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Vaccinated vs Unvaccinated: ओमिक्रॉन के लक्षणों में देखा जा रहा है यह खास अंतर, विशेषज्ञ ने इस खतरे को लेकर भी किया सावधान

Mon, 07 Feb 2022 02:22 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ओमिक्रॉन संक्रमण के क्या लक्षण होते हैं? - फोटो : iStock
Medically Reviewed by-
डॉ सौरभ अवस्थी
(श्वांस रोग विशेषज्ञ, इंटेंसिव केयर यूनिट)
नोएडा


पिछले करीब दो महीने से दुनियाभर में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट का संक्रमण जारी है। हालांकि बीते कुछ दिनों से देश में रोजाना संक्रमितों के मामलों में थोड़ी कमी देखी जा रही है। जनवरी के मध्य में जहां रोजाना ढाई से तीन लाख की संख्या में रोजाना कोरोना के संक्रमित सामने आ रहे थे, वहीं यह आंकड़ा अब घटकर एक लाख से कम का रह गया है। पिछले 24 घंटे में देश में करीब 83 हजार लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना के मामले भले ही कम हो रहे हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वायरस जा चुका है। हमें लगातार सुरक्षा बरतते रहने की आवश्यकता है। अध्ययनों में ओमिक्रॉन के कुछ ऐसे सब-वैरिएंट्स के बारे में दावा किया जा रहा है जो अत्यधिक संक्रामक हो सकते हैं और लोगों में गंभीर बीमारी का कारण बन सकते हैं।

ओमिक्रॉन को लेकर किए गए अध्ययनों में पाया गया है कि इसका संक्रमण किसी को भी हो सकता है। ऐसे में जिन लोगों का वैक्सीनेशन पूरा हो गया है, उन्हें भी वायरस से सुरक्षित नहीं माना जा सकता है। राहत की बात यह है कि जिन लोगों का पूरी तरह से टीकाकरण हो चुका है, वे गंभीर बीमारियों से सुरक्षित हैं। अन्वैक्सीनेटेड लोगों की तुलना में ऐसे लोगों में  वायरस के खिलाफ बेहतर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया देखी गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि टीकाकरण और बिना टीकाकरण वाले लोगों में ओमिक्रॉन संक्रमण के लक्षण कितने अलग हो सकते हैं? आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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ओमिक्रॉन के लक्षणों के बारे में जानिए - फोटो : iStock
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में इंटेंसिव केयर यूनिट के चिकित्सक डॉ सौरभ अवस्थी बताते हैं, डेल्टा वैरिएंट की तुलना में ओमिक्रॉन से संक्रमितों के लक्षण हल्के-मध्यम स्तर वाले देखे जा रहे हैं। ज्यादातर रोगी 4-5 दिन में बिल्कुल ठीक हो जा रहे हैं। हालांकि कुछ संक्रमितों में इसके कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी देखी गई है। इसमें से ज्यादातर वे लोग हैं जिनका वैक्सीनेशन या तो पूरा नहीं हुआ है या फिर उनको सिर्फ एक ही डोज मिली है। इससे साबित होता है कि वैक्सीनेशन भले ही संक्रमण से सुरक्षा की गारंटी न हो लेकिन इससे रोग की गंभीरता का खतरा निश्चित ही कम हो जाता है।
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टीकाकरण करा चुके लोगों में देखे जा रहे हैं हल्के लक्षण - फोटो : Pixabay
टीकाकरण और बिना टीकाकरण वालों में लक्षण
ओमिक्रॉन संक्रमण के इस दौर में देखा जा रहा है कि टीकाकृत और बिना टीकाकरण वाले लोगों में लक्षण भिन्न हो सकते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं, अगर रोग की गंभीरता की बात की जाए तो यह स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। रिपोर्टों से पता चलता है कि जिन लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज मिल चुकी है उनमें संक्रमण की स्थिति में  सिरदर्द, नाक बहने, जोड़ों में दर्द, गले में खराश जैसे सामान्य लक्षण हो रहे हैं। जबकि जिनका वैक्सीनेशन नहीं हुआ है उनमें इन लक्षणों के साथ सांस लेने में कठिनाई, बहुत अधिक कमजोरी और ठीक होने में अपेक्षाकृत अधिक समय लग रहा है।

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बिना टीकाकरण वाले लोगों में लंबे समय तक रह सकते हैं लक्षण - फोटो : iStock
कितने समय तक रह सकता है संक्रमण का असर?
एक हालिया रिपोर्ट में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. पीटर चिन-होंग बताते हैं, जिन लोगों का वैक्सीनेशन पूरा हो गया है उन्हें कम समय के लिए संक्रमण के लक्षणों का अनुभव हो रहा है, इतना ही नहीं बहुत से लोग 3-4 दिनों में ठीक भी हो जा रहे हैं। वहीं जिनका टीकाकरण नहीं हुआ है उनमें संक्रमण के लक्षण 7-10 दिनों तक भी बने रह सकते हैं। संक्रमण से ठीक होने के बाद भी ऐसे लोगों में बीमारी के कारण लंबे समय तक कमजोरी और अन्य दिक्कतें बनी रह सकती हैं।
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कोरोना से बचाव करते रहना जरूरी - फोटो : Pixabay
सुरक्षात्मक उपायों को लेकर न बरतें लापरवाही
डॉ सौरभ बताते हैं, पिछले दो महीनों के भीतर ब्रेक-थ्रू संक्रमण के मामलों में भी इजाफा देखने को मिला है। ब्रेक-थ्रू संक्रमण का मतलब उन लोगों में संक्रमण होने से है जिनको वैक्सीन की एक या दोनों डोज मिल चुकी है। इतनी ही नहीं बूस्टर खुराक के बाद भी लोगों में इस तरह के मामले देखे गए हैं। इस आधार पर कहा जा सकता है कि ओमिक्रॉन किसी को भी संक्रमित कर सकता है, देश में केस भले ही कम हो रहे हैं, पर इस समय सुरक्षा को लेकर की गई थोड़ी सी भी चूक मुश्किलें खड़ी कर सकती है। 

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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