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अध्ययन: इस आयुवर्ग में टीके की दोनों डोज के बाद भी कम पाई गई एंटीबॉडीज, संक्रमण का खतरा हो सकता है अधिक

Sat, 24 Jul 2021 02:01 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के खिलाफ शरीर में एंटीबॉडीज - फोटो : Amar Ujala/Pixabay
कोरोना के नए वैरिएंट्स और इनसे बचाव के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों से जल्द से जल्द वैक्सीन लगवाने की अपील कर रहे हैं। माना जा रहा है कि वैक्सीन लगवाने से शरीर में बनीं एंटीबॉडीज कोरोना वायरस संक्रमण से सुरक्षा दे सकती हैं। हालांकि कई अध्ययनों में लोगों में एंटीबॉडीज का स्तर अलग-अलग होने की बात कही जा रही है। इसी से संबंधित एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि वृद्ध लोगों में वैक्सीनेशन के बाद भी कोरोनावायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज, युवाओं की तुलना में कम हो सकती हैं। इस आधार पर कहा जा सकता है कि वैक्सीनेशन के बाद भी वृद्ध लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक एंटीबॉडी एक प्रकार का रक्त प्रोटीन होती हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा निर्मित होती हैं और संक्रमण से शरीर को सुरक्षित रखने में मदद करती हैं। हाल ही में हुए अध्ययन में वैज्ञानिकों का कहना है कि वृद्ध लोगों का भले ही टीकाकरण हो चुका हो लेकिन इन्हें कोरोना के वैरिएंट्स के खिलाफ अतिसंवेदनशील माना जा सकता है, इसका मुख्य कारण उनके शरीर में पर्याप्त मात्रा में एंटीबॉडीज का निर्माण न हो पाना है। आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं कि आखिर बुजुर्गों को कोरोना संक्रमण के खतरे से कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है?
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उम्रदराज लोगों में कम हो सकती हैं एंटीबॉडीज - फोटो : iStock
एंटीबॉडीज को लेकर उम्र आधारित अध्ययन
अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि तमाम उम्र के लोगों में वैक्सीन के बाद शरीर में बनीं एंटीबॉडीज के स्तर पर अध्ययन किया गया। ओएचएसयू स्कूल ऑफ मेडिसिन में मॉलिक्यूलर माइक्रोबायोलॉजी और इम्यूनोलॉजी के सहायक प्रोफेसर और अध्ययन के वरिष्ठ लेखक फिकाडू ताफेसे कहते हैं, उम्रदराज लोगों के शरीर में एंटीबॉडीज का स्तर कम पाया गया है। हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि वृद्ध लोगों में भले ही एंटीबॉडी प्रतिक्रिया कम हो सकती है लेकिन ऐसे लोगों को भी कोरोना के गंभीर संक्रमण से काफी हद तक सुरक्षित माना जा सकता है।
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वृद्ध लोगों को संक्रमण से सुरक्षित रख सकती है वैक्सीन (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
कोरोना के प्रसार और गंभीर संक्रमण से बचाती है वैक्सीन
शोधकर्ताओं का कहना है कि जिन लोगों का वैक्सीनेशन हो चुका है पर भले ही उनमें कम एंटीबॉडीज है, ऐसे लोग भी कोरोना के गंभीर संक्रमण और इससे होने वाली मौत से सुरक्षित माने जा सकते हैं। टीकाकरण नए और संभावित रूप से अधिक संक्रामक वायरस के भी प्रसार को कम कर देता है। ऐसे में विशेष रूप से वृद्ध लोगों का टीकाकरण काफी आवश्यक है क्योंकि ऐसे लोग संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। वृद्ध लोगों को सुरक्षित रखने के लिए आसपास के सभी लोगों का टीकाकरण होना भी बेहद आवश्यक है, संक्रमण को रोकने के लिए यह तरीका अपनाया जाना चाहिए।

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युवाओं में अधिक पाई गई है एंटीबॉडी प्रतिक्रिया - फोटो : Pixabay
युवाओं में देखी गई अधिक एंटीबॉडी प्रतिक्रिया
इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने फाइजर वैक्सीन की दूसरी खुराक लेने के दो सप्ताह बाद 50 लोगों के रक्त में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को जानने के लिए अध्ययन किया। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि 70 से 82 वर्ष की आयु के लोगों की तुलना में 20 साल के आसपास की आयु वाले लोगों में एंटीबॉडी प्रतिक्रिया लगभग सात गुना अधिक हो सकती है। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि चूंकि उम्रदराज लोगों में एंटीबॉडी प्रतिक्रिया कम हो सकती है, ऐसे में यह लोग संक्रमण के खिलाफ अतिसंवेदनशील माने जा सकते हैं। प्रोफेसर टैफेस कहते हैं, कोरोना के नए वैरिएंट्स के प्रति युवा व्यक्तियों की तुलना वृद्ध लोगों खतरा अधिक हो सकता है, हालांकि टीका फिर भी काफी हद तक सुरक्षा देने के योग्य है।
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कोरोना से सुरक्षा के लिए वैक्सीनेशन जरूरी - फोटो : pixabay
क्या है अध्ययन का निष्कर्ष?
ओएचएसयू स्कूल ऑफ मेडिसिन में संक्रामक रोगों के एसोसिएट प्रोफेसर और अध्ययन के सह-लेखक मार्सेल कर्लिन ने कहते हैं, इस अध्ययन के निष्कर्ष के आधार पर हम कह सकते हैं कि वृद्ध लोगों के साथ-साथ अन्य लोगों का टीकाकरण भी बेहद आवश्यक है। अध्ययनों में यह स्पष्ट हो चुका है कि प्राकृतिक संक्रमण की तुलना में वैक्सीनेशन से शरीर में मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पैदा हो सकती है। वृद्ध लोगों का टीकाकरण जरूरी है क्योंकि इससे कोरोना से होने वाला गंभीर खतरा कम हो सकता है। आसपास के लोगों का यदि टीकाकरण हो जाए तो कम एंटीबॉडी प्रतिक्रिया वाले लोगों को भी अतिरिक्त सुरक्षा मिल सकती है।


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स्रोत और संदर्भ: 
Study links vaccine immune response to age

अस्वीकरण नोट: यह लेख OHSU स्कूल ऑफ मेडिसिन की विज्ञप्ति और अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल में प्रकाशित अध्ययनके आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। संबंधित विषय के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए अपने चिकित्सक से सलाह लें। 
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