डॉ एच .पी भाराथी, डिप्टी चीफ मेडिकल अफसर ,
जिंदल नेचरक्योर इंस्टीट्यूट
डिग्री- बीएनवायएस
अनुभव- 20 वर्ष से अधिक
अस्थमा सांस से सम्बंधित एक बहुत पुरानी बीमारी है। अस्थमा से करीब 300 मिलियन लोग पीड़ित हैं और दुनिया में अस्थमा से पीड़ित कुल मरीजों की संख्या भारत में 10% है। फ्रेंच इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल रिसर्च के शोधकर्ताओं ने पाया कि पिछले सालों में उच्च यातायात तीव्रताऔर ओजोन के खतरे ने अस्थमा से पीड़ित मरीजों में रिस्क फैक्टर को बढ़ाया है। बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण से भारत में सांस से सम्बंधित बीमारी की घटनाओं में वृद्धि हो रही है, खासकर बच्चों में इस तरह की बीमारी बहुत ज्यादा हो रही है। प्राकृतिक दृष्टिकोण अपनाने से अस्थमा से पीड़ित मरीजों को लंबे समय तक स्वास्थ्य लाभ प्रदान किया जा सकता है। अगली स्लाइड्स से जानिए किस तरह बीमारी में प्राकृतिक इलाज करता है काम।