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सावधान: तेजी से बढ़ रहे हैं फेफड़ों में कैंसर के मामले, शरीर में इन दो समस्याओं से कर सकते हैं इसकी पहचान

Mon, 18 Oct 2021 02:04 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फेफड़ों में कैंसर की समस्या - फोटो : iStock
कैंसर को दुनियाभर में सबसे खतरनाक और जानलेवा बीमारियों में से एक माना जाता है। हाल के वर्षों में जीवनशैली से संबंधित गड़बड़ी और खान-पान की आदतों के चलते कई प्रकार के कैंसर के मामलों में तेजी से उछाल देखने को मिला है, फेफड़ों में होने वाला कैंसर ऐसी ही एक गंभीर समस्या है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक धूम्रपान करने की आदत के चलते लोगों में इस प्रकार के कैंसर के मामले पिछले एक-दो दशक में काफी बढ़ गए हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि जब तक कैंसर के मामले अंतिम चरण तक नहीं पहुंच जाते हैं, तब तक लोगों में इसका निदान नहीं हो पाता है। अगर समय रहते इसका पता चल जाए तो कैंसर का इलाज आसान हो सकता है साथ ही रोगी के जान बचने की संभावना भी बढ़ जाती है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक फेफड़ों के कैंसर के लक्षण परंपरागत रूप से श्वसन संबंधी समस्याओं से जुड़े होते हैं। हालांकि कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि आपके चलने के तरीके में गड़बड़ी भी इस गंभीर रोग के सूचक हो सकते हैं। आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं। 
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फेफड़ों के कैंसर की कैसे करें पहचान - फोटो : Pixabay
फेफड़ों के कैंसर के सामान्य लक्षण
अध्ययनों में पाया गया है कि फेफड़ों के कैंसर की स्थिति में रोगी की तंत्रिका तंत्र भी प्रभावित हो सकती है, ऐसी स्थिति में रोगी के लिए अपना संतुलन बनाए रखने में कठिनाई हो सकती है। अगर समय रहते फेफड़ों के कैंसर के लक्षण की पहचान कर ली जाए तो रोगी की जान बचाना आसान हो सकता है।  फेफड़ों के कैंसर के आमतौर पर ऐसे लक्षण होते हैं।
  • लगातार खांसी बनी रहना जो समय के साथ और गंभीर हो जाती है।
  • खांसी में कफ के साथ खून आना।
  • सीने में दर्द जो अक्सर गहरी सांस लेने, खांसने या हंसने से बढ़ जाता है।
  • आवाज बैठना।
  • भूख में कमी।
  • वजन घटाने की समस्या।
  • सांस लेने में कठिनाई।
  • थकान या कमजोरी महसूस होना
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फेफड़े के कैंसर - फोटो : Pixabay
चलने में कठिनाई और फेफड़ों के कैंसर का संबंध
अध्ययनों से पता चलता है कि मांसपेशियों की गति को बनाए रखने के लिए तंत्रिका तंत्र जिम्मेदार है। इसलिए जब इसके सामान्य कार्य प्रभावित होते हैं, तो शारीरिक संतुलन और स्थिरता में समस्या आ सकती है। स्माल-सेल लंग कैंसर तंत्रिका तंत्र पर हमला करती है, जिसके कारण लोगों को चलने और शारीरिक संतुलन को बनाए रखने में कठिनाई हो सकती है। इस कारण से रोगी को चलते समय चक्कर आने और खड़े होने में भी कठिनाई महसूस होने की समस्या हो सकती है।

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फेफड़ों के कैंसर का निदान - फोटो : Pixabay
शारीरिक संतुलन से संबंधित समस्या
शोधकर्ताओं का कहना है कि वैसे तो शारीरिक संतुलन से संबंधित सभी प्रकार की कठिनाइयां सीधे फेफड़ों के कैंसर के जोखिम से जुड़ी हुई नहीं हैं। कुछ लोगों को सिर में चोट लगने, माइग्रेन और पैरों में तंत्रिका संबंधी समस्याओं के कारण भी यह दिक्कत हो सकती है। हालांकि फेफड़ों के कैंसर के मामले में यदि शारीरिक संतुलन की समस्या के साथ सांस की तकलीफ, आवाज में परिवर्तन, सीने में दर्द महसूस होता है तो इसका निदान करना महत्वपूर्ण हो जाता है।
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फेफड़ों के कैंसर की रोकथान - फोटो : iStock
फेफड़ों के कैंसर से बचाव कैसे करें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ उपायों को प्रयोग में लाकर फेफड़ों के कैंसर होने की आशंका को कम किया जा सकता है। इसके लिए सबसे आवश्यक है धूम्रपान न करना। इसके अलावा भोजन में हरी सब्जियों और फलों के साथ अन्य पौष्टिक चीजों को शामिल करने के साथ व्यायाम अवश्य करें। यदि आपको फेफड़ों में किसी भी तरह की असामान्यता का अनुभव होता है तो इस बारे में डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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