालय की व्यवस्था होनी चाहिए। इतना ही नहीं घर के अन्य लोगों को भी रोगी से दूरी बनाकर रखनी चाहिए, जिससे संक्रमण का खतरा परिवार के दूसरे लोगों को न होने पाए।
ऐसे में सवाल उठता है कि घर में अगर एक ही शौचालय है और कोरोना रोगी के साथ अन्य लोगों को भी उसी का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, तो क्या परिवार के अन्य लोगों को भी संक्रमण होने का खतरा रहता है? आइए इस बारे में विशेषज्ञों से जानते हैं।
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आइसोलेशन के नियमों का करें पालन
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आइसोलेशने के नियम
होम आइसोलेशन के नियमों के बारे में जानने के लिए अमर उजाला ने उत्तर प्रदेश के स्टेट सर्विलांस ऑफिसर और विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ काम कर चुके डॉ विकासेंदु अग्रवाल से बातचीत की। उन्होंने बताया कि हल्के लक्षण वाले रोगियों को होम आइसोलेशन में रहकर भी स्वास्थ्य लाभ मिल सकता है। बस इस बात का ध्यान रखें कि रोगी का कमरा और उसका शौचालय अलग होना चाहिए। रोगियों को कोशिश करनी चाहिए कि वह घर में भी मास्क लगाकर रखें और अन्य लोगों से दूर से ही मिलें।
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टॉयलेट की साफ सफाई का रखें विशेष ध्यान
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टॉयलेट शेयर करने से अन्य लोगों को संक्रमण हो सकता है?
डॉ विकासेंदु कहते हैं कि वैसे तो कोविड रोगी के शौचालय को अलग रखने की सलाह दी जाती है लेकिन अगर ऐसा विकल्प नहीं है तो आपको साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सुनिश्चित करें कि दिन में दो से तीन बार अच्छे कीटाणुनाशकों से टॉयलेट को साफ किया जा रहा है।
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हाथों को साबुन से 20-30 सेकंड तक धोएं
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इसके अलावा रोगी के साथ परिवार के अन्य लोगों को भी टॉयलेट के बाद हाथों को साबुन से 20-30 सेकंड तक अच्छे से धोना चाहिए। रोगी के साथ शेयर होने वाले टॉयलेट के दरवाजे को खोलने और बंद करने के बाद भी हाथों को अच्छी तरह से साफ करें। शौच के माध्यम से संक्रमण फैलने के मामले सुनने को नहीं मिले हैं, फिर भी इसकी आशंका को नकारा नहीं जा सकता है, इसलिए विशेष सावधानी बरतें।
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कोरोना मरीजों के लिए 'स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल'
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होम आइसोलेशन में रोगी कौन सी दवाइयां ले सकते हैं?
कोरोना के सभी मरीजों के लिए सरकार ने 'स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल' जारी किया है। इसके अलावा सभी जनपदों में व्यवस्था की गई है कि कोविड संक्रमित रोगियों के घरों तक यह दवाइयां पहुंचाई जाएं। आप स्वत: भी यह दवाइयां ले सकते हैं। रोगी को यदि तेज बुखार है तो पैरासीटामॉल 650 मिलीग्रा. की खुराक दिन में तीन बार ली जा सकती है। इसके अलावा टॉक्सीसाइक्लिन 100 ग्रा की टेबलेट का सेवन सुबह-शाम करना होता है।
ऑक्सीजन सिलिंडर की जरूरत सबको नहीं
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होम आइसोलेशन में कब पड़ सकती है मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत?
इस बारे में डॉ अग्रवाल कहते हैं कि जिन रोगियों का सेचुरेशन 94 से कम है केवल उन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत हो सकती है। लोगों में फेवीफ्लू जैसी कई दवाइयों को लेकर भी मारामारी देखने को मिल रही है, लेकिन इनकी जरूरत सभी को नहीं है। जिन लोगों का ऑक्सीजन सेचुरेशन लगातार कम होता जा रहा हो या जिन्हें लंबे समय से लगातार तेज बुखार हो उन्हें डॉक्टरी सलाह पर ही ऐसी दवाइयों का सेवन करना चाहिए।
------- नोट: यह लेख स्टेट सर्विलांस ऑफिसर डॉ विकासेंदु अग्रवाल से एक बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉ विकासेंदु अग्रवाल विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ भी कई विषयों पर काम कर चुके हैं।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।