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NIPAH Virus: केरल के 29 शहरों में संक्रमण का जोखिम, बढ़ाए गए प्रतिबंध, पड़ोसी राज्यों में भी अलर्ट जारी

Mon, 18 Sep 2023 07:14 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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निपाह संक्रमण का जोखिम - फोटो : iStock
निपाह वायरस के कारण केरल में पिछले दिनों तेजी से संक्रमण के मामले बढ़े हैं। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्य में अब तक छह लोगों में संक्रमण की पुष्टि की गई है, इनके निकट संपर्क में आए लोगों पर भी निगरानी रखी जा रही है। स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने शुक्रवार एक बयान में कहा कि निपाह से संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों की संख्या बढ़कर 1080 हो गई है, इसमें 122 से अधिक लोगों में उच्च जोखिम देखा गया है।

खबर है कि वायरस का प्रसार अब कोझिकोड जिले के साथ आसपास के हिस्सों में भी बढ़ता जा रहा है। मलप्पुरम में 22, वायनाड से एक और कन्नूर-त्रिशूर में तीन-तीन लोगों को संक्रमितों के निकट संपर्क वाला पाया गया है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा, संक्रमण का जोखिम तेजी से बढ़ रहा है, सुरक्षात्मक रूप से सभी लोगों को बचाव के लिए प्रयास करते रहने की आवश्यकता है। वायरस के प्रसार का जिस तरह से अलग-अलग जिलों में भी बढ़ने का जोखिम देखा जा रहा है, इस खतरे को देखते हुए आसपास के राज्यों की भी अलर्ट रहने की आवश्यकता है। निपाह, बड़ा स्वास्थ्य जोखिम हो सकता है, यह कोरोना से बड़ा खतरा हो सकता है
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निपाह के जोखिम कारक - फोटो : iStock
24 सितंबर तक प्रतिबंध

केरल का कोझिकोड जिला, इस संक्रमण के सबसे अधिक जोखिम वाला माना जा रहा है। खतरे को ध्यान में रखते हुए यहां के सभी शैक्षणिक संस्थानों को 24 सितंबर तक बंद रखने का आदेश दिया गया है। स्थानीय प्रशासन ने संक्रमण की अधिकता वाले क्षेत्रों में लोगों को न जाने की सलाह दी है। फलों-सब्जियों को खाने से पहले उसे अच्छी तरह से साफ करें। पक्षियों द्वारा कटा हुआ फल न खाएं।

इसके अलावा कुछ समय से बुखार और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण बने हुए हैं तो इस बारे में किसी स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह जरूर ले लें। संक्रमण से बचाव करते रहना सभी के लिए जरूरी है।
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निपाह के जोखिमों के बारे में जानिए - फोटो : iStock
केरल में बढ़ता जोखिम, पड़ोसी राज्य हुए अलर्ट

केरल में बढ़ते संक्रमण के जोखिमों को देखते हुए पड़ोसी राज्य भी अलर्ट हो गए हैं। पड़ोसी राज्य में निपाह के प्रकोप के बाद कर्नाटक सरकार ने दिशानिर्देश जारी करके केरल के प्रभावित क्षेत्रों की अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, निपाह संक्रमण के कारण मनोरोग और तंत्रिका संबंधी जटिलताओं (अवसाद, व्यक्तित्व परिवर्तन, ध्यान देने में कमी और इंसेफेलाइटिस) जैसी गंभीर समस्याओं के विकसित होने का भी खतरा हो सकता है, इसलिए बचाव के लिए उपाय करते रहना बहुत आवश्यक है। 

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निपाह से उपचार के लिए क्या करें? - फोटो : iStock
ऑस्ट्रेलिया से आएगी मोनोक्लोनल एंटीबॉडी

केरल में संक्रमण के बढ़ते खतरे और इसके कारण मौत के जोखिमों को देखते हुए केंद्र ने ऑस्ट्रेलिया से मोनोक्लोनल एंटीबॉडी की 20 और खुराक खरीदने का फैसला किया है। दक्षिण भारत के इस राज्य में बार-बार निपाह का प्रकोप सामने आने और कोविड की तुलना में मृत्यु दर बहुत अधिक होने के कारण, आईसीएमआर वायरल बीमारी के खिलाफ टीके विकसित करने पर काम शुरू करने की भी योजना बना रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि निपाह से संक्रमित लोगों में मृत्युदर 45-70 फीसदी के बीच हो सकता है जो काफी गंभीर चिंता का कारण है।
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निपाह के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : istock
इन लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देने की सलाह

राज्य के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, अगर किसी को 3-5 दिनों से संक्रमण के लक्षणों का अनुभव हो रहा है और ये सामान्य उपचार से ठीक नहीं हो रहा है तो इसपर गंभीरता से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। निपाह वायरस का संक्रमण अक्सर तेज बुखार से शुरू होता है, इसके साथ सिरदर्द-मांसपेशियों में दर्द और फ्लू जैसे लक्षणों का होना सामान्य प्रारंभिक लक्षण है। इसके अलावा मितली, झटके आना, सांस की समस्या भी कई संक्रमितों में देखी जा रही है जिसपर समय रहते ध्यान देना और उपचार प्राप्त करना आवश्यक हो जाता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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