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PMOS: 70% महिलाओं को पता ही नहीं कि उन्हें है PMOS की समस्या, आप भी तो हैं उनमें से एक?

Tue, 21 Jul 2026 09:23 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम का सबसे सामान्य और शुरुआती संकेत मासिक धर्म का अनियमित होना है। सामान्यतः मासिक चक्र 21 से 35 दिनों के बीच होता है। यदि पीरियड्स बार-बार 35 दिनों से अधिक के अंतराल पर आते हैं तो अलर्ट हो जाएं।
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महिलाओं में पीएमओएस की दिक्कत - फोटो : Amarujala.com/AI
क्या आपके पीरियड्स भी समय पर नहीं आते, अचानक वजन बढ़ने लगा है, चेहरे पर मुंहासे हो रहे हैं और हमेशा थकान महसूस होती है? अगर हां तो इन समस्याओं को अनदेखा न करें। कई बार ये शरीर में पनप रही किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।

अक्सर महिलाएं शरीर में इस तरह बदलावों को तनाव, खराब दिनचर्या या हार्मोनल उतार-चढ़ाव समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन अगर ये दिक्कत अक्सर बनी रहती है तो डॉक्टर से मिलकर इसकी जांच करा लें, कहीं ये पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीएमओएस) की तरफ इशारा तो नहीं है? 

पीएमओएस को पहले पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) के नाम से जाना जाता था। यह केवल अंडाशय की बीमारी नहीं है, बल्कि इसमें इंसुलिन रेजिस्टेंस, हार्मोनल असंतुलन, मोटापा, इन्फ्लेमेशन, मेटाबॉलिक की गड़बड़ियां भी हो सकती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) रिपोर्ट में चिंता जताई गई है कि लगभग 70% महिलाएं को पता ही नहीं होता कि उन्हें ये बीमारी है।
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मासिक धर्म की समस्या - फोटो : Freepik.com
पीएमओएस की समस्या

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पीएमओएस के कारण मासिक धर्म समय पर न आने, बहुत कम या पूरी तरह बंद हो जाने जैसी समस्या हो सकती है।

यदि समय रहते इसकी पहचान न हो तो भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, फैटी लिवर और बांझपन तक का खतरा रहता है। यही कारण है कि पीएमओएस की समय पर पहचान बहुत जरूरी है।


पीरियड्स अनियमित हैं तो हो जाएं अलर्ट

पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम का सबसे सामान्य और शुरुआती संकेत मासिक धर्म का अनियमित होना है। 
 
  • सामान्यतः मासिक चक्र 21 से 35 दिनों के बीच होता है। 
  • यदि पीरियड्स बार-बार 35 दिनों से अधिक के अंतराल पर आते हैं तो यह ओव्यूलेशन में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।
  • इस सिंड्रोम में शरीर में एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) का स्तर बढ़ जाता है, जिससे अंडाशय हर महीने सामान्य रूप से अंडा रिलीज नहीं कर पाते। परिणामस्वरूप पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। 
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बार-बार मुंहासे की समस्या - फोटो : Adobe stock
मुंहासे और बाल झड़ने का खतरा

क्या आपके चेहरे, ठुड्डी या पेट-पीठ पर बाल आने लगे हैं, बार-बार मुंहासे हो रहें हैं? तो यह शरीर में एंड्रोजन हार्मोन बढ़ने का संकेत हो सकता है।
 
  • पीएमओएस में ओवरी और कभी-कभी एड्रिनल ग्रंथि जरूरत से ज्यादा एंड्रोजन बनाने लगती है। इसका असर त्वचा और बालों पर साफ दिखाई देता है। 
  • चेहरे पर बार-बार निकलने वाले मुंहासे सामान्य स्किन प्रॉब्लम नहीं बल्कि हार्मोनल असंतुलन का संकेत भी हो सकते हैं।
  • कई महिलाओं में सिर के बीच वाले हिस्से से बाल पतले होने लगते हैं, जिसे फीमेल पैटर्न हेयर लॉस कहा जाता है। 
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तनाव-स्ट्रेस की समस्या - फोटो : Freepik.com
बढ़ने लगा है वजन

यदि संतुलित भोजन और नियमित व्यायाम के बावजूद वजन कम नहीं हो रहा है और पेट के आसपास तेजी से चर्बी बढ़ रही है, तो इसे सामान्य मोटापा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
 
  • पीएमओएस के कारण महिलाओं में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ जाता है। इसका मतलब है कि शरीर इंसुलिन का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाता। इसके कारण शरीर ज्यादा इंसुलिन बनाने लगता है, जो फैट जमा होने की प्रक्रिया को बढ़ा देती है।


लगातार थकान और मूड में बदलाव हो रहा है?

यदि एक वर्ष तक नियमित संबंध बनाने के बावजूद गर्भधारण नहीं हो रहा, या लगातार थकान, एंग्जाइटी बनी रहती है, तो यह भी पीएमओएस का संकेत हो सकता है।

कुछ अध्ययनों में पीएमओएस वाली महिलाओं में स्ट्रे, डिप्रेशन और नींद की समस्याओंका जोखिम भी अधिक पाया गया है। समय पर पहचान और उपचार से न केवल प्रजनन स्वास्थ्य बल्कि भविष्य में डायबिटीज, हृदय रोग और अन्य जटिलताओं के जोखिम को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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