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Health Tips: सिर्फ महिलाओं को ही नहीं पुरुषों को भी होता है मूड स्विंग्स, जानें क्या हैं लक्षण

Fri, 01 Aug 2025 02:37 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हमारे समाज में एक आम धारणा है कि सिर्फ महिलाओं को ही मूड स्विंग्स होते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है ये समस्या पुरुषों में हो सकती है। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं, साथ ही पुरुषों में मूड स्विंग्स के लक्षण और बचाव के बारे में भी जानते हैं।
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पुरुषों में मूड स्विंग्स - फोटो : Adobe Stock
Mood Swings In Men: अक्सर ऐसा माना जाता है कि मूड स्विंग्स सिर्फ महिलाओं में होने वाली एक समस्या है, जो उनके मासिक धर्म चक्र या हार्मोनल बदलावों से जुड़ी होती है। लेकिन बहुत कम लोगों को मालूम है कि मूड स्विंग्स सिर्फ महिलाओं में नहीं पुरुषों में भी होती है। यह एक ऐसी गलत धारणा है जिसके कारण समाज में पुरुषों में होने वाले मूड स्विंग्स को अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है, या उसे 'चिड़चिड़ापन' या 'गुस्सा' मानकर खारिज कर दिया जाता है। 

सच तो यह है कि मूड स्विंग्स एक सार्वभौमिक मानवीय अनुभव है, और पुरुष भी इससे अछूते नहीं हैं। शारीरिक, हार्मोनल और मनोवैज्ञानिक कारणों से उनमें भी भावनात्मक उतार-चढ़ाव आते हैं, जो उनकी व्यक्तिगत और पेशेवर जिंदगी पर गहरा असर डालते हैं। आइए इस लेख में जानते हैं कि पुरुषों में मूड स्विंग्स के पीछे क्या कारण होते हैं, साथ ही ये भी जानेंगे कि उनके क्या लक्षण होते हैं।
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पुरुषों में मूड स्विंग्स - फोटो : Freepik
पुरुषों में मूड स्विंग्स के कारण
पुरुषों में मूड स्विंग्स के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ शारीरिक और कुछ जीवनशैली से जुड़े हैं। सबसे प्रमुख कारणों में से एक है टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर घटना। उम्र बढ़ने के साथ, विशेषकर 30 के बाद, पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है, जिससे चिड़चिड़ापन, थकान और अवसाद जैसे लक्षण पैदा हो सकते हैं। इसे एंड्रोपॉज भी कहते हैं।

इसके अलावा क्रोनिक स्ट्रेस भी एक बड़ा कारण है। काम का दबाव, वित्तीय चिंताएं और पारिवारिक जिम्मेदारियां तनाव के स्तर को बढ़ाती हैं, जिससे मूड में बार-बार बदलाव आते हैं। नींद की कमी, खराब खान-पान, शराब का अधिक सेवन और सेडेंटरी लाइफस्टाइल भी इस समस्या को बढ़ा सकती है।
 

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पुरुषों में मूड स्विंग्स - फोटो : Adobe Stock
लक्षणों को कैसे पहचानें?
पुरुषों में मूड स्विंग्स के लक्षण अक्सर महिलाओं की तुलना में अलग तरीके से प्रकट होते हैं। जहां महिलाओं में ज्यादातर उदासी या रोने की प्रवृत्ति दिख सकती है, वहीं पुरुषों में यह अक्सर चिड़चिड़ापन और अचानक गुस्सा आने के रूप में सामने आ सकता है। वे छोटी-छोटी बातों पर भड़क सकते हैं या आसानी से निराश हो सकते हैं।

अन्य प्रमुख लक्षणों में लगातार थकान और ऊर्जा की कमी महसूस कर सकते हैं, इतना ही नहीं उन गतिविधियों में भी रुचि लेना कम देते हैं जो उन्हें पहले पसंद थीं। इसके अलावा, नींद के पैटर्न में बदलाव देखने को मिलता है, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और भूख में बदलाव भी इसके संकेत हो सकते हैं। अगर किसी को ये लक्षण दिखते हैं तो उन्हें नजरअंदाज किए बगैर किसी डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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स्ट्रेस की समस्या - फोटो : freepik.com
क्या है इसका असर?
पुरुषों में मूड स्विंग्स की समस्या को गंभीरता से न लेने पर इसके कई नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं। सबसे पहले, यह रिश्तों पर बुरा असर डालता है। बार-बार होने वाले गुस्से या चिड़चिड़े व्यवहार से परिवार, दोस्तों और पार्टनर के साथ संबंधों में तनाव आ सकता है। काम के प्रदर्शन पर भी इसका बुरा असर पड़ सकता है, क्योंकि ध्यान केंद्रित करने और निर्णय लेने की क्षमता कम हो जाती है।

सबसे गंभीर बात यह है कि अनियंत्रित मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ापन अक्सर डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का शुरुआती संकेत हो सकते हैं। इसलिए, इस समस्या को अनदेखा करना बहुत हानिकारक हो सकता है।
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तनाव की समस्या - फोटो : Adobe stock
पुरुषों में मूड स्विंग्स को नियंत्रित करने के लिए कई प्रभावी तरीके हैं। सबसे पहले, जीवनशैली में बदलाव लाना जरूरी है। एक संतुलित आहार लें, जिसमें ताजे फल, सब्जियां और ओमेगा-3 फैटी एसिड शामिल हों। नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम करें, जिससे हार्मोन संतुलित होते हैं और तनाव कम होता है। पर्याप्त नींद लेना भी बहुत महत्वपूर्ण है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर समस्या बनी रहती है, तो किसी डॉक्टर या थेरेपिस्ट से सलाह लेने में न हिचकिचाएं।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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