Psychotic Breakdown
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मनोविकार से बचाव के उपाय
ऐसे में हमें अपनी व्यस्त दिनचर्या से कुछ पल की छुट्टी जरूर लेनी चाहिए। ऐसा करने से हम न सिर्फ आराम कर सकते है, बल्कि तनावपूर्ण परिस्थितियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार भी हो सकते हैं। खासकर तब, जब आप फोकस और एकाग्रता खो रही हों। वैसे तो आजकल सोशल मीडिया भी तनाव का कारण बन रहा है, जिससे भी मानसिक थकान और अवसाद बढ़ रहा है। इसलिए दिन में कुछ समय इससे भी दूरी बनाकर रखना हितकर रहेगा।
बीमारी को समझ पाना आसान नहीं
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. वी.एस. पाल कहते हैं, साइकोटिक ब्रेक का कोई एक कारण नहीं होता। मानसिक रोगी भी एक जैसे नहीं होते और न उनका इलाज समान होता है। कुछ लोग काउंसलिंग से ठीक हो जाते हैं तो कुछ लोगों को इलाज की जरूरत पड़ती है। मनोरोगी खुद नहीं जानता कि वह अवसादग्रस्त है। उसके आस-पास के लोग ही जान सकते हैं कि वह अवसादग्रस्त है। इसलिए जब भी ऐसा महसूस हो, पीड़ित को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए। अवसाद की स्थिति से उसे चिकित्सक और परिवार वाले ही बाहर निकाल सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले वे असल कारण समझने की कोशिश करें। वे उसे समझाएं और उसे उन हालात से बाहर निकालें। आजकल की दिनचर्या और आर्थिक, पारिवारिक और ऑफिस में काम को प्रोत्साहन नहीं मिलने के कारण भी युवा इस स्थिति का सामना कर रहे हैं। इसलिए आपको ऐसे लोगों से हमेशा बात करते रहना चाहिए और खुद के साथ उसे सहज महसूस कराना चाहिए, ताकि वे अपने मन की बात खुलकर आपसे साझा कर सकें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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