फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अलर्ट: कोरोना के बीच अब इस खतरनाक वायरस का बढ़ा खतरा, इन सात लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

Sun, 05 Sep 2021 10:46 AM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
निपाह वायरस - फोटो : iStock
Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik

डॉ. परवेश मलिक 
फिजिशियन, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एमडी (जनरल मेडिसिन)


केरल में कोरोना का संक्रमण काफी तेजी से फैल रहा है और इस वजह से केरल सरकार ने पूरे राज्य में नाइट कर्फ्यू और रविवार को लॉकडाउन जारी रखने का निर्णय लिया है। इस बीच वहां अब एक नए वायरस का खतरा भी मंडराने लगा है, जिसका नाम है निपाह वायरस। बताया जा रहा है कि केरल के कोझिकोड में इस वायरस से एक 12 साल के बच्चे की मौत हो गई है। पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने इसकी पुष्टि भी कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बच्चे की तबीयत बहुत ज्यादा खराब होने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था और आखिरकार उसकी मौत हो गई। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब केरल में निपाह वायरस से कोई संक्रमित हुआ है, बल्कि वहां अक्सर इसके मामले सामने आते रहते हैं। आइए जानते हैं इस निपाह वायरस के बारे में कि यह कितना खतरनाक है और इसके लक्षण क्या-क्या हो सकते हैं?
विज्ञापन

2 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कितना खतरनाक है निपाह वायरस? 
  • विशेषज्ञों के मुताबिक, निपाह वायरस कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस वायरस से संक्रमित होने वाले लोगों में 40 से 75 फीसदी तक की मौत हो जाती है और सबसे बड़ी चिंता की बात ये है कि इसका कोई इलाज भी नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने निपाह वायरस को दुनिया के 10 सबसे खतरनाक वायरस की सूची में शामिल किया है। 
विज्ञापन

3 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
निपाह वायरस के खतरनाक होने के और भी कई कारण हैं। इसका इंक्यूबेशन पीरियड यानी संक्रामक समय बहुत लंबा होता है, कभी-कभी तो 45 दिन। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति इस वायरस से संक्रमित हो जाता है, तो उसे इसके बारे में पता ही नहीं होता और ऐसे में वह इस वायरस को और भी लोगों में फैला रहा होता है। 

4 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कैसे फैलता है ये वायरस? 
  • विशेषज्ञ कहते हैं कि फ्रुट बैट्स या चमगादड़ों में निपाह वायरस प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। यानी अगर कोई व्यक्ति चमगादड़ों के सीधे संपर्क में आता है, तो वह निपाह वायरस से संक्रमित हो सकता है। इसके अलावा दूषित भोजन करने से भी ये वायरस इंसान को संक्रमित कर सकता है। दरअसल, इस वायरस से संक्रमित चमगादड़ जब कोई फल खाते हैं, तो अपनी लार को उसी पर छोड़ देते हैं और ऐसे में इंसान जब उस फल का सेवन करता है तो वह भी इस वायरस से संक्रमित हो जाता है। लार के अलावा यह वायरस चमगादड़ के मूत्र और संभावित रूप से चमगादड़ के मल और जन्म के समय तरल पदार्थों में मौजूद होता है। 
विज्ञापन

5 of 6
निपाह वायरस के लक्षण - फोटो : iStock
निपाह वायरस के लक्षण क्या हैं? 
  • निपाह वायरस से संक्रमित लोगों में तेज बुखार, खांसी, थकान, सांस लेने में तकलीफ, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द और एनसीफिलाइटिस जैसे लक्षण दिख सकते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि एनसीफिलाइटिस होने पर दिमाग में सूजन आ जाती है और ऐसे में मरीज की मौत तक हो सकती है।  
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
निपाह वायरस से बचाव के उपाय क्या हैं? 
  • खाना खाने से पहले और खाने के बाद अपने हाथों को अच्छी तरह से जरूर धोएं। 
  • दूषित फलों को खाने से बचें (खासकर दूषित खजूर और आम) 
  • संक्रमित व्यक्ति से दूर रहें। 
  • इस वायरस की वजह से जिनकी मौत हुई हो, उनके शव से भी दूर रहें। 
नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें