कोरोना की दूसरी लहर में गंभीर संक्रमण और मौत के मामले ज्यादा देखने को मिले। डॉक्टरों का कहना है कि यदि लोगों में संक्रमण की समय पर पुष्टि हो जाए, तो उनमें इसको गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है। कोरोना की जांच के लिए प्रयोग में लाए जा रहे आरटी-पीसाआर टेस्ट की रिपोर्ट आने में सामान्यत: एक से दो दिन का समय लग जाता है, इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने कोरोना की तेज जांच का एक नया तरीका ढूंढ निकाला है। यह तरीका इस मामले में भी खास माना जा रहा है क्योंकि कि इसमें व्यक्ति के स्मार्टफोन से स्वाब लेकर वायरस की उपस्थिति का परीक्षण किया जा सकेगा। स्क्रीनिंग के इस नए तरीके में व्यक्ति के नाक या गले से सैंपल लेने की जरूरत नहीं होगी, जो आमतौर पर आरटी-पीसीआर टेस्ट के मामले में किया जाता है।
कोरोना की जांच के इस तरीके को कई तरह से अनोखा माना जा रहा है। इस टेस्ट की लागत भी कम है साथ ही श्वसन तंत्र में वायरस की उपस्थिति की जांच के अन्य तरीकों की तरह, इस टेस्ट के परिणाम भी सटीक आने का दावा किया जा रहा है। आइए कोरोना के इस अनोखे टेस्ट के बारे में विस्तार से जानते हैं।