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Monsoon Fever vs Dengue: मौसमी बुखार और डेंगू में क्या है अंतर? ऐसे कर सकते हैं डेंगू की पहचान

Mon, 14 Jul 2025 01:57 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बारीश के मौसम में डेंगू और मौसमी बुखार का खतरा बढ़ जाता है। शुरुआत में इन दोनों के लक्षण इतने मिलते-जुलते होते हैं, जैसे बुखार, थकान और पूरे शरीर में दर्द, कि इनमें फर्क कर पाना बेहद मुश्किल हो जाता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।
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बुखार - फोटो : Adobe Stock
Dengue Identification Tips: मानसून का मौसम आते ही गर्मी से राहत मिलती है, वहीं दूसरी ओर बारिश की वजह से वातावरण में नमी बढ़ जाती है, जिसकी वजह से कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। इनमें मौसमी बुखार और डेंगू सबसे आम बीमारी है, जो अक्सर लोगों को अपनी चपेट में ले लेती हैं। शुरुआत में इन दोनों के लक्षण इतने मिलते-जुलते हैं, जैसे बुखार, थकान और पूरे शरीर में दर्द, कि इनमें फर्क कर पाना बेहद मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि कई बार डेंगू जैसे गंभीर संक्रमण को सामान्य बुखार समझकर लोग अनदेखा कर देते हैं।

हालांकि, यह समझना बेहद जरूरी है कि डेंगू एक गंभीर, मच्छर जनित बीमारी है जो अगर समय पर न पहचानी जाए और इसका इलाज न हो, तो यह जानलेवा साबित हो सकती है। सही समय पर उचित उपचार के लिए इन दोनों के बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लक्षणों पर बारीकी से ध्यान देकर और आवश्यक रक्त जांच करवाकर ही डेंगू की सही पहचान की जा सकती है। आइए इस लेख में हम मौसमी बुखार और डेंगू के बीच के लक्षणों के बारीक अंतर को समझते हैं ताकि आप सही समय पर सही कदम उठा सकें।
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Fever - फोटो : Freepik
मौसमी बुखार के लक्षण और कारण
मौसमी बुखार आमतौर पर वायरस या बैक्टीरिया के कारण होता है और इसके लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं। इसमें हल्का बुखार (100-102°F), खांसी, नाक बहना, गले में खराश और हल्का शरीर दर्द शामिल हो सकता है। यह बुखार अक्सर खानपान में असावधानी, दूषित पानी या मौसमी बदलाव के कारण होता है। 

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बुखार - फोटो : Adobe Stock
दूसरी ओर डेंगू बुखार एडीज मच्छर के काटने से फैलता है और इसके लक्षण अचानक शुरू होते हैं। डेंगू में तेज बुखार (104°F तक), गंभीर सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में तीव्र दर्द (जिसे 'ब्रेक बोन फीवर' भी कहते हैं), और त्वचा पर लाल चकत्ते दिखाई दे सकते हैं।
 
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मच्छरों से होने वाली बीमारियां - फोटो : Freepik.com
डेंगू के विशिष्ट लक्षण
डेंगू के गंभीर बीमारी है जिसमें कुछ विशेष लक्षण दिखते हैं, जो इसे मौसमी बुखार से अलग करते हैं। इनमें नाक या मसूड़ों से खून बहना, उल्टी में खून आना, पेट में तेज दर्द, सांस लेने में तकलीफ और अत्यधिक थकान महसूस होना शामिल है। डेंगू में प्लेटलेट काउंट तेजी से कम हो सकता है, जो मौसमी बुखार में आमतौर पर नहीं होता। मौसमी बुखार के लक्षण 3-5 दिनों में ठीक हो सकते हैं, जबकि डेंगू के लक्षण 4-7 दिनों तक रहते हैं और गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए, बुखार के साथ इन लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है।
 
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डेंगू-मलेरिया का खतरा - फोटो : Freepik.com
डेंगू की पहचान और उपचार
डेंगू की पुष्टि के लिए रक्त जांच, जैसे NS1 एंटीजन टेस्ट या कंप्लीट ब्लड काउंट (सीबीसी) आवश्यक है। सीबीसी टेस्ट में प्लेटलेट काउंट 1,00,000 से कम होने पर डेंगू का संदेह बढ़ता है। मौसमी बुखार में ऐसी जांच की जरूरत कम पड़ती है, क्योंकि इसके लक्षण हल्के होते हैं और वायरल बुखार के उपचार से ठीक हो सकते हैं। डेंगू के इलाज में कोई विशेष दवा नहीं है, लेकिन पर्याप्त तरल पदार्थ, जैसे पानी, ORS, या नारियल पानी, पीना और आराम करना जरूरी है। गंभीर मामलों में अस्पताल में IV फ्लूइड्स दिए जा सकते हैं।
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डेंगू का मच्छर - फोटो : social media
बचाव के लिए जरूरी कदम
डेंगू से बचाव के लिए मच्छरों से दूर रहना जरूरी है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी और रेपेलेंट का उपयोग करें। मौसमी बुखार से बचने के लिए स्वच्छ पानी पिएं, खानपान में सावधानी बरतें और इम्यूनिटी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ खाएं। यदि बुखार 3 दिन से अधिक रहे या डेंगू के लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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