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Ratan Tata: इस बीमारी से पीड़ित थे रतन टाटा; आप भी न हो जाएं शिकार, बचाव के लिए करिए ये उपाय

Thu, 10 Oct 2024 01:09 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रतन टाटा - फोटो : instagram/ratantata
देश के उद्योग जगत की महान शख्सियत रटन टाटा का बुधवार (9 अक्तूबर) को निधन हो गया, वह 86 साल के थे। टाटा संस की तरफ से जारी बयान के मुताबिक रतन टाटा ने बुधवार रात करीब 11:30 बजे मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वह ब्लड प्रेशर में गिरावट के कारण होने वाली जटिलताओं से पीड़ित थे। इससे पहले सोमवार की भी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, हालांकि सोशल मीडिया पर पोस्ट के माध्यम से टीम ने बताया गया था कि वह ठीक हैं और नियमित जांच के लिए अस्पताल गए थे।

कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि रतन टाटा लो ब्लड प्रेशर की समस्या और इसके कारण होने वाली दिक्कतों से परेशान थे, हालांकि टाटा ग्रुप की तरफ से इस बावत (मेडिकल कंडिशन) कोई स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की गई है। 
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ब्लड प्रेशर की समस्या वैश्विक स्तर पर बढ़ती जा रही है जो पूरे शरीर को प्रभावित करने वाली हो सकती है। ब्लड प्रेशर का बढ़ना और कम होना दोनों ही खतरनाक है। सभी उम्र के लोगों को नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच और इसे कंट्रोल में रखने के लिए उपाय करते रहना चाहिए।
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ब्लड प्रेशर की समस्या - फोटो : freepik.com
ब्लड प्रेशर बढ़ना या कम होना, दोनों खतरनाक

ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) का बढ़ना और कम होना दोनों ही कई प्रकार की स्वास्थ्य जटिलताओं का कारण बन सकती है। ब्लड प्रेशर का अक्सर बढ़ा रहना हृदय रोगों के लिए जोखिम कारक माना जाता है। इसके अलावा इससे किडनी, आंखों को भी गंभीर क्षति होने का जोखिम रहता है। इसी तरह से ब्लड प्रेशर लो होना भी सेहत के लिए ठीक नहीं है। ब्लड प्रेशर कम होने से भी हृदय स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर होता है। इसके अलावा ये स्थिति भ्रम, ध्यान केंद्रित करने में समस्या और बेहोशी भी कारण बन सकती है।
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ब्लड प्रेशर कम होने की दिक्कत - फोटो : Freepik.com
लो ब्लड प्रेशर के बारे में जानिए

ब्लड प्रेशर लो होना या हाइपोटेंशन की स्थिति गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है। ब्लड प्रेशर की रीडिंग 90/60 mm Hg से कम बने रहने को लो ब्लड प्रेशर माना जाता है। हाइपोटेंशन किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि यह किस कारण से हुआ है। अध्ययनों में पाया गया है कि शारीरिक रूप से कम सक्रिय लोगों में ब्लड प्रेशर लो होने का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। कुछ अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याएं भी इसका कारण हो सकती हैं।

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लो ब्लड प्रेशर के लक्षण - फोटो : freepik.com
कैसे जानें लो हो गया है ब्लड प्रेशर?

ब्लड प्रेशर लो होने की स्थिति में कई तरह की स्वास्थ्य जटिलताएं हो सकती हैं। इसके कारण चक्कर आने, कमजोरी जैसी दिक्कतें सबसे ज्यादा होती हैं। ब्लड प्रेशर अक्सर लो रहने के कारण मतली या उल्टी, धुंधली दृष्टि, सांस की गति में बदलाव, भ्रम या ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसी समस्याएं होती रहती हैं। 

लो ब्लड प्रेशर के कारण आपका हृदय तेजी से या अधिक जोर से पंप करने लगता है जिससे हृदय की समस्याएं बढ़ सकती हैं। यह हृदय में स्थायी क्षति और यहां तक कि हार्ट फेलियर का कारण भी बन सकती है।
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ब्लड प्रेशर की जांच करते रहें - फोटो : Freepik.com
कैसे करें इस समस्या से बचाव?

हाइपोटेंशन के जोखिम को कम करना या रोकना आमतौर पर संभव नहीं है। मादक पदार्थ जैसे शराब, धूम्रपान आदि से दूरी बनाकर इस समस्या से बचाव किया जा सकता है। लो सोडियम के कारण भी आपको ये दिक्कत हो सकती है। कई बार लंबे समय तक भूखे रहने से भी ब्लड प्रेशर कम होने का खतरा रहता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करते रहना चाहिए। अगर ये अक्सर बढ़ा या कम होता रहता है तो डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें। ब्लड प्रेशर बहुत कम है तो नमक पानी का सेवन करने से इसे कंट्रोल किया जा सकता है। हालांकि अगर इसमें आराम न मिले तो तुरंत किसी नजदीकी चिकित्सक के पास जरूर जाएं।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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