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Cancer: कैंसर का जल्द पता लगाने में ये टेस्ट साबित हो सकता है वरदान, हर साल लाखों लोगों की बच सकेगी जान

Sun, 15 Sep 2024 12:45 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रोस्टेट कैंसर का खतरा - फोटो : istock
कैंसर के कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। पुरुष हो या महिला सभी लिंग और उम्र वालों में कैंसर का खतरा हो सकता है। पुरुषों में लंग्स और मुंह के कैंसर के बाद प्रोस्टेट कैंसर के मामले सबसे ज्यादा देखे जाते रहे हैं। हर आठ में से एक पुरुष को प्रोस्टेट की समस्या या कैंसर का खतरा हो सकता है।

आमतौर पर प्रोस्टेट कैंसर के मामले 65 की उम्र के बाद अधिक देखे जाते हैं पर अब इसका खतरा 60 की उम्र वालों में भी रिपोर्ट किया जा रहा है। साल 2020 के आंकड़ों के अनुसार दुनियाभर में प्रोस्टेट कैंसर के अनुमानित 1.4 मिलियन (14 लाख) नए मामले सामने आए और अनुमानित 375,000 मौतें हुईं। भारत 2020 में प्रोस्टेट कैंसर के 34,540 मामले और 16,783 मौतें रिपोर्ट की गईं। डेटा के अनुसार, हर साल लगभग 366,000 पुरुष प्रोस्टेट कैंसर से मारे जाते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पुरुषों में ये कैंसर बड़ा खतरा बनकर उभर रहा है। समय पर इसकी पहचान नहीं हो पाती है इसलिए ज्यादातर लोगों में इसका निदान भी आखिरी के चरणों में होता है। हालांकि वैज्ञानिक इस दिशा में अब बड़ा प्रयास कर रहे हैं। शोधकर्ताओं की टीम एक नए प्रकार के स्क्रीनिंग टेस्ट पर काम कर रही है जो प्रोस्टेट कैंसर का समय रहते पहचान कर हजारों लोगों को बचा सकती है।
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पुरुषों में कैंसर का खतरा - फोटो : istock
प्रोस्टेट कैंसर और इसका खतरा

इस टेस्ट के बारे में जानने से पहले प्रोस्टेट कैंसर और इसके जोखिमों को समझना जरूरी है।

प्रोस्टेट कैंसर, प्रोस्टेट ग्रंथि में कोशिकाओं के तेजी से बढ़ने के कारण होता है, ये पुरुष प्रजनन प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण ग्रंथि है। यह पुरुषों में सबसे आम कैंसर है और संयुक्त राज्य अमेरिका में कैंसर से होने वाली मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण है।

डीएनए में कुछ परिवर्तन को इस कैंसर का प्रमुख कारण माना जाता है। जिन लोगों के परिवार में पहले किसी को ये समस्या रही है उनमें प्रोस्टेट कैंसर होने का जोखिम अधिक देखा जाता है। लाइफस्टाइल में गड़बड़ी और मोटापा भी इसका एक जोखिम कारक हो सकती है। डॉक्टरों की सबसे बड़ी चिंता इस कैंसर का समय रहते निदान न हो पाना रही है।




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प्रोस्टेट कैंसर का निदान - फोटो : istock
ट्रांसफॉर्म स्क्रीनिंग ट्रायल

प्रोस्टेट कैंसर के जल्द निदान और उपचार में क्रांतिकारी बदलाव लाने के उद्देश्य से यूके में स्क्रीनिंग ट्रायल शुरू किया गया है। 'ट्रांसफॉर्म' नाम से जाने जाने वाले इस ट्रायल को प्रोस्टेट कैंसर यू.के. द्वारा नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर रिसर्च सहित कई अन्य संस्थानों द्वारा वित्त पोषित किया गया है। अभी तक बीमारी का शुरुआती चरणों में ठीक से पहचान करने के लिए कोई स्क्रीनिंग टेस्ट नहीं है। 

इस कैंसर के लक्षण भी अक्सर तब तक नहीं नजर आते हैं जब तक कि कैंसर फैल न जाए। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस स्क्रीनिंग परीक्षण की मदद से कैंसर का समय रहते पता लगाना आसान हो सकता है।

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प्रोस्टेट कैंसर का टेस्ट - फोटो : istock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

प्रोस्टेट कैंसर यूके के शोध निदेशक डॉ मैथ्यू हॉब्स ने कहा, ट्रांसफॉर्म का उद्देश्य साफ है। हम बीमारी को उसके शुरुआती चरणों में पकड़ने के लिए सबसे प्रभावी, कम से कम हानिकारक तरीके खोजना चाहते हैं।

अभी तक पुरुषों के रक्त में प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन (पीएसए) नामक रसायन का पता लगाकर कैंसर का पता लगाया जाता रहा है। उच्च जोखिम वाले लोगों को बायोप्सी की सलाह दी जाती है। हॉब्स ने कहा समस्या यह है कि रक्त में पीएसए का स्तर बढ़े रहने का मतलब हर बार जरूरी नहीं है कि ये प्रोस्टेट कैंसर ही हो। वहीं बायोप्सी खर्चीला और दर्दनाक प्रक्रिया है और कभी-कभी इससे संक्रमण और सेप्सिस का भी खतरा रहता है।
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पुरुषों में बढ़ता प्रोस्टेट कैंसर का खतरा - फोटो : istock
प्रोस्टेट कैंसर का समय रहते निदान

हॉब्स ने कहा, ऐसा कोई प्रमुख जीन भी नहीं है जो किसी व्यक्ति को प्रोस्टेट कैंसर के बहुत अधिक जोखिम में डालता है, लेकिन लगभग 400 ऐसे जीन हैं जो मिलकर इसका खतरा जरूर बढ़ा सकते हैं। हम जीन के इसी पैनल का उपयोग करके यह देखने की कोशिश कर रहे हैं कि किसी व्यक्ति में प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम कितना हो सकता है?

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में यूरोलॉजी की प्रमुख प्रोफेसर कैरोलीन मूर ने कहा, प्रोस्टेट कैंसर के वैश्विक आंकड़े काफी चिंताजनक है। उम्मीद है कि भविष्य में हमारे पास बेहतर तकनीक होगी जिससे इस कैंसर का समय रहते पता लगाकर लोगों की जान बचाने में मदद मिल सकेगी।



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स्रोत और संदर्भ
TRANSFORM trial, the biggest prostate cancer screening trial 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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