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World Cancer Day: मोटापा ग्रस्त लोगों में हार्ट अटैक के साथ इस कैंसर का भी खतरा, आपका भी तो नहीं बढ़ा है वजन?

Sun, 04 Feb 2024 06:52 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मोटापे की समस्या - फोटो : iStock
मोटापा, दुनियाभर में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या है, जिसका खतरा समय के साथ बढ़ता जा रहा है। बच्चे से लेकर बुजुर्गों तक, सभी उम्र के लोगों में मोटापे की दिक्कत देखी जा रही है। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों का वजन अधिक होता है या फिर मोटापे के शिकार हैं, उनमें समय के साथ कई प्रकार की क्रोनिक बीमारियों के विकसित होने का खतरा भी अधिक हो सकता है।

डॉक्टर कहते हैं, डायबिटीज से लेकर हार्ट की बीमारियों तक, आपका बढ़ा वजन सेहत के लिए बड़ी मुश्किलों का कारण बन सकता है, इसे कंट्रोल में करने के लिए जरूरी उपाय किए जाने चाहिए।

इस बीच एक हालिया शोध में वैज्ञानिकों ने आगाह करते हुए बताया है कि मोटापे की स्थिति आपमें जानलेवा कैंसर रोग के खतरे को भी बढ़ाने वाली हो सकती है। न्यूयॉर्क के शोधकर्ताओं ने पाया है कि मोटापे से मल्टीपल मायलोमा (प्लाज्मा कोशिकाओं का रक्त कैंसर) विकसित होने का खतरा 70 प्रतिशत से अधिक बढ़ सकता है। 
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ब्लड कैंसर का जोखिम - फोटो : Pixabay
मोटापा और मल्टीपल मायलोमा का खतरा

अमेरिका के मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल की टीम ने कहा, धूम्रपान की आदतें मल्टीपल मायलोमा विकसित होने का प्रमुख कारक मानी जाती रही हैं, अब शोध में पाया गया है कि मोटापे के शिकार लोगों में भी इसका जोखिम हो सकता है।

ब्लड एडवांसेज जर्नल में प्रकाशित शोध से पता चला है कि मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों में मोनोक्लोनल गैमोपैथी ऑफ अनडेटरमिन्ड सिग्नीफिकेन्स (एमजीयूएस) का जोखिम अधिक हो जाता है। एमजीयूएस, रक्त की सामान्य स्थिति है जो अक्सर मल्टीपल मायलोमा से पहले होती है।
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युवाओं में मोटापे की समस्या - फोटो : istock
अध्ययन में क्या पता चला?

फरवरी 2019 से मार्च 2022 के बीच अमेरिका से 2,628 व्यक्तियों जिनमें हेमटोलोगिक विकृतियों का पारिवारिक इतिहास था, जिससे मल्टीपल मायलोमा विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है, उन्हें शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि सामान्य वजन वाले व्यक्तियों की तुलना में मोटापे के शिकार लोगों में एमजीयूएस होने की आशंका 73 प्रतिशत अधिक थी।

हालांकि टीम के मुताबिक जो लोग शारीरिक तौर पर सक्रिय थे (प्रतिदिन 45-60 मिनट रनिंग या जॉगिंग जैसे अभ्यास) उनमें एमजीयूएस का खतरा कम पाया गया।  

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कैंसर और इसके जोखिम कारक - फोटो : Pixabay
जोखिम कारकों के बारे में जानना जरूरी

एमजीयूएस, प्लाज्मा कोशिकाओं द्वारा उत्पादित एक असामान्य प्रोटीन है और ये मल्टीपल मायलोमा के सबसे प्रमुख कारकों में से एक है। एमजीयूएस वाले अधिकांश लोगों में कोई महत्वपूर्ण लक्षण नहीं दिखते हैं, इस कारण यह शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचाता रहता है।

अध्ययनकर्ता बताते हैं, शोध के परिणाम से पता चलता है कि कैंसर के खतरे को कम करने के लिए वजन कंट्रोल रखने के साथ व्यायाम करना और धूम्रपान जैसे आदतों से बिल्कुल दूरी बनाकर रखना आवश्यक हो जाता है। 
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मोटापा को करें कंट्रोल - फोटो : iStock
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

टीम ने पाया कि मोटापे के अलावा अधिक धूम्रपान और नींद की कमी वाले लोगों में भी एमजीयूएस होने की अधिक आशंका देखी गई है। मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल के प्रोफेसर डेविड ली ने बताया, समय के साथमल्टीपल मायलोमा के उपचार में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, लेकिन यह अब भी एक लाइलाज बीमारी बनी हुई है, जिसका अक्सर निदान तब किया जाता है जब मरीजों में बीमारी काफी बढ़ जाती है।

इसके जोखिम कारकों को लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतने की आवश्यकता है। विशेषतौर पर जिस तरह से इस अध्ययन में पाया गया है, वजन को कंट्रोल रखना बहुत आवश्यक हो जाता है।



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स्रोत और संदर्भ
Obesity Linked to Detection of Blood Cancer Precursor

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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