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अध्ययन: इस वजह से कोविड-19 के गंभीर मामलों और मृत्यु दर का बढ़ गया है खतरा, जानिए कैसे करें बचाव?

Sat, 06 Nov 2021 05:11 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गंभीर कोविड-19 का खतरा - फोटो : iStock
दुनिया के तमाम देशों में पिछले कुछ हफ्तों से कोविड-19 के मामले तेजी से बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। हालिया रिपोर्टस के मुताबिक यूरोपीय देशों में पिछले महीने कोरोना के मामलों में 50 फीसदी का इजाफा हुआ है। रूस जैसे देशों में हालात एक बार फिर से गंभीर होते दिख रहे हैं, यहां पिछले कुछ दिनों से रोजाना 35 हजार से ज्यादा कोरोना के मामले दर्ज किए जा रहे हैं। भारत के संदर्भ में बात करें तो यहां हालात फिलहाल नियंत्रण में हैं, हालांकि एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया के हालिया बयान ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

डॉ गुलेरिया कहते हैं, दीपावली के बाद राजधानी दिल्ली में बढ़े प्रदूषण के कारण कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ गया है। बढ़ता प्रदूषण न सिर्फ हृदय और फेफड़ों के गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है, साथ ही यह कोविड-19 के गंभीर मामलों का भी कारण बन सकता है। आइए इस बारे में आगे की स्लाइडों में विस्तार से जानते हैं।
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वायु प्रदूषण ने बढ़ाई मुश्किलें - फोटो : Pixabay
प्रदूषण और कोविड-19 के गंभीर मामले
शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने कहा, वायु प्रदूषण का श्वसन स्वास्थ्य पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। विशेष रूप से यह फेफड़ों और अस्थमा के
रोगियों के लिए बड़ी मुसीबत का कारण बन सकता है। इतना ही नहीं यह भी चिंताजनक बात है कि प्रदूषण के कारण कोविड-19 के गंभीर मामलों की संख्या में भी इजाफा हो सकता है। इन खतरों से बचे रहने के लिए लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। मास्क पहनना आपके लिए बेहद आवश्यक है, यह कोविड-19 और प्रदूषण दोनों से सुरक्षा देने में मदद करेगा।
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कोविड-19 का खतरा - फोटो : iStock
क्या कहते हैं अध्ययन
अध्ययनों से पता चलता है कि प्रदूषण का बढ़ा हुआ स्तर कोविड-19 रोगियों के लिए बड़ी समस्या का कारण बन सकता है। हाल ही में हुए एक अध्ययन से पता चलता है कि हवा में प्रदूषकों के साथ कोरोना के वायरस लंबे समय मौजूद रह सकते हैं, यही कारण है कि कोरोना के एयरबोर्न डिजीज का खतरा बढ़ रहा है। यह कोरोना के मामलों को बढ़ाने के साथ गंभीर मामलों का भी कारण बन सकता है। 

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फेफड़ों में हो सकती है सूजन की समस्या - फोटो : iStock
मृत्यु दर बढ़ने का खतरा
साल 2003 में हुए एक अन्य अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि बढ़ा हुआ प्रदूषण फेफड़ों में सूजन का कारण बनता है। 2003 में अमेरिका और इटली जैसे देशों में सार्स के प्रकोप के दौरान हुए शोध के आधार पर वैज्ञानिक कहते हैं कि जिन हिस्सों में प्रदूषण का स्तर बहुत अधिक होता है, वहां कोविड-19 के रोगियों के लिए समस्याएं और अधिक बढ़ सकती है। चूंकि प्रदूषण के कारण फेफड़ों में सूजन हो जाती है, ऐसे में प्रदूषण और कोविड-19 के संयोजन से मृत्यु दर बढ़ सकता है।
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मास्क पहनना बहुत आवश्यक - फोटो : pixabay
राजधानी में प्रदूषण के कारण बिगड़े हालात
दीपावली के बाद से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बढ़े प्रदूषण ने हालात बिगाड़ दिए है। पिछले दो दिनों से यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक "गंभीर" श्रेणी में पहुंच गया है, इसके अलावा दिल्ली के कई हिस्सों में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 की कॉसंट्रेशन 999 प्रति क्यूबिक मीटर मापी गई। डॉ रणदीप गुलेरिया ने सभी लोगों से प्रदूषण से बचाव के लिए सभी आवश्यक उपाय करते रहने की अपील की है। कोरोना के साथ-साथ बढ़े हुए प्रदूषण से बचाव के लिए मास्क पहनकर रखना सबसे प्रभावी विकल्प हो सकता है। 



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नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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