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Viral Fever: इन दिनों तेजी से बढ़ रहा है मौसमी बुखार का खतरा, जानिए कैसे करें इससे बचाव

Sun, 18 Aug 2024 06:29 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वायरल बुखार के मामले - फोटो : Freepik
मौसमी बुखार (सीजनल फीवर) एक आम स्वास्थ्य समस्या है, मौसम में होने वाले बदलाव के कारण इसका जोखिम देखा जाता रहा है। इन दिनों कभी बारिश-कभी धूप जैसे बदलते मौसम के कारण इस रोग के मामले बढ़ते देखे जा रहे हैं। असल में मौसम बदलने के दौरान वातावरण में होने वाला परिवर्तन विभिन्न प्रकार के वायरस और बैक्टीरिया को अधिक सक्रिय कर देता है। इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण सीजनल बुखार होता है, जिसमें बुखार, सिरदर्द के साथ शरीर में दर्द और कमजोरी बनी रहती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है वे मौसम में बदलाव के दौरान संक्रमण और बुखार के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है।

आइए जानते हैं कि मौसमी बुखार के क्या कारण हैं और इससे बचाव के लिए किन उपायों को प्रयोग में लाना बेहतर हो सकता है?
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कफ और फीवर की समस्या - फोटो : istock
फ्लू और इसके कारण होने वाली समस्या

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं,  फ्लू के वायरस हमेशा हमारे आस-पास मौजूद रहते हैं और अनुकूल परिस्थितियों में इसके मामले बढ़ जाते हैं। इंफ्लूएंजा वायरस संक्रामक माना जाता है जिसके एक से दूसरे व्यक्तियों में तेजी से बढ़ने का खतरा हो सकता है। कुछ लोगों को फ्लू के संक्रमण में तेज बुखार की भी दिक्कत हो सकती है। समय रहते वायरल संक्रमण के लक्षणों की पहचान कर इसका इलाज प्राप्त करना जरूरी है। 
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सर्दी-जुकाम की समस्या - फोटो : istock
कैसे होते हैं वायरल फीवर के लक्षण

वायरल फीवर और फ्लू के कारण कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम हो सकता है। मौसम बदलते ही इस तरह के लक्षण हो रहे हों तो सावधान हो जाना चाहिए।
  • शरीर का उच्च तापमान (99 °F से 103.5 °F; 37.25 °C से 39.5 °C)
  • ठंड लगना और कंपकंपी
  • थकान और कमजोरी महसूस होते रहना।
  • सिरदर्द और गले में खराश 
  • नाक बहना (राइनोरिया)
  • मांसपेशियों में दर्द और पसीना आना (पसीना आना)
  • भूख कम लगना-निर्जलीकरण की समस्या

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वायरल फीवर के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : istock
क्या है इसका इलाज?

इन्फ्लूएंजा से पीड़ित ज्यादातर लोग बिना किसी दवा या उपचार के भी ठीक हो जाते हैं। बुखार और फ्लू के अन्य लक्षणों को कम करने के लिए पैरासिटामोल दवा लेने की सलाह दी जाती है। हाइड्रेटेड रहना (तरल पदार्थों और पानी का सेवन) और शरीर को आराम देकर लक्षणों और जटिलताओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

आइए जानते हैं कि फ्लू संक्रमण से बचाव के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं?
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फ्लू संक्रमण से बचाव के लिए क्या करें? - फोटो : istock
फ्लू संक्रमण और वायरल फीवर से बचाव के लिए क्या करें?

फ्लू के खतरे से बचाव के लिए कुछ उपाय करना आपके लिए फायदेमंद हो सकते हैं।
  • प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर आहार लें।
  • नियमित रूप से हाथ धोएं और साफ-सफाई का ध्यान रखें। सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनें।
  • अपने घर और कार्यस्थल को साफ और हवादार रखें, जिससे बैक्टीरिया और वायरस का प्रसार कम हो सके।
  • यदि आपको एलर्जी की समस्या है, तो उन तत्वों से बचें जो इसे ट्रिगर कर सकते हैं, जैसे परागकण और धूल।
  • शरीर को हाइड्रेटेड रखें। पानी और अन्य तरल पदार्थों का नियमित सेवन करें ताकि शरीर से विषाक्तता कम हो सके।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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