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आखिर किस बीमारी से जूझ रहे हैं रूस के राष्ट्रपति पुतिन, जानें क्या हैं इसके कारण और कैसे करें पहचान

Mon, 09 Nov 2020 02:10 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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व्लादिमीर पुतिन (फाइल फोटो)
कोरोना महामारी से जूझ रही दुनिया को जब इसकी एक अदद वैक्सीन का इंतजार था, तब अगस्त में रूस ने विश्व की पहली कोरोना वैक्सीन बनाने की घोषणा कर दी। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने यह घोषणा कर कई देशों को चौंका दिया था। दावा किया जा रहा था कि रूस जल्द ही इस महामारी पर काबू पा लेगा। ताजा जानकारी यह है कि रूस में एक और वैक्सीन को मंजूरी मिल गई है और पुतिन सरकार से आपातकालीन अप्रूवल के बाद उच्च जोखिम वर्ग के लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है। अपने नागरिकों के स्वास्थ्य का ख्याल रखने वाले राष्ट्रपति पुतिन की तबीयत बहुत ठीक नहीं रह रही है। खबरें तो ऐसी भी सामने आ रही थीं कि व्लादिमीर पुतिन निकट भविष्य में अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहने के कारण इस चर्चा को बल मिल रहा है। आइए, जानते हैं पुतिन आखिर किस बीमारी से जूझ रहे हैं:
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन - फोटो : फाइल फोटो
रूस के राष्ट्रपति पुतिन पार्किंसंस (Parkinsons) नाम की बीमारी से जूझ रहे हैं। हो सकता है यह नाम आपने पहली बार सुना हो। दरअसल, यह एक तरह की मानसिक समस्या है। यह इंसान के नर्वस सिस्टम में फैलने वाला एक तरह का डिसऑर्डर है, जिसे न्यूरोडीजेनेरेटिव डिसऑर्डर भी कहा जाता है। इस बीमारी का पता लग पाना मुश्किल होता है, क्योंकि यह दिमाग में धीरे-धीरे विकसित होता है। गंभीर होने पर यह बीमारी जानलेवा बन जाती है। 
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Mental Disorder - फोटो : Pexels
एक रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल दुनियाभर में तकरीबन 10 मिलियन लोग पार्किंसंस की चपेट में आते हैं और करीब एक लाख लोगों की जान चली जाती है। यह पूरी तरह ठीक होने वाली बीमारी नहीं है, लेकिन दवाओं के जरिए इसके लक्षणों में सुधार लाया जा सकता है। कुछ मामलों में सर्जरी की भी सलाह दी जाती है। कुछ अन्य तरह की थेरेपी, व्यायाम के जरिए मरीज संतुलित जीवन जी सकते हैं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव
मानव मस्तिष्क की गहराई में एक निग्रा नामक क्षेत्र होता है, जिसकी कुछ कोशिकाएं डोपामाइन केमिकल रिलीज करते हैं। यह मस्तिष्क को हर ओर से संदेश देता है। जैसे कि आपको किसी मच्छर ने काटा और आपका हाथ उसे मारने के लिए बढ़ता है, तो यह नर्व सेल्स को इसी केमिकल के जरिए संदेश जाता है। जब व्यक्ति का नर्व सिस्टम ठीक रहे तो मस्तिष्क सामान्य रूप से काम करता है, लेकिन इसमें खराबी के कारण इंसान पार्किंसन बीमारी का शिकार हो सकता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इस बीमारी के लक्षण
इस बीमारी के लक्षण भिन्न हो सकते हैं:
  • कंपन, संतुलन में परेशानी, धीमी गति हो जाना
  • स्वत:स्फूर्त काम न हो पाना- जैसे पलकें झपकाना, चलते समय हाथों आगे-पीछे जाना, हंसना-बोलना
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कैसे होती है बीमारी, कैसे करें पहचान?
यह बीमारी आनुवांशिक कारणों से होती हैं। दिमाग की नसों के दबने, सिर पर गंभीर चोट लगने और अन्य कारणों से हो सकती है। इस बीमारी की पहचान मेडिकल हिस्ट्री, सीटी स्कैन, एमआरआई, डोपामाइन ट्रांसपोर्टर (डीएटी) के जरिए हो सकती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कैसे हो इलाज?
इस बीमारी के पांच चरण होते हैं। शुरुआती चरणों में लक्षण नजर नहीं आते। शरीर में कंपन होना, इसके दूसरे चरण की ओर इशारा करता है। तीसरे चरणों में अन्य लक्षण भी दिखने लगते हैं। चौथे चरण में पीड़ित को खड़े होने और चलने में भी परेशानी होने लगती है, जबकि पांचवें चरण में मानसिक क्षमता प्रभावित होने लगती है और व्यक्ति को भूलने की बीमारी हो जाती है। दूसरे चरण के लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ज्यादातर चिकित्सक इस बीमारी के इलाज के लिए जीवन-शैली में बदलाव, दवाएं, व्यायाम, डीप ब्रेन स्टिमुलेशन की प्रक्रिया अपनाते हैं। 
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