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कोरोनाकाल में कहीं आप में भी तो नहीं हो गया भय का संक्रमण? अकेले नहीं हैं आप

Sat, 05 Jun 2021 07:19 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लोगों में कोरोना से अधिक तो भय का संक्रमण हुआ है - फोटो : Social Media

Medically Reviewed by Dr. Ashish Sabwani

डॉ आशीष साबवानी

चर्म रोग विशेषज्ञ, रेडिएंट स्किन क्लिनिक, लखनऊ

डिग्री- एमबीबीएस, एमडी- डर्मेटोलॉजी

अनुभव- 7 वर्ष

दिल्ली में रहने वाले आकाश को पूरी रातभर नींद नहीं आती है और यदि नींद आ भी जाती है तो पूरी रात उस एंबुलेंस के साइरन की आवाजें सुनाई देती हैं जबकि उसके आसपास पूरी शांति पसरी रहती है। भोपाल में रहने वाली 28 वर्षीय अंकिता को बार-बार लगता है कि उसे कोरोना हो जाएगा और उसे यदि कोरोना हुआ तो घर में पिता, जो कि कैंसर के मरीज हैं, उनकी जान जोखिम में आ जाएगी। कोरोनाकाल ने दुनियाभर में लोगों को मानसिक रूप से अस्वस्थ करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। कोरोना की दूसरी लहर में मौतों के बढ़े आंकड़ों के कारण तनाव और अवसाद से पीड़ित लोगोंं की संख्या में भी अचानक से उछाल आया है। मानसिक रूप से अस्वस्थ होने का यह प्रभाव काम, परिवार , शरीर, जीवन सभी पर पड़ता है। चिकित्सक के अनुसार, लोगों में कोरोना से अधिक तो भय का संक्रमण हुआ है। आइए जानते हैं तनाव से होने वाले भय के संक्रमण के प्रकार। 

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कोरोना के दूसरे चरण में देखा गया है - फोटो : Pixabay

मृत्यु का डर
बेंगलुरु में स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेस के अनुसार, कठिन परिस्थिति में दोस्तों और परिवार से दूर मृत्यु को प्राप्त होने का डर कई सारे लोगों में महामारी के दौरान पाया गया। यह डर महामारी के पहले चरण में इतना नहीं था जितना कि इसे अभी पिछले महीनों में कोरोना के दूसरे चरण में देखा गया है। मनोचिकित्सक के अनुसार अटैक से होने वाली अकाल मृत्यु और ब्लैक फंगस जैसी बीमारियों का भी इस डर के उपजने में बहुत हद तक योगदान है। 

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भय उनपर हावी होने लगा है - फोटो : Pixabay

परिवार को खोने का डर
युवाओं में मनोचिकित्सकों ने यह डर अधिक देखा है। युवा जानते हैं कि वे स्वस्थ हैं लेकिन वे घर के अन्य सदस्यों के प्रति इतना तनाव पाल रहे हैं कि यह भय उनपर हावी होने लगा है। पिछले दिनों लोगों ने देखा कि किस तरह से कोरोना ने उनसे अचानक ही उनके परिवार के सदस्यों को छीन लिया है इसलिए कई लोगों में इस तरह का डर बहुत ज्यादा बढ़ गया है। 

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खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं - फोटो : सोशल मीडिया

अकेले रहने का डर
अकेले रह जाने का डर सबसे खराब है। विशेषज्ञ के अनुसार, इस तरह का भय पालने वाले अधिकांश लोग अपने आसपास लोगों के होने के बावजूद भी खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं। कई बार वे अजीबोगरीब परिस्थितियों का मस्तिष्क में निर्माण कर लेते हैं और उसमें खुद को अकेला फंसा हुआ पाते हैं, इसी के इर्द-गिर्द वे पूरा दिन घूमते रहते हैं। जिससे कि तनाव और भी बढ़ जाता है। महिलाएं पिछले दिनों इस तरह के डर से बहुत ज्यादा ग्रसित नजर आ रही हैं। उन्हें अकेले रहने का डर बहुत अधिक सताता है। 

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खुद को असफल मानने की गलती भी कर रहे हैं - फोटो : Pixabay

भविष्य का डर
अधिकांश लोग भविष्य को लेकर बहुत अधिक चिंता कर रहे हैं क्योंकि उन्हें प्रतिक्षण यह डर सताता रहता है कि कब उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ जाए, विद्यार्थियों को परीक्षाएं देने को नहीं मिल रही है, इस कारण वे भी भविष्य को लेकर कुछ सोच नहीं पा रहे हैं। ऐसे लोग खुद को असफल मानने की गलती भी कर रहे हैं। भविष्य को लेकर अनिश्चितताएं इंसान को तनावग्रस्त तो बना ही रही है, साथ ही लोग चिढ़चिढ़े भी हो रहे हैं। 

नोट- यह लेखरेडिएंट स्किन क्लीनिक के डॉ आशीष साबवानी से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉक्टर आशीष साबवानी पिछले सात सालों से प्रैक्टिस कर रहे हैं। उन्होंने अपनी डिग्रियां केजीएमसी लखनऊ एवं एमयूएचएस नासिक से ली है। 

अस्वीकरण- अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

 
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