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Alert: भारतीयों की ये एक गड़बड़ आदत बनती जा रही है 'साइलेंट महामारी' का कारण, ICMR की सख्त चेतावनी

Sun, 13 Jul 2025 07:44 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • आईसीएमआर के राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने कहा, भारत में लोग बहुत ज्यादा नमक खा रहे हैं। अत्यधिक नमक का सेवन भारत में एक साइलेंट महामारी को बढ़ावा दे रहा है। 
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हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Freepik.com
Indians Taking Too Much Salt: हृदय रोगों के मामले दुनियाभर में तेजी से बढ़ते जा रहे है। कुछ दशकों पहले तक इसे बुढ़ापे की बीमारी माना जाता था, हालांकि अब कम उम्र के लोग यहां तक कि 20 से कम उम्र में लोग न सिर्फ हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं, बल्कि बड़ी संख्या में इससे लोगों की मौतें भी हो रही हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस तरह से हमारी लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी बढ़ती जा रही है, हृदय रोगों का खतरा भी इसी के सापेक्ष बढ़ गया है।

कई अध्ययन आहार में गड़बड़ी और हृदय रोगों के बीच संबंधों को लेकर लगातार सावधान करते रहे हैं। सोडियम (खाने के नमक) के अधिक सेवन को इसका बड़ा कारण माना जाता है। चिंताजनक बात ये है कि भारतीय आबादी नमक का सेवन बहुत अधिक मात्रा में कर रही है जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने फिर से अलर्ट किया है।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ( आईसीएमआर) ने भी हालिया रिपोर्ट में इस विषय पर चिंता व्यक्त करते हुए सभी लोगों को सावधान रहने की सलाह दी है।
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भारत में लोग बहुत ज्यादा नमक खा रहे हैं। - फोटो : Adobestock
'भारतीय लोग खा रहे हैं बहुत ज्यादा नमक'

आईसीएमआर के राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने कहा, भारत में लोग बहुत ज्यादा नमक खा रहे हैं। अत्यधिक नमक का सेवन भारत में एक साइलेंट महामारी को बढ़ावा दे रहा है। इससे न केवल हृदय रोगों का खतरा रहता है बल्कि ये आदत उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक और किडनी की बीमारियों को भी बढ़ाने वाली हो सकती है। 

वैज्ञानिकों ने इस समस्या के समाधान के लिए समुदाय-आधारित नमक का सेवन कम करने को लेकर अध्ययन शुरू किया है, जिसमें लो सोडियम वाले नमक के विकल्पों पर ध्यान केंद्रित कर उन्हें बढ़ावा देने पर विचार किया जा रहा है।


(ये भी पढ़िए- अध्ययन में हृदय रोगों के 'हिडेन रिस्क' का खुलासा, महिलाएं हो जाएं सावधान)
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नमक का अधिक सेवन और इसके दुष्प्रभाव - फोटो : Freepik
कितना नमक खाना सेहत के लिए ठीक?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सुझावों पर गौर करें तो इसके मुताबिक प्रति व्यक्ति को दिन में 5 ग्राम से कम ही नमक का सेवन करना चाहिए। हालांकि अध्ययनों से पता चलता है कि शहरी क्षेत्रों में भारतीय लोग रोजाना लगभग 9.2 ग्राम नमक खा रहे हैं। इतना ही नहीं, ग्रामीण इलाकों में भी यह लगभग 5.6 ग्राम/दिन है। ये दोनों ही अनुशंसित मात्रा से कहीं ज्यादा हैं।

राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान (एनआईई) के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अध्ययन के प्रमुख अन्वेषक डॉ. शरण मुरली ने कहा, हम उस तरीके पर विचार कर रहे है जिससे सोडियम क्लोराइड के एक हिस्से को पोटेशियम या मैग्नीशियम लवणों से बदल दिया जाता है।

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सोडियम की अधिकता और हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेेषज्ञ?

प्रमुख अध्ययनकर्ता डॉ. शरण मुरली ने कहा, लो सोडियम का सेवन रक्तचाप को कम करने और समग्र हृदय स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद करता है। सिर्फ लो सोडियम वाले नमक पर स्विच करने से रक्तचाप औसतन 7/4 mmHg तक कम हो सकता है, यह एक छोटा सा बदलाव है जिसका बड़ा प्रभाव पड़ता है।

अधिक नमक के सेवन की समस्या से निपटने के लिए, एनआईई ने आईसीएमआर के सहयोग से पंजाब और तेलंगाना में तीन साल की एक परियोजना शुरू की है। इसका लक्ष्य स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों (एचडब्ल्यूसी) में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा दिए लोगों को नमक का सेवन कम करने के लिए जागरूक करना है। 
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नमक के सेवन को कम करने की सलाह - फोटो : freepik
आहार, शरीर और हृदय में संतुलन बनाना जरूरी

डॉ. मुरली ने कहा, यह केवल नमक कम करने के बारे में नहीं है। यह हमारे आहार, हमारे शरीर और हमारे हृदय में संतुलन बनाए रखने के बारे में भी है। साथ मिलकर, नमक का सेवन कम करके हम स्थायी बदलाव ला सकते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर हम सभी आज से ही नमक खाना कम कर दें तो भविष्य में हृदय रोगों के खतरे से काफी हृद तक बचाव हो सकता है। नमक कम खाने का मतलब सिर्फ भोजन में नमक कम डालने से नहीं है, चिप्स-नमकीन और जंक फूड्स में भी हिडेन नमक होता है इसपर भी हमें विशेष ध्यान देना चाहिए।



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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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