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लक्षण नहीं दिखने पर भी आप हो सकते हैं कोरोना संक्रमित, 'असिम्प्टोमैटिक' मरीजों से ज्यादा खतरा

Fri, 03 Apr 2020 01:01 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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चीन से फैले कोरोना वायरस का संक्रमण दुनियाभर में तेजी से बढ़ता जा रहा है। हर दिन इससे होने वाली मौतों के आंकड़े भी बढ़ रहे हैं। कोरोना से संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने से यह वायरस और तेजी से फैलता जा रहा है। ऐसे मरीजों की संख्या भी बहुत ज्यादा है, जिनके संक्रमित होने के बावजूद उनमें कोरोना के लक्षण नहीं दिखते हैं। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट में ऐसे मरीजों की संख्या 30 फीसदी बताई गई है। वहीं, चीन में ही विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से की गई हेल्थ स्टडी में भी ऐसे एक से तीन फीसदी ऐसे मरीज सामने आए थे, संक्रमित होने के बावजूद जिनमें कोरोना के लक्षण नहीं पाए गए थे। इन मरीजों को असिम्प्टोमैटिक कहा जाता है। अब चुनौती ये है कि  कोरोना के लक्षण वाले मरीजों से तो लोग अपना बचाव कर लें और सावधानियां बरत लें, लेकिन जिनमें कोरोना के लक्षण न दिखाई दें, उनसे कैसे बचाव किया जाए!
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पिछले दिनों विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक स्टडी रिपोर्ट में बताया गया था कि कोरोना संक्रमण के जितने मामले आए हैं, उनमें 100 में से एक से तीन लोग बिना लक्षण वाले हैं। वहीं साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार इनका आंकड़ा करीब 30 फीसदी है। कोरोना संक्रमित लोगों में आमतौर पर दो से तीन दिन के अंदर बुखार, शरीर में दर्द, सूखी खांसी जैसे लक्षण होते हैं, वहीं 10 दिन के अंदर सांस लेने में तकलीफ भी होने लगती है और निमोनिया के लक्षण दिखने लगते हैं। लेकिन असिम्प्टोमैटिक मरीजों में ऐसे लक्षण नहीं दिखते। ऐसे लोगों में लक्षण दिखने में दो से तीन हफ्ते भी लग जाते हैं। 
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सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसीपी), अमेरिका के मुताबिक वहां असिम्प्टोमैटिक मरीजों के 20 फीसदी मामले सामने आए। हेल्थ जर्नल नेचर और अन्य रिपोर्टों के मुताबिक जर्मनी, ईरान, स्पेन और इटली में ऐसे क्रमश: 18, 20, 27 और 30 फीसदी मामले हैं। वहीं,   जापान में 30 फीसदी से ज्यादा असिम्प्टोमैटिक मामले देखे गए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में भी इस तरह के कई मामले सामने आए हैं, हालांकि इनका कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया हैं 

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साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की जो रिपोर्ट आई है, उसके मुताबिक हुबेई प्रांत में कोरोना के 90 हजार से ज्यादा मामले पाए गए थे। इनमें से फरवरी के अंत तक करीब 43 हजार लोगों में कोरोना के लक्षण नहीं थे। इनमें से 20 हजार लोग बाद में कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इन लोगों में दो से तीन हफ्तों के दौरान लक्षण नजर आए थे। इन्हीं कारणों से कोरोना के संदिग्ध को 14 दिन क्वारंटीन पीरियड में रखा जाता है।

पांच करोड़ की आबादी वाले साउथ कोरिया में चार लाख से ज्यादा लोगों का टेस्ट किया जा चुका है। जिन लोगों में लक्षण नहीं दिख रहे, उनकी भी जांच की जा रही है। टेस्ट के बाद 20 फीसदी बिना लक्षण वाले मरीज भी कोरोना से संक्रमित पाए गए। अमेरिका, ब्रिटेन और इटली जैसे देशों के मुकाबले साउथ कोरिया में संक्रमितों की संख्या कम है। 
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विशेषज्ञ बताते हैं कि मजबूत इम्यून सिस्टम वालों खासकर युवाओं का शरीर कोरोना वायरस से जबतक लड़ता रहता है, तबतक उनमें लक्षण नहीं नजर आते। ऐसे असिम्प्टोमैटिक लोगों से कोरोना संक्रमण के फैलने का ज्यादा खतरा होता है। कारण कि लक्षण नहीं नजर आने के कारण वे परिवार से, दोस्तों से और अन्य लोगों से मिलते-जुलते रहते हैं।

इसलिए जरूरी है कि हम साफ-सफाई से लेकर हाइजीन तक और सामान खरीदने से लेकर मिलने जुलने तक तमाम सावधानियां बरतें। 
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