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Spurious Medicines: गुणवत्ता टेस्ट में फेल हुईं 53 दवाएं, डॉक्टर से जानिए अब ये दवाएं खाएं या नहीं?

Sat, 28 Sep 2024 12:55 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गुणवत्ता टेस्ट में कई दवाएं फेल - फोटो : amarujala.com
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने हाल ही में 50 से ज्यादा ऐसी दवाओं की पहचान की है जो ड्रग क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गई हैं। इन दवाओं में  पैरासिटामोल भी शामिल है जिसे सर्दी-जुकाम, दर्द और बुखार की समस्या में ओवर-द-काउंट सबसे ज्यादा उपयोग में लाया जाता रहा है। रिपोर्ट में नियंत्रक बोर्ड ने कहा कैल्शियम और विटामिन-डी3 सप्लीमेंट, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की कई दवाएं 'मानक गुणवत्ता की नहीं' हैं। इन दवाओं के इस्तेमाल को लेकर चिंता जाहिर करते हुए नियंत्रक बोर्ड ने कहा नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी (एनएसक्यू) में कई दवाएं ऐसी हैं जिनका व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसको लेकर विचार करने की आवश्यकता है।

इस संबंध में वरिष्ठ आधिकारिक सूत्रों ने कहा, "ऐसी सूची हर महीने जारी की जाती है और इससे पता चलता है कि ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) लगातार दवाओं की गुणवत्ता की निगरानी कर रहा है। इसके साथ उन निर्माता कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है जो एनएसक्यू की दवाएं बेच रही हैं। 

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद से लोगों में दवाओं को लेकर कई तरह के सवाल बने हुए हैं। क्या इनका उपयोग अब बंद कर देना चाहिए? आइए डॉक्टर से समझते है।
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गुणवत्ता परीक्षण में कई दवाएं फेल हुईं - फोटो : Freepik
दवाओं की गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह

दवाओं की खराब गुणवत्ता की रिपोर्ट को लेकर अधिकारियों ने कहा कि एनएसक्यू ज्यादातर मामूली प्रकृति का होता है इनसे जीवन के लिए खतरा नहीं होता है।

हालांकि इन दवाओं को लेकर लोगों के मन में अब कई प्रकार का डर देखा जा रहा है। इनका उपयोग करें या न करें? इनसे कोई साइड-इफेक्ट तो नहीं? क्या अब इन दवाओं को ओवर-द-काउंटर लेकर नहीं खाना चाहिए, आइए इन सभी सवालों के जवाब स्वास्थ्य विशेषज्ञों से जानते हैं।


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दवाएं - फोटो : Freepik.com
कार्यवाई की मांग

संक्रामक रोग विशेषज्ञ और एड्स सोसाइटी ऑफ इंडिया के मानद अध्यक्ष डॉ. ईश्वर गिलाडा ने दवाओं की गुणवत्ता को लेकर खड़े होते सवाल पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा, लगभग 53 दवाओं को गुणवत्ता टेस्ट में फेल पाया है , यह मामला बहुत गंभीर लगता है। हम ऐसे चौराहे पर हैं जहां एक तरफ हम दुनिया की फार्मा राजधानी हैं वहीं दूसरी तरफ हमारी दवाओं की गुणवत्ता ठीक नहीं पाई गई है। इसको लेकर कार्यवाई की जानी चाहिए।
 
इस बारे में अमर उजाला से बातचीत में उजाला सिग्नस हॉस्पिटल्स के निदेशक डॉ शुचिन बजाज कहते हैं, एनएसक्यू का सीधा मतलब है कि जिन फैक्ट्रियों में ये दवाएं निर्मित की गई है वहां पर तय गुणवत्ता का पालन नहीं किया गया है। ऐसे में जिन निर्माता की दवाओं को लेकर एनएसक्यू आई है उन दवाओं को खाने से बचा जाना चाहिए। 

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दवाओं की गुणवत्ता - फोटो : Freepik.com
दवाओं की क्वालिटी चेक को लेकर हो पारदर्शिता

डॉ शुचिन कहते हैं, देश में नकली दवाओं को लेकर अक्सर सवाल खड़े किए जाते रहे हैं। कई बार मांग भी की गई है कि दवाओं पर कुछ क्यूआरकोड या गुणवत्ता चेक करने वाले तरीके होने चाहिए। फिलहाल एनएसक्यू वाली दवाओं से बचने के लिए दवाओं के रैपर की अच्छे से जांच करें। उन्हीं दवाओं का इस्तेमाल किया जाना चाहिए जो सर्टिफाइड प्लांट्स में बनी हों।

यूएस एफडीए और डब्ल्यूएचओ जीएमपी सर्टिफाइड निर्माताओं द्वारा तैयार की गई दवाओं को ही इस्तेमाल में लाया जाना चाहिए।
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दवाओं की गुणवत्ता - फोटो : Freepik.com
ये दवाएं खाएं या नहीं?

ग्रेटर नोएडा स्थित अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन विभाग के डॉक्टर श्रेय श्रीवास्तव बताते हैं, जिन दवाओं को लेकर एनएसक्यू रिपोर्ट जारी की गई है कि उनमें से कई दवाओं के कांबिनेशन का डॉक्टर ज्यादा इस्तेमाल भी नहीं कर रहे थे। लोगों को इस रिपोर्ट को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।

दवाओं के किसी भी प्रकार के दुष्प्रभावों से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि ओवर-द-काउंटर दवाओं का उपयोग कम किया जाए। डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर दवाएं लेने से इससे होने वाले दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है, यही सबसे सुरक्षित तरीका है।


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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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