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Monkeypox Outbreak: क्या कोविड-19 की तरह बढ़ रहा है एक और महामारी का खतरा? जानिए भारत के लिए कितनी बड़ी चिंता

Thu, 26 May 2022 02:09 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मंकीपॉक्स संक्रमण ने बढ़ाई चिंता - फोटो : WHO
दुनिया के कई विकसित देशों में पिछले कुछ दिनों से मंकीपॉक्स संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। मंकीपॉक्स संक्रमण मुख्यरूप से अब तक मध्य और पश्चिम अफ्रीका के हिस्सों में अधिक देखा जाता रहा है, हालांकि पिछले कुछ समय से यूरोपीय देशों में इसके बढ़ते मामले विशेषज्ञों के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं।

अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया सहित नौ यूरोपीय देशों में मंकीपॉक्स के मामले तेजी से बढ़े हैं। यूरोपीय देशों में मंकीपॉक्स का यह अब तक का सबसे बड़ा प्रकोप बताया जा रहा है। तेजी से बढ़ते संक्रमण को देखते हुए अब एक बड़ा सवाल खड़ा होने लगा है कि क्या दुनिया के कई देश कोविड-19 की ही तरह एक और महामारी की तरफ बढ़ रहे हैं?

पिछले दिनों 7 मई को पहली बार नाइजीरिया से इंग्लैंड लौटे एक व्यक्ति में मंकीपॉक्स की पुष्टि हुई थी। तब से अब तक यूरोप के कई देशों में इस दुर्लभ वायरल संक्रमण के 100 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं। विकसित देशों में मंकीपॉक्स के मामले काफी दुर्लभ माने जाते रहे हैं, हालांकि जिस गति से अब यह बढ़ रहा है, उससे वैज्ञानिक काफी चिंतित है। आइए आगे इसके संभावित खतरों के बारे में जानते हैं।
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दुनिया के कई देशों में बढ़े मामले - फोटो : istock
एक और महामारी का खतरा?

मंकीपॉक्स का प्रकोप इस समय ज्यादातर यूरोपीय देशों में देखने को मिल रहा है, तो क्या यह कोविड-19 की तरह एक और महामारी का कारण बन सकता है? इस खतरे को लेकर वैज्ञानिकों की एक टीम ने लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा है कि फिलहाल इस तरह की आशंका नहीं है।

मंकीपॉक्स संक्रमण, सार्स-सीओवी-2 जितनी आसानी से नहीं फैलता है, इसकी रफ्तार काफी कम होती है। ऐसे में मंकीपॉक्स का प्रकोप महामारी का रूप ले सकता है, इसकी आशंका नहीं है। हालांकि जिस रफ्तार से पहली बार इसे बढ़ता देखा जा रहा है वह निश्चित ही अलर्ट करने वाली स्थिति है।
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मंकीपॉक्स की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं वैज्ञानिक?

मंकीपॉक्स के बढ़ते प्रकोप को लेकर जर्मनी में रॉबर्ट कोच इंस्टीट्यूट के एक शोधकर्ता फैबियन लिएन्डर्ट्ज़ कहते हैं, मंकीपॉक्स का बढ़ता संक्रमण चिंताकारक जरूर है पर इसकी कोविड-19 के खतरे से तुलना करना ठीक नहीं है।  कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के माध्यम इसके मामलों को आसानी से आइसोलेट किया जा सकता है, साथ ही इस प्रकोप पर नियंत्रण पाने के लिए दवाएं और प्रभावी टीके भी हैं। ऐसे में सभी देशों को बचाव के उपायों को प्रयोग में लाते हुए इसे जल्द से जल्द नियंत्रित करने की दिशा में काम करना होगा। 

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मंकीपॉक्स प्रकोप के कारण बिगड़े हालात - फोटो : Pixabay
क्यों अचानक से बढ़ा है मंकीपॉक्स का खतरा?

मंकीपॉक्स के बढ़ते प्रकोप ने कई तरह के सवाल खड़े किए हैं। लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन में प्रोफेसर जिमी व्हिटवर्थ कहती हैं, मंकीपॉक्स प्रकोप बढ़ने के पीछे संभवत: हाल फिलहाल कोविड-19 को लेकर हटे प्रतिबंध और दोबारा शुरू हुई विदेश यात्राओं को माना जा सकता है।

वैसे तो इसके राष्ट्रव्यापी महामारी का कारण बनने की आशंका नहीं है, पर सभी देशों को इसकी ट्रैकिंग और रोकथाम को लेकर सख्ती दिखाने की आवश्यकता जरूर है। अभी मामले कम हैं, इसे आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है।
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मंकीपॉक्स के लक्षण और बचाव के तरीके - फोटो : istock
भारत के लिए कितना खतरा?

रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में मंकीपॉक्स के अब तक कोई भी मामले नहीं हैं, हालांकि वैश्विक स्तर पर बढ़ते खतरे को देखते हुए यहां भी अलर्ट जारी किया गया है। यूरोपीय देशों से भारत में भी आवागमन जारी है, ऐसे में संभावित खतरे को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट किया है।

भारत में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्वास्थ्य संगठनों को प्रकोप पर कड़ी नजर रखने का निर्देश दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश में फिलहाल मंकीपॉक्स को लेकर घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। 



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स्रोत और संदर्भ: 
Monkeypox is a viral zoonotic disease

अस्वीकरण नोट: यह लेख विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की वेबसाइट से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। संबंधित विषय के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए अपने चिकित्सक से सलाह लें। 
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