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IVF के इलाज से पहले महिलाओं को जरूर कराने चाहिए ये टेस्ट, बांझपन के दुख से मिल जाएगा छुटकारा

Sat, 15 Feb 2020 10:05 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : pixabay
आधुनिक समाज में भी बांझपन को महिला के लिए अभिशाप के तौर पर देखा जाता है। महिला चाहे कितनी भी ऊंचे पद पर पहुंच गई हो लेकिन समाज में बांझपन के कारण मानसिक प्रताड़ना झेलनी ही पड़ती है। हांलाकि समय और विज्ञान की तरक्की के कारण इस अभिशाप से छुटकारा मिल सकता है। आईवीएफ तकनीक कई सालों से ऐसे ही घरों में किलकारी लाने का काम कर रही है जो स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों के कारण अभिभावक नहीं बन पाते या फिर जिनमें किसी तरह की प्रजनन से जुड़ी दिक्कते होती हैं। आईवीएफ तकनीक के जरिए इलाज कराते समय महिलाओं को कुछ टेस्ट के जरिए बताया जाता है कि किस तरह के इलाज की जरूरत है। तो चलिए जानें वो कौन से टेस्ट हैं जो महिलाओं के लिए जरूरी होते हैं।
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ब्लड-हॉर्मोन टेस्ट
सबसे पहले ब्लड टेस्ट और हॉर्मोन टेस्ट कराया जाता है। ब्लड टेस्ट की मदद से एनीमिया जांचा जाता है। हॉर्मोन प्रोफाइल टेस्ट कराया जाता है इसमें फीमेल हार्मोन AMH की वैल्यू पता की जाती है, एएमएच टेस्ट ओवेरियन रिज़र्व यानि अंडाशय (ओवेरी) में अण्डों के बनने की प्रक्रिया को दर्शाता है। कम एएमएच की स्थिति में अण्डे औसत से कम बनते हैं और उनकी गुणवत्ता (क्वालिटी) अच्छी नहीं होती है।
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फेलोपियन ट्यूब की जाँच 
गर्भधारण की प्राथमिक प्रक्रिया ट्यूब में होती है इसलिए ट्यूब की जांच जरुरी है | युएसजी जाँच में यह देखा जाता है की ट्यूब खुली हुई है या नहीं, कोई इन्फेक्शन तो नहीं है | ट्यूब में विकार होने पर कंसीव करने में समस्या आती है | ट्यूब ब्लॉक होने की स्थिति में आई वी एफ तकनीक कारगर है ।

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गर्भाशय की जांच
जब भी इस तकनीक की मदद से इलाज शुरू किया जाता है तो सबसे पहले ये सारे टेस्ट किए जाते हैं। युएसजी जांच में यह देखा जाता है की गर्भाशय सही तरीके से कार्य कर रहा है या नहीं।
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अंडाशय की जांच
महिलाओं का जब आईवीएफ तकनीक से इलाज किया जाता है तो इन सारे इलाज को जरूर किया जाता है। जिससे पता चल सके कि गड़बड़ी कहा हैं। इसमें अंडाशय की जांच कर यह पता लगाया जाता है की अंडे सही से बन रहे है या नहीं साथ ही अंडाशय में कोई विकार तो नहीं है। 
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